नपे मुलायम के खास अफसर पंधारी यादव
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सत्ता के बेहद करीब माने जा रहे पंधारी यादव तमाम पेशबंदी के बाद भी बच नहीं सके।
करीब 5000 करोड़ रुपये के मनरेगा घोटाले में सीबीआई के रिपोर्ट दर्ज कराने के महज 24 घंटे के भीतर ही मुख्यमंत्री सचिवालय से उनकी छुट्टी कर दी गई।
उन्हें मुख्यमंत्री के सचिव पद से हटाकर आवास सचिव के पद पर तैनाती दी गई है।
पंधारी अखिलेश सरकार के चुनिंदा भरोसेमंद अफसरों में गिने जाते हैं और मनरेगा घोटाले में उनका नाम होने की वजह से ही सरकार इस मामले की सीबीआई जांच कराने से बच रही थी।
औरों पर भी गिर सकती है गाज
पंधारी को ‘पंचम तल’ से हटाए जाने के बाद ग्राम्य विकास विभाग के राज्यमंत्री अरविंद सिंह गोप ने विभाग के आला अधिकारियों को तलब कर मैराथन बैठक की।
माना जा रहा है कि इस मामले में जल्द ही कुछ और अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। पंधारी के अलावा मायावती सरकार के आधा दर्जन से ज्यादा डीएम समेत 100 से ज्यादा अधिकारी मनरेगा घोटाले की जांच के दायरे में हैं।
सीबीआई की ओर से शुक्रवार को मनरेगा घोटाले में पांच एफआईआर दर्ज कराने के बाद राज्य सरकार पर घोटाले के आरोपी अफसरों, खास तौर पर पंधारी पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया था। आखिरकार शनिवार को पंधारी की पंचम तल से विदाई हो ही गई।
पंधारी को हटाए जाने के साथ यह भी साफ हो गया है कि जल्द ही इस मामले में आरोपी अन्य तत्कालीन जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों व ग्राम्य विकास विभाग के अफसरों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
इन विभागों की थी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री के सचिव होने के नाते पंधारी खाद्य एवं रसद, आवास एवं शहरी नियोजन, खेलकूद, प्रशासनिक सुधार, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ, सूचना, पिछड़ा वर्ग कल्याण, कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान, कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार, राज्य संपत्ति, सचिवालय प्रशासन, पर्यटन, नागरिक उड्डयन, संस्कृति, प्रोटोकॉल, होमगार्ड्स, नागरिक सुरक्षा एवं राजनीतिक पेंशन जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
मुलायम के भरोसेमंद अफसर हैं यादव
सचिवालय एनेक्सी के ‘पंचम तल’ पर तैनात अफसरों में अनीता सिंह के बाद पंधारी यादव सबसे ज्यादा ताकतवर थे।
अखिलेश के साथ-साथ वह मुलायम के भरोसे वाले अफसरों में गिने जाते हैं। राजनीतिक संपर्कों के चलते मुलायम की पिछली सरकार में भी उन्हें अहम तैनाती मिलती रही।
इस सरकार में भी महत्वपूर्ण फाइलें पंधारी के माध्यम से मुख्यमंत्री तक जाती रही हैं।
पंधारी सबसे बड़े आरोपी
मनरेगा घोटाले में पंधारी यादव सबसे बड़े आरोपी बताए जा रहे हैं। 5000 करोड़ रुपये के घोटाले में अकेले 250 करोड़ रुपये का घोटाला सोनभद्र में हुआ।
इस दौरान पंधारी वहां डीएम थे। 2009-10 में इस छोटे से जिले में मनरेगा के नाम पर करीब 250 करोड़ खर्च कर दिए गए।
पंधारी के डीएम रहने के दौरान सोनभद्र में जो चेकडैम बनाए गए या मरम्मत करवाई गई, उनमें कुछ समय बाद ही दरारें पड़ गईं।एक ही तालाब कई-कई बार खोदवाया गया।राजनीतिक हस्तियों व आईएएस अफसरों के रिश्तेदारों के नाम से बनी फर्जी फर्मों से 150 करोड़ रुपये की खरीद सामने आई।
जिस संस्था को थर्ड पार्टी मॉनीटर की जिम्मेदारी दी गई उसको भी प्रचार-प्रसार के नाम पर 15 लाख रुपये का भुगतान दिखा दिया। सौ-सौ किमी. दूर से निर्माण सामग्री खरीदी गई।
केंद्र की चिट्ठी पर चेती सरकार
केंद्र सरकार ने मनरेगा के वित्तीय वर्ष 2014-15 के श्रम बजट की स्वीकृति के साथ यूपी में मनरेगा की सीबीआई जांच के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के पत्र पर कार्रवाई का भी दबाव बना दिया था।
मंत्रालय की ओर से प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास को 10 फरवरी को एक पत्र लिखा गया था।
इसमें मंत्री द्वारा मनरेगा घोटाले की सीबीआई जांच के संबंध में वर्ष 2013 में लिखे गए पत्रों की ओर संकेत किया गया था और हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए इस पर तत्काल कदम उठाने को कहा गया था।