चलती ट्रेन से बेटियों को एक-एक कर फेंका और चैन से सो गया, आरोपी पिता ने कुबूला जुर्म
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सीतापुर में चार मासूम बेटियों को ट्रेन से फेंकने के आरोपी पिता इद्दू अंसारी ने बताया कि बिहार से जम्मू जाते समय अलबुन, सलीना, मुन्नी, राबिया को फेंकने के बाद वह चुपचाप सो गया था। एसपी जीआरपी सौमित्र यादव व सीओ अमिता सिंह से पूछताछ के दौरान इद्दू ने कबूला कि दो बेटों रईस व लईम को जन्म देने के कुछ दिनों बाद पत्नी की मौत हो गई। इस पर उसने अफरीना खातून से शादी की।
अफरीना ने पांच बेटियों को जन्म दिया। इस पर घर खर्च बढ़ता जा रहा था। बड़े बेटे को अपने साथ मजदूरी में लगा लिया। छोटा बेटा भी छुटपुट काम करके खर्च में हाथ बंटाता था लेकिन बेटियां बोझ नजर आ रही थीं।
उसने बताया कि सफर के दौरान शराब पी और नशा चढ़ने पर बेटियों को ट्रेन से फेंकने का इरादा बना डाला। पत्नी दुधमुंही बेटी हसीना को सीने से लगाकर सो रही थी। बेटे, बेटियां व अन्य यात्री सोए थे। इसी दौरान बेटियों में से एक-एक को चलती ट्रेन से फेंकने के बाद अपनी सीट पर जाकर सो गया था।
दो दिन बाद पत्नी को बताया सच
इद्दू ने कुबूला कि सफर के दौरान जागी अफरीना ने चार बेटियों को गायब देखकर शोर मचाने के साथ उसे जगाया। इस पर वह बच्चियों को तलाश करने का नाटक करता रहा। जम्मू पहुंचने पर पत्नी को समझाया कि बच्चियों को कोई उठा ले गया होगा या फिर किसी स्टेशन पर उतर गई होंगी। उसने कहा कि पत्नी तलाश करने का दबाव बना रही थी, लेकिन वह अपना कृत्य भुला नहीं पा रहा था। दो दिन बाद उसने अफरीना को सच बता दिया। इस पर वह खूब झगड़ी और पांचवीं बच्ची को लेकर मायके चली गई।
घायल बेटी ने भी किया गुमराह
एसपी जीआरपी ने बताया कि एक बच्ची सीतापुर के रामकोट थाने के गांव भवानीपुर कालिका बख्श, दूसरी गांव गौरा में ट्रैक किनारे घायल मिली थी। तीसरी मानपुर थाना क्षेत्र के रमईपुर हाल्ट के पास मृत जबकि चौथी महमूदाबाद इलाके में घायल मिली थी। रामकोट में मिली बच्ची ने होश में आने पर खुद को बिहार के मोतिहारी पूर्वी चंपारण निवासी इद्दू अंसारी की बेटी अलबुन बताया।
उसने अपनी बहनों की भी पहचान की और माता-पिता व भाई के साथ ट्रेन से जम्मू के सफर की जानकारी दी। उसने बताया था कि सफर में मामा इकबाल ने दोस्त इजहार की मदद से चारों बहनों को ट्रेन से फेंक दिया था। अलबुन ने 25 अक्तूबर को लखीमपुर खीरी के मैगलगंज इलाके में ट्रैक किनारे मिले महिला के शव की शिनाख्त मां अफरीना के रूप में की थी।
सच सामने आने पर दो को क्लीन चिट
आईजी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि चार बच्चियों के साथ मां को चलती ट्रेन से फेंकने की बात सामने आने पर टीम जम्मू-कश्मीर, दिल्ली व बिहार के मोतिहारी भेजी गई। जीआरपी थाना सीतापुर के प्रभारी सुरेश यादव की टीम मोतिहारी से अफरीना की मां के साथ इकबाल और इजहार को लेकर लौटी।
खुलासा हुआ कि अफरीना जीवित है और मैगलगंज में ट्रैक किनारे मिला शव किसी अन्य महिला का था। इकबाल और इजहार ने खुद को बेगुनाह बताया। इस पर बिहार के जगदीशपुर थाने के गांव बेतिया पूर्वी चंपारण से अफरीना खातून को लाया गया। उसने पुलिस को पति की करतूत बताई और मजिस्ट्रेट के समक्ष कलमबंद बयान दर्ज कराए। इसके बाद जीआरपी ने इकबाल और इजहार को क्लीनचिट देकर इद्दू अंसारी की तलाश शुरू की थी।
बेटियों से माफी मांगने पहुंचा तो पत्नी ने खदेड़ा
इद्दू ने बताया कि पत्नी के मायके जाने के बाद उसे अपराध बोध हुआ। उसे फांसी का फंदा नजर आने लगा। कमरा खाली करने के साथ ही उसने सिमकार्ड तोड़कर फेंक दिया और फरार हो गया। तीन बच्चियों के जीवित होने की जानकारी पर वह गुनाह की माफी मांगने ससुराल पहुंचा तो पत्नी व ससुरालीजनों ने खदेड़ दिया। इसके बाद वह दिल्ली से नेपाल तक भटका।
कई दिन तक गांव में खेत पर रहा। आईजी जीआरपी ने बताया कि जम्मू में राजगीर का काम करने वाले इद्दू ने बताया कि वह 27 हजार रुपये लेकर भागा था। पठानकोट, लुधियाना, दिल्ली, नेपाल के वीरगंज व अन्य स्थानों पर रहा और नंबर बदल कर बेटों से फोन पर बात करता रहा।
पुलिस टीम को 10 हजार इनाम
एसपी जीआरपी ने ढाई महीने से फरार इद्दू की गिरफ्तारी पर पुलिस टीम को 10 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है। टीम में सीतापुर जीआरपी एसओ सुरेश कुमार यादव, लखीमपुर के एसओ जीआरपी आशीष वर्मा, एसआई रवींद्र कुमार पांडेय, सर्विलांस सेल प्रभारी अरविंद यादव, एसआई फजलुर्रहमान खान, अजीत शुक्ला, कांस्टेबल नंदेश्वर गिरि व जयप्रकाश यादव शामिल थे।