अचानक कटी सड़क तो बाइक सहित नहर में डूब गया युवक
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मोहनलालगंज में शुक्रवार सुबह रायबरेली रजबहा के तेज बहाव से कनकहा-उतरावां सड़क मार्ग का एक हिस्सा कट गया। हादसे के वक्त उतरावां गौसनगर निवासी मायाराम (32) बाइक से डीजल लेने जा रहा था।
सड़क कटने से वह बाइक सहित नहर में गिरकर डूब गया। स्थानीय लोगों ने कुछ दूर झील की तरफ लावारिस बाइक पड़ी देख मोहनलालगंज पुलिस को सूचना दी। मायाराम के परिवारीजनों को उसके डूबने का पता चला तो कोहराम मच गया।
पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौके पर एकत्र हो गए। गोताखोरों की मदद से मायाराम की तलाश कराई गई, लेकिन उसका सुराग नहीं मिला। डीएम ने एनडीआरएफ की टीम लगाई इसके बाद शनिवार दोपहर उसकी लाश बरामद हुई ।
इंस्पेक्टर रामपाल यादव ने बताया कि हादसा सुबह करीब पांच बजे कनकहा में हुआ। मायाराम अपनी बाइक से बहनोई नगराम के अमावा मुर्तजा निवासी राजेश के पिकप वाहन के लिए डीजल लेने जा रहा था।
जैसे ही वह नहर पटरी पर बने कनकहा-उतरावां सड़क मार्ग पर पहुंचा, सड़क का 15 मीटर हिस्सा नहर में समा गया। मायाराम भी बाइक सहित नहर में जा गिरा।
डीजल लेने के लिए निकला था घर से
बहाव इतना तेज था कि पलक झपकते ही वह पानी की गहराइयों में गुम हो गया। सड़क कटने की सूचना पाकर चौकीदार सर्वेश स्थानीय लोगों के साथ मौके पर पहुंच गया।
इस बीच किसी ने गांव के बाहर झील की तरफ एक बाइक पड़ी देखकर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बाइक की छानबीन की तो पता चला कि वह मायाराम की है।
पुलिस ने मायाराम के परिवारीजनों को बुलवा लिया। उन्होंने बताया कि वह डीजल लेने के लिए घर से निकला था। पुलिस ने उसके नहर में बहने की आशंका जताई तो रोना-पीटना मच गया।
ग्रामीण नावों से उसकी तलाश में जुट गए। पुलिस ने गोताखोर भी लगाए लेकिन घंटों छानबीन के बाद भी मायाराम नहीं मिला। एसडीएम संतोष कुमार सिंह ने डीएम सत्येंद्र सिंह से संपर्क कर एनडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलवाया।
एनडीआरएफ के जवान ताराचंद्र और उनकी टीम ने नाव व ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर डेढ़ किलोमीटर लंबी व गहरी झील में मायाराम की तलाश की पर सफलता नहीं मिली।
मां किनारे बैठ तकती रही बेटे की राह
हादसे के बाद जागे प्रशासन के अधिकारियों ने तत्काल जेसीबी मंगाकर कटी हुई सड़क की मरम्मत का काम शुरू कराया। एसडीएम की देखरेख में देर शाम तक मरम्मत कार्य जारी था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन पहले ही सड़क ठीक करा देता तो शायद मायाराम अपने परिवार के बीच होता।मायाराम की मां दुर्गा देई और पत्नी सरिता देर शाम तक नहर के किनारे बैठकर सुबकती रहीं।
उनकी सूनी आंखें मायाराम की तलाश में लगी थीं, पर उसका कोई अता-पता नहीं था। कई बार दोनों रोते-रोते बेसुध हो गईं। परिवारीजनों और ग्रामीणों ने उन्हें संभाला।
ग्रामीणों ने बताया कि मायाराम मजदूरी करता था। उसके परिवार में पत्नी और बेटे नितिन, नितेश व हिमांशु के अलावा मां और पिता श्रीराम हैं। वह परिवार का सहारा था। जो भी कमाता था, उससे ही परिवार पलता था। उसके नहर में डूबने से पूरा परिवार टूट गया है।