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‘वह सर्जरी टेबल से उठा ले गई पति को’

Wed, 15 Oct 2014 11:44 AM IST
अभिषेक यादव/अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक यादव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 15 Oct 2014 11:44 AM IST
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male nasbandi in Uttar Pradesh.

‘हम अतरौली में पुरुष नसबंदी कैम्प कर रहे थे। बातचीत और नसबंदी के फायदे बताकर एक पुरुष को नसबंदी की उपयोगिता समझाई और इसके लिए राजी किया। उसे सर्जरी टेबल पर लिटाकर हम प्रक्रिया शुरू ही कर रहे थे कि बदहवास दौड़ती हुई उसकी पत्नी आई और उसे लगभग वहां से खींचकर ले गई। उसका कहना था कि नसबंदी से उसके पति की यौन क्षमता खत्म हो जाएगी। टीम उसे समझाती रही कि ऐसा नहीं होता लेकिन वह कुछ सुनने को राजी नहीं हुई।’

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अलीगढ़ के जिला अस्पताल सर्जन डॉ. राम बिहारी का साझा किया गया यह अनुभव बताता है कि तमाम प्रचारों के बावजूद प्रदेश में पुरुष नसबंदी को लेकर भ्रांतियां दूर नहीं हो सकी हैं।
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प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर  मंगलवार को अरबन हैल्थ इनिशिएटिव संगठन के साथ संगोष्ठी में परिवार नियोजन के लिए नागरिकों की जरूरतें पूरी करने और 2020 के लिए निर्धारित लक्ष्य हासिल करने को लेकर चर्चा की गई।
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विशेषज्ञों ने आंकड़ों के हवाला देते हुए बताया कि पुरुष नसबंदी के मुकाबले महिला नसबंदी 50 गुना ज्यादा होती है। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के कार्यक्रम निदेशक डॉ. संजय पांडेय ने बताया कि पूरे देश में फर्टिलिटी रेट (एक महिला से औसतन होने वाली संतानें) 2.4 है।

यूपी के कई जिलों में फर्टिलिटी रेट पांच से ज्यादा

male nasbandi in Uttar Pradesh.

जबकि यूपी में यह दर 3.3 है जो बिहार के 3.5 के बाद सर्वाधिक है। देश की आबादी में प्रदेश का योगदान 20 फीसदी से अधिक है। इसे कम करने के लिए नसबंदी और परिवार नियोजन बड़ी भूमिका निभा सकते हैं, और इसके लिए जिलों के स्तर पर काम करने की जरूरत है।

कार्यक्रम में आए प्रमुख वक्ता और नेशनल हेल्थ मिशन के मिशन डायरेक्टर अमित कुमार घोष ने उत्तर प्रदेश में श्रावस्ती जैसे कई जिले हैं जिनमें फर्टिलिटी रेट 5.8 पर बना हुआ है। इन इलाकों में परिवार नियोजन सभी तक पहुंचाना होगा।

उन्होंने कहा कि 2020 तक यूपी में फर्टिलिटी रेट को 2.1 पर लाने का लक्ष्य बनाया गया है, इसे हासिल करना सभी के लिए जरूरी है।

तेजी से क्यों बढ़ रही आबादी
डॉ. पांडेय ने प्रदेश से जुडे़ अपने अनुभवों के आधार पर बताया कि यहां ग्रामीण अंचलों में लड़कियों की कम उम्र में शादी कर दी जाती है। इससे संतान उत्पति के लिए नई पीढ़ी जल्दी आ रही है। वहीं यहां परिवार नियोजन साधनों की पहुंच कम है तो भ्रांतियां भी मौजूद हैं। उन्होंने व्यवहार में परिवर्तन के लिए जागरूकता की जरूरत बताई।

सितंबर तक 662 नसबंदियां

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कार्यक्रम में विभिन्न जिलों को परिवार नियोजन और पुरुष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया गया। आगरा के डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि 2009 में यहां केवल 29 पुरुषों की नसबंदी हुई थी। लेकिन जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों के बाद 2012 में यह आंकड़ा 460 पहुंचा।

2013 में यहां 1,230 पुरुषों की नसबंदी हुई तो इस वर्ष सितंबर तक 662 पुरुष नसबंदियां हुई हैं। वहीं अलीगढ़ के जिला अस्पताल सर्जन डॉ. राम बिहारी ने बताया कि कई दूरदराज कस्बों व छोटे शहरों तक में सर्जन उपलब्ध नहीं होने से पुरुष नसबंदी करवाने में समस्या आती है। वहीं हाथरस से आए डॉ. विजेंद्र ने बताया कि किस तरह यहां 2012 में केवल 1 पुरुष नसबंदी हुई थी और बीते वर्ष 5 लेकिन इस वर्ष अब तक 114 पर आंकड़ा पहुंच चुका है।

सर्जन और चिकित्सकों को उत्साहित करने के लिए कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विभाग के डॉ. एसएन दसीला ने बताया कि नसबंदी के कार्यक्रमों में गुणवत्ता अच्छी बनाई जाएगी तो लोगों को इसका महत्व समझाना आसान होगा। सेमिनार में महाराजगंज से डॉ. एके रॉय, कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल इलाहाबाद से डॉ. कविता अग्रवाल और डॉ. प्रीति आनंद को भी सम्मानित किया गया।

पुरुष नसबंदी अब भी नहीं लोकप्रिय

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सेमिनार में विभिन्न जिलों के नसबंदी से जुड़े आंकड़े भी जारी किए गए। इनमें सामने आया कि लखनऊ और बरेली को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर जिलों में आज भी पुरुष और महिला नसबंदी के आंकड़ों में भारी अंतर है।

मुरादाबाद और कानपुर जैसे शहरों में दोनों के आंकड़ों का अंतर 10 गुना तक है, तो वहीं कई जगह यह अंतर 50 गुना तक नजर आ रहा है।

महिला और पुरुष नसबंदी का हाल बताते आंकड़े

शहर--2012-13--2013-13--2014-15
लखनऊ--6,711/384--6,828/331--1,183/59
मुरादाबाद--2,801/33--3,201/134--417/40
कानपुर--5,085/515--5,632/798--1,044/99
अलीगढ़--3,674/748--4,159/759--447/202

आगरा--8,477/460--8,397/1,230--697/461
इलाहाबाद--15,015/688--17,810/654--691/148
बरेली--4,154/1,475--5,229/8,175--1,028/1,365
फर्रुखाबाद--1,221/69--1,314/96--229/3
गोरखपुर--12,245/260--12,761/328--1,320/147
(आंकडे़ : महिला/पुरुष, 2014 जुलाई तक)

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