यूपी में महाभारत: ब्रजेश पाठक को सपा ने बताया शिशुपाल, अखिलेश बोले- हम कृष्ण के वंशज; नैतिकता न भूलें
Akhilesh vs Brajesh Pathak: डीएनए पर सपा-भाजपा के बीच चल रहे वार-पलटवार के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि हम श्रीकृष्ण के वंशज हैं। हमारे डीएनए पर प्रहार से हमारी धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।
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डीएनए पर सपा और भाजपा के बीच वार-पलटवार थमने का नाम नहीं ले रहा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पर निशाना साधते हुए कहा कि हम श्रीकृष्ण के वंशज हैं। हमारे डीएनए पर प्रहार से हमारी धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। वहीं, ब्रजेश पाठक ने सपाइयों को शिशुपाल की संज्ञा देते हुए कहा कि प्रभु श्रीकृष्ण उनका उपचार करेंगे। यहां बता दें कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, शिशुपाल भगवान श्रीकृष्ण के फुफेरे भाई थे और उनकी 101वीं गलती पर श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का सिर काट दिया था।
अखिलेश यादव ने एक्स पर अपनी लंबी पोस्ट लिखा कि हमने उप मुख्यमंत्री की टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए पार्टी स्तर पर उन लोगों को समझाने की बात कही है, जो समाजवादियों के डीएनए पर दी गई आपकी (ब्रजेश पाठक की) अति अशोभनीय टिप्पणी से आहत होकर अपना आपा खो बैठे थे। आइंदा ऐसा न हो हमने उनसे तो ये आश्वासन ले लिया है लेकिन आपसे भी यही आशा है कि आप जिस तरह की बयानबाज़ी निंरतर करते आए हैं, उस पर भी विराम लगेगा। आप जिस स्तर के बयान देते हैं वो भले आपको अपने व्यक्तिगत स्तर पर उचित लगते हों, लेकिन आपके पद की मर्यादा और शालीनता के पैमाने पर किसी भी तरह उचित नहीं ठहाराए जा सकते हैं ।
नैतिकता न भूलें ब्रजेश पाठक
अखिलेश एक्स पर आगे लिखते हैं कि एक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में आपसे ये अपेक्षा तो है ही कि आप ये समझते होंगे कि किसी के व्यक्तिगत डीएनए पर भद्दी बात करना दरअसल किसी व्यक्ति नहीं, वरन युगों-युगों तक पीछे जाकर उसके मूलवंश और मूल उद्गम पर आरोप लगाना है। जैसा कि सब जानते हैं कि हम यदुवंशी हैं और यदुवंश का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से है। अतः ऐसे में आपके द्वारा हमारे डीएनए पर किया गया प्रहार धार्मिक रूप से भी हमें आहत करता है।
अखिलेश ने कहा कि हम जानते हैं कि आपका धर्म-प्रधान व्यक्तित्व ऐसा नहीं है कि वो भगवान श्रीकृष्ण के प्रति ऐसी दुर्भावनापूर्ण टिप्पणी कर सकता है, पर एक सामान्य भोला व्यक्ति जो भगवान श्रीकृष्ण ही नहीं बल्कि किसी भी भगवान में विश्वास करता है वो आपकी टिप्पणी को अन्यथा भी ले सकता है। ऐसे में आपसे आग्रह है कि राजनीति करते-करते न अपनी नैतिकता भूलिये और न ही धर्म जैसी संवेदनशील भावना को जाने-अनजाने में ठेस पहुंचाएं।
अखिलेश यह भी लिखते हैं कि आप (ब्रजेश पाठक) अगर एकांत में बैठकर अपने विगत वर्षों का अवलोकन करेंगे तो पाएंगे कि मूल रूप से आपके विचारों में पहले कभी भी ऐसा विचलन न था, न ही आपकी राजनीतिक आकांक्षाएं ऐसी थीं कि शाब्दिक संतुलन खो बैठें।
लोहिया-जनेश्वर मिश्र की पार्टी नहीं रह गई सपा
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने जवाब देते हुए कहा कि सपा मीडिया सेल के साथी आलोचना करने के दौरान जिन शब्दों का प्रयोग करते हैं, उसे पढ़कर लगता ही नहीं कि यह पार्टी राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र की पार्टी रह गई है। जार्ज साहब की बात तथाकथित समाजवादी भूल गए कि शिविर लगाया करो, पढ़ा-लिखा करो ।
ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा कि सपाइयों को लोहिया-जेपी पढ़ाइए और पंडित जनेश्वर मिश्र के भाषण सुनवाइए, ताकि इनके आचरण और उच्चारण में समाजवाद झलके। ब्रजेश पाठक प्रभु ईसा मसीह की तर्ज पर आगे लिखते हैं कि हे महान लोहिया, जनेश्वरजी, इन नादानों को क्षमा करें। इन्हें कुछ पढ़ाया -लिखाया, सिखाया व समझाया नहीं गया । ये नहीं जानते कि समाजवाद क्या है। इन्होंने समाजवाद को गाली गलौज, उदंडई और स्तरहीन टिप्पणियों की प्रयोगशाला बना दिया है।
पाठक ने कहा कि जब विपक्ष में रहते हुए इनका ये रूप है तो सत्ता में होते हुए इन्होंने क्या किया होगा, सहज अंदाज़ा लगाया जा सकता है। हैरानी ये भी कि उदंडता, अश्लीलता और अराजकता की संस्कृति के ये शिशुपाल अपने बचाव में योगेश्वर कृष्ण का नाम लेने का दुस्साहस भी कर लेते हैं। हे योगेश्वर कृष्ण इन शिशुपालों का ऐसे ही उपचार करते रहना जैसे यूपी की जनता पिछले दस सालों से करती आ रही है।