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विवेक तिवारी हत्याकांड में गले नहीं उतर रही पुलिस की थ्योरी, दशहरे बाद सौंपी जाएगी रिपोर्ट

Thu, 11 Oct 2018 01:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 11 Oct 2018 01:47 PM IST
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magistrate probe in vivek tiwari murder case
विवेक तिवारी हत्याकांड

लखनऊ के गोमतीनगर में एपल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की गोली मारकर हत्या के मामले की चल रही मजिस्ट्रेटी जांच अंतिम दौर में है। नामित जांच अधिकारी एसीएम चतुर्थ ने बस इतना संकेत दिया कि अब तक की जांच में पुलिसिया थ्योरी झोलदार साबित हुई है।

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साथ ही दशहरा बाद तक जांच रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को सौंपने की बात कही है। मजिस्ट्रेटी जांच कर रहे अपर नगर मजिस्ट्रेट चतुर्थ सलिल कुमार पटेल ने बताया कि जेल में बंद दोनों आरोपी सिपाहियों प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार से पूछताछ के बाद बयान दर्ज किए गए।
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साथ ही विवेक की पूर्व सहकर्मी के दर्ज बयान का गहन परीक्षण करने के बावजूद आधी रात को अचानक सिपाही द्वारा विवेक पर सीधे फायर करने का मंतव्य उलझा नजर आ रहा है। अपर नगर मजिस्ट्रेट चतुर्थ ने बताया कि अब तक की जांच के बाद उजागर तथ्यों के आधार पर एक बार फिर मृतक की पत्नी व बच्चों से मिलकर बयान दर्ज कर रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।

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मददगार साबित नहीं हुआ फुटेज

magistrate probe in vivek tiwari murder case
बिल्डिंग में लगा कैमरा - फोटो : amar ujala

जांच के दौरान घटनास्थल से मिली पुलिस कर्मियों की बाइक में हुई टूट-फूट का भी विशेषज्ञ स्तर पर परीक्षण कराया गया। परीक्षण में यह बात साबित नहीं हो पायी कि बाइक को एसयूवी से सीधे या साइड से जोर की टक्कर मारी गई हो।

ऐसा होने पर बाइक में इस्तेमाल होने वाली फाइबर व प्लास्टिक युक्त एसेसरीज मसलन ब्रेक, गियर लीवर व मडगार्ड का बुरी तरह क्षतिग्रस्त होना तय था, लेकिन बाइक में गंभीर क्षति या टूट-फूट नहीं मिली। इसके चलते विवेक की एसयूवी द्वारा बाइक को टक्कर मारने की पुलिसिया थ्योरी संदेह के घेरे में दिखी।  

घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीद के साथ ही घायल को लोहिया अस्पताल पहुंचाने वाले पुलिस कर्मियों, इलाज करने वाले डॉक्टरों व स्टाफ सहित मृतक के परिवारीजनों से भी अलग-अलग बातचीत कर बयान दर्ज किए गए। इस दौरान घटनास्थल से जुड़े वास्तविक तथ्यों को परखने के लिए पैक्सफेड कार्यालय पर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज का भी परीक्षण हुआ, लेकिन घटना स्थल तक कैमरे की पहुंच न हो पाने से फुटेज जांच में मददगार साबित नहीं हो पाया।

जांच अधिकारी ने जनसमुदाय से भी अपील की है कि उक्त घटना के संबंध में किसी भी तरह की कोई मौखिक जानकारी अथवा लिखित साक्ष्य बयान दर्ज कराने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर स्थित उनके कोर्ट कक्ष संख्या-46 में 18 अक्तूबर तक किसी भी न्यायालय दिवस (अवकाश को छोड़कर) संपर्क कर साक्ष्य या बयान दे सकते हैं। 

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