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अब कोई नहीं बना पाएगा इस यूनीवर्सिटी की फर्जी डिग्री

Tue, 11 Aug 2015 07:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 11 Aug 2015 07:40 PM IST
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lucknow university turns strickt towards fake degree

लगातार फर्जी मार्क्सशीट और डिग्री के मामले सामने आने के बाद से लखनऊ विश्वविद्यालय की साख धूमिल होती जा रही है। इससे छुटकारा पाने को एलयू ने मार्क्सशीट के बाद अब डिग्री को भी पूरी तरह से सिक्योर करने के लिए प्रारूप तैयार कर लिया है।

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नई डिग्री का सैम्पल परीक्षा विभाग को मिल चुका है। एलयू प्रशासन के अनुसार नई डिग्री में इतने सिक्योरिटी फीचर्स हैं जिनको कॉपी करके वैसी ही फर्जी डिग्री अब बहुत मुश्किल होगा। डिग्री को वॉटरप्रूफ बनाने की भी बात कही जा रही है।
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डिग्री में नौ विशेष सिक्योरिटी फीचर्स शामिल किए गए हैं। इसमें स्टूडेंट्स की रंगीन फोटो भी लगी होगी। इससे पहले विश्वविद्यालय अपनी मार्क्सशीट पर छात्र-छात्राओं की फोटो लगाने की शुरुआत कर चुका है।
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डिग्री पर रेनबो बैकग्राउंड दिया जाएगा जिसमें विभिन्न रंगों के शेड्स होंगे। यदि कोई इसे कॉपी करने का प्रयास करता भी है तो सभी रंगों को बिल्कुल उन्हीं शेड्स में उतारना आसान नहीं होगा। एक भी शेड अगर मैच न हुआ तो तुरंत डिग्री के फर्जी होने का पता चल जाएगा।

ऐसे होगी असली-नकली की पहचान

lucknow university turns strickt towards fake degree

मार्क्सशीट की ही तर्ज पर डिग्री में भी माइक्रो टेक्सटिंग होगी। डिग्री के चारों तरफ होने वाली ये माइक्रो टेक्सटिंग नंगी आंखों से देखने पर बॉर्डर लाइन की तरह लगेगी। इसकेसाथ ही चारों तरफ लाइनों और कर्वस का इस्तेमाल कर एक डिजाइन बनाया जाएगा।

इसकी खासियत यह होगी कि यदि डिग्री को स्कैन या किसी भी तरह से कॉपी करने का प्रयास किया गया तो डिजाइन ब्लॉक हो जाएगा। इसमें लाइनें और कर्व पता नहीं चलेंगे।

इन फीचर्स से न सिर्फ ये डिग्री आकर्षक लगेगी बल्कि सुरक्षित भी बनेगी। इसके अलावा कुछ उतार-चढ़ाव वाली लाइनें होंगी जो कि एक पैटर्न के आधार पर बनेंगी। इस पैटर्न को कॉपी नहीं किया जा सकेगा।

ड‌िग्री में होगा एक खास कोड

डिग्री में जिस जगह कुलपति के हस्ताक्षर होंगे उसके ऊपर एक रेक्टेंग्युलर बॉक्स होगा। इसके अंदर शब्दों में एक खास कोड होगा। लेकिन ये कोड सिर्फ डिग्री को फोटोकॉपी करने पर ही नजर आएगा।

ऐसे में यदि कोई फर्जी डिग्री बनाता है तो उसको फोटोकॉपी करते ही पता चल जाएगा। डिग्री के ऊपर एक तरफ बार कोड के साथ ही क्यूआर कोड भी होगा। इन दोनों कोड को स्कैन करते ही संबंधित छात्र के डिटेल्स कम्प्यूटर स्क्रीन पर आ जाएंगे।

दोनों कोड में एक विशेष सीरीज नंबर होगा। डिग्री पर एक डिजाइन या शब्द या विवि का लोगो उकेरा जाएगा जिससे न सिर्फ इसे एक पहचान मिलेगी बल्कि सिक्योरिटी भी बढ़ जाएगी। यह डिजाइन या लोगो कुलपति और परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर करने की जगह के बीच में होगा।
 
परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर के ऊपर खाली जगह में एक विशेष होलोग्राम होगा। डिग्री में ‘गिलोच’ तकनीक का भी प्रयोग किया जाएगा। इस तकनीक में मशीन से एक ऐसा पैटर्न या डिजाइन बनाया गया होगा जो कि काफी उलझा और रिपीट किया होगा। हालांकि देखने में ये काफी आकर्षक लगेगा।

नई डिग्री का सैम्पल आ चुका है। कुलपति के आते ही इस पर चर्चा की जाएगी। नई डिग्री में इतने अधिक सिक्योरिटी फीचर हैं कि उनको कॉपी नहीं किया जा सकेगा। डिग्री का ये सैम्पल अप्रूव होते ही इसे छापने के निर्देश दिए जाएंगे। डिग्री दिखने में आकर्षक होने के साथ ही सिक्योर भी होगी।
- एसके शुक्ला, परीक्षा नियंत्रक, लखनऊ विश्वविद्यालय

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