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Lucknow News: लविवि में परास्नातक फार्मास्युटिक्स व फार्माकोलॉजी को मिली मान्यता
Fri, 06 Mar 2026 02:21 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 06 Mar 2026 02:21 AM IST
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लखनऊ विश्वविद्यालय
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के जानकीपुरम परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज को फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) की ओर से फार्मास्युटिकल शिक्षा के तहत संचालित पाठ्यक्रमों के लिए आधिकारिक स्वीकृति मिल गई है। विशेष रूप से एमफार्म (फार्मास्युटिक्स) और एमफार्म (फार्माकोलॉजी) पाठ्यक्रमों को पीसीआई से मान्यता मिलने के बाद अब शैक्षणिक सत्र 2026–27 से इन कोर्सों में प्रवेश के लिए पढ़ाई शुरू होगी। दोनों परास्नातक पाठ्यक्रमों में 15–15 सीटों पर प्रवेश लिया जाएगा।
यहां पहले से संचालित बी. फार्म (स्नातक पाठ्यक्रम) और डी. फार्म (डिप्लोमा पाठ्यक्रम) को भी शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए पीसीआई ने मान्यता दे दी है। अब विश्वविद्यालय स्नातक से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक फार्मेसी शिक्षा के सभी प्रमुख आयामों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संचालित करने में सक्षम हो गया है। इससे अब फार्मेसी के विद्यार्थियों के शोध को बढ़ावा भी मिल सकेगा।
परास्नातक फार्माकोलॉजी से होगा ये फायदा
परास्नातक फार्माकोलॉजी की पढ़ाई के दौरान जीवित जीवों पर दवाओं के प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन हो सकेगा। साथ ही जीवों के माध्यम से दवाओं के प्रसंस्करण का अध्ययन करने का मौका मिलेगा। दवा की क्रिया के लिए नए लक्ष्यों की पहचान और सत्यापन करना, और रोगों की रोकथाम, उपचार और उपचार के लिए नई दवाओं का निर्माण और विकास कैसे हो ये भी समझने में आसानी होगी।
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परास्नातक फार्मास्युटिक्स से होगा ये फायदा
ये योग्यता रखने वाले फार्मासिस्ट, अनुसंधान , दवा विकासकर्ता, फार्मेसी प्रबंधक, बायोटेक सलाहकार और अन्य कई पदों पर काम कर सकते हैं। वे दवा निर्माण कंपनियों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं, अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, विचारकों के साथ भी जुड़ सकते हैं। यहां तक विद्यार्थी खुद का फार्मेसी खोलकर और अपने मालिक बनकर उद्यमी बन सकते हैं।
कोट
विश्वविद्यालय को एम. फार्म पाठ्यक्रमों की स्वीकृति संस्थान की शैक्षणिक प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा, शोध व विशेषज्ञता विकसित करने के व्यापक अवसर मिल सकेंगे।
- प्रो. जेपी सैनी, कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय
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यहां पहले से संचालित बी. फार्म (स्नातक पाठ्यक्रम) और डी. फार्म (डिप्लोमा पाठ्यक्रम) को भी शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए पीसीआई ने मान्यता दे दी है। अब विश्वविद्यालय स्नातक से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक फार्मेसी शिक्षा के सभी प्रमुख आयामों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संचालित करने में सक्षम हो गया है। इससे अब फार्मेसी के विद्यार्थियों के शोध को बढ़ावा भी मिल सकेगा।
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परास्नातक फार्माकोलॉजी से होगा ये फायदा
परास्नातक फार्माकोलॉजी की पढ़ाई के दौरान जीवित जीवों पर दवाओं के प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन हो सकेगा। साथ ही जीवों के माध्यम से दवाओं के प्रसंस्करण का अध्ययन करने का मौका मिलेगा। दवा की क्रिया के लिए नए लक्ष्यों की पहचान और सत्यापन करना, और रोगों की रोकथाम, उपचार और उपचार के लिए नई दवाओं का निर्माण और विकास कैसे हो ये भी समझने में आसानी होगी।
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परास्नातक फार्मास्युटिक्स से होगा ये फायदा
ये योग्यता रखने वाले फार्मासिस्ट, अनुसंधान , दवा विकासकर्ता, फार्मेसी प्रबंधक, बायोटेक सलाहकार और अन्य कई पदों पर काम कर सकते हैं। वे दवा निर्माण कंपनियों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं, अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, विचारकों के साथ भी जुड़ सकते हैं। यहां तक विद्यार्थी खुद का फार्मेसी खोलकर और अपने मालिक बनकर उद्यमी बन सकते हैं।
कोट
विश्वविद्यालय को एम. फार्म पाठ्यक्रमों की स्वीकृति संस्थान की शैक्षणिक प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा, शोध व विशेषज्ञता विकसित करने के व्यापक अवसर मिल सकेंगे।
- प्रो. जेपी सैनी, कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय