गलत पेपर देकर यूनिवर्सिटी ने कहा, पर्चा हल करो इसी से मिलेंगे नबंर
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लखनऊ विश्वविद्यालय की बुधवार को हुई बीबीए पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा में छात्र-छात्राओं को सिलेबस के बाहर का पर्चा थमा दिया गया। इसे देखते ही छात्र-छात्राओं ने कक्ष निरीक्षकों से शिकायत की जिसके बाद मामले की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी गई।
बीबीए की परीक्षाएं श्री जयनारायण पीजी कॉलेज, कालीचरण पीजी कॉलेज और बोरा इंस्टीट्यूट में चल रही हैं। इसमें बुधवार को बीबीए पांचवें सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं का रूरल मैनेजमेंट का पेपर था।
छात्रों को परीक्षा में जब पर्चा दिया गया तो वह रूरल मैनेजमेंट की जगह रिटेल एंड रूरल मैनेजमेंट का था। जबकि उन्हें रिटेल मैनेजमेंट के बारे में पढ़ाया ही नहीं गया है। यह उनके सिलेबस में ही नहीं है। छात्र-छात्राओं के अनुसार पर्चे में 50 फीसदी प्रश्न रिटेल मैनेजमेंट से थे। ऐसे में किसी को यदि अपने सिलेबस से सब कुछ आता हो तो भी वह केवल आधा पर्चा ही कर सकता था।
आधे प्रश्नों से ही पूरे पर्चे का होगा मूल्यांकन
जेएनपीजी कॉलेज में कक्ष निरीक्षकों ने बताया कि छात्र-छात्राओं ने जब अपनी समस्या बताई तो इस बारे में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक एसके शुक्ला व एलयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंस के निदेशक प्रो. अरविंद मोहन को सूचित किया गया।
इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि पर्चे में 50 फीसदी रिटेल व 50 फीसदी हिस्सा रूरल मैनेजमेंट का है। छात्र-छात्राएं केवल रूरल मैनेजमेंट के प्रश्न ही करें। इन्हीं के आधार पर मूल्यांकन भी होगा।
हालांकि इसमें छात्र-छात्राओं के सामने प्रश्न चयन का विकल्प कम हो गया। जेएनपीजी कॉलेज के केंद्र पर ही 300 से अधिक छात्र-छात्राएं परीक्षा दे रहे हैं। इतने ही करीब अन्य दो सेंटर पर भी हैं हालांकि विश्वविद्यालय भी इनकी सही संख्या नहीं बता सका।
इस तरह कराया गया प्रश्नपत्र
परीक्षा में लगे एक कक्ष निरीक्षक ने बताया कि प्रश्नपत्र 70 नंबर का था जिसमें 10 शॉर्ट नोट और चार यूनिट में आठ प्रश्न थे। शॉर्ट नोट 3-3 नंबर के थे जिनमें कोई विकल्प नहीं दिया गया था। 30 नंबर का यह हिस्सा अनिवार्य था।
इसके बाद चार यूनिट में से प्रत्येक में दो-दो प्रश्न थे जिनमें से एक-एक करना था। प्रत्येक प्रश्न 10-10 अंक का था। छात्र-छात्राओं के अनुसार उनके पांच शॉर्ट नोट और दो यूनिट में शामिल चार लंबे प्रश्न सिलेबस से बाहर थे।
इसकी सूचना जब विश्वविद्यालय को दी गई तो छात्रों को राहत देने के लिए कहा गया कि वह केवल वही पांच शॉर्ट नोट करें जो सिलेबस के हैं। इनको 3 की जगह 6 अंक का मानकर मूल्यांकन हो जाएगा। इसी तरह सिलेबस के बाहर की दो यूनिट को रद्द करने की बात कही गई। वहीं बची हुई दो यूनिट में दिए कुल चार प्रश्न में से तीन करने को बोला गया।
परीक्षा विभाग को इस परीक्षा के लिए पेपर कोड 3050 बताया गया था जिसका पैकेट सभी जगह भेजा गया। प्रश्नपत्र तैयार करने से जुड़े शिक्षक जो प्रश्नपत्र तैयार करते हैं वही पैकेट भेजा जाता है। फिलहाल छात्रों को राहत देते हुए सभी जगह बोला गया कि रूरल मैनेजमेंट के सभी प्रश्न कर लिए जाएं उन्हीं मे पूरे प्रश्नपत्र के अंक विभाजित करके मूल्यांकन किया जाएगा। प्रश्नपत्र कैसे गलत बना इसकी भी जांच की जाएगी।
- एसके शुक्ला, परीक्षा नियंत्रक, लखनऊ विश्वविद्यालय
एलयू में मजाक बन गई हैं सेमेस्टर परीक्षाएं
एलयू की सेमेस्टर परीक्षाएं मजाक बन गईं हैं। सबसे पहले तो विश्वविद्यालय ने परीक्षा शुरू होने के बाद तक परीक्षा फॉर्म भरवाने जारी रखे। अंत समय परीक्षा फॉर्म भरवाने का नतीजा यह भी हुआ कि ठीक परीक्षा के दौरान कुछ ऐसे छात्र-छात्राएं सामने आए जिनको नियम दरकिनार करते हुए विश्वविद्यालय ने अगली कक्षा में प्रमोट किया हुआ था।
इसमें ऐसे स्टूडेंट्स शामिल थे जिनका पहला और दूसरा दोनों ही सेमेस्टर उत्तीर्ण न होने के बावजूद तीसरे में प्रवेश था। जबकि इसी साल अगस्त में विश्वविद्यालय ऐसी व्यवस्था खत्म कर चुका है। परीक्षा विभाग ने जब नए नियमों का पालन करते हुए ऐसे छात्र-छात्राओं को परीक्षा से रोका तो एक छात्रा को राहत पाने के लिए हाईकोर्ट तक जाना पड़ा।
वहां से उसे राहत भी मिली। लेकिन बहुत से छात्र-छात्राएं ऐसे भी हैं जिनको इसके बाद भी परीक्षा से वंचित किया गया। बाद में कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने खुद इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए ऐसे छात्र-छात्राओं को बेनिफिट ऑफ डाउट के तहत राहत देने को कहा।
अब इन स्टूडेंट्स की परीक्षाएं बाद में कराने की तैयारी हो रही है। इसके अलावा अंत समय परीक्षा फॉर्म भरवाने की वजह से ही शुरू की परीक्षाओं में तो ऐसी नौबत भी आई जब प्रवेश पत्र परीक्षा के बीच में बांटे गए। लेकिन इन सबके बाद बुधवार की परीक्षा में आधा पेपर सिलेबस के बाहर से आना तो बहुत ही बड़ी लापरवाही को उजागर करता है।