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Lucknow : बिना कारण बताए गिरफ्तार करने पर पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज, पढ़ें कोर्ट का आदेश...

Tue, 28 Oct 2025 08:01 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Tue, 28 Oct 2025 08:01 PM IST
सार

पुलिस की रिमांड अर्जी को खारिज करने की मांग करते हुए आरोपी के वकील ने कोर्ट को बताया कि अशर्फी लाल को जबरदस्ती फंसाया गया। आरोपी को गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया गया है

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Lucknow: Police's remand application rejected for arrest without giving any reason, court said...
judge court हथोड़ा - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

एससी-एसटी एक्ट के मामले में बिना कारण बताए आरोपी को गिरफ्तार करने और कोर्ट में पेश करने पर एससी-एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने मड़ियाव पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज करते हुए आरोपी को रिहा कर दिया। कोर्ट ने आरोपी अशर्फी लाल को 50 हजार रुपये के मुचलके और अंडरटेकिंग दाखिल करने का आदेश दिया है। 

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कोर्ट ने आदेश की प्रति पुलिस कमिश्नर को भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि अशरफी लाल को गिरफ्तार करने वाले मड़ियांव थाने के दरोगा अखिलेश कुमार की इस कार्यवाही की जानकारी कमिश्नर को दी जाए। पत्रावली के अनुसार मड़ियांव पुलिस ने वर्ष 2023 में आत्महत्या के लिए उकसाने, मारपीट, एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य मामले में दर्ज मुकदमे में आरोपी अशर्फी लाल को 26 अक्तूबर को गिरफ्तार किया। अगले दिन कोर्ट में पेश करके कोर्ट से आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की मांग की।
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कोर्ट ने जब पुलिस के कागजात की जांच की तो पाया कि दरोगा अखिलेश कुमार ने साथी पुलिसकर्मियों की मदद से आरोपी को गिरफ्तार किया था। कागजात में उस खाते को खाली छोड़ दिया, जिसमें आरोपी को गिरफ्तार करने का कारण लिखा जाता है। 
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वहीं, पुलिस की रिमांड अर्जी को खारिज करने की मांग करते हुए आरोपी के वकील ने कोर्ट को बताया कि अशर्फी लाल को जबरदस्ती फंसाया गया। आरोपी को गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया गया है जो संविधान के अनुच्छेद 21 व 22 का उल्लंघन है। लिहाजा, आरोपी को जेल नहीं भेजना चाहिए। कोर्ट ने आरोपी का रिमांड खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति को बिना कारण बताए गिरफ्तार किया जाता है तो ऐसी गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी।

युवती को अगवा करने के आरोपी की जमानत अर्जी निरस्त

गणेश विसर्जन के लिए गई युवती का अपहरण करने के आरोपी सचिन की जमानत अर्जी को एडीजे धीरेंद्र कुमार ने खारिज कर दिया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से बताया गया कि वादिनी ने महानगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके मुताबिक वादिनी की 23 साल की बेटी गणेश विसर्जन में शामिल होने गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि उनकी बेटी की बातचीत सचिन नाम के लड़के से होती है। 



आशंका है कि सचिन ही उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। वहीं, आरोपी की ओर से कहा गया कि वह निर्दोष है। आरोपी की मुलाकात वादिनी की बेटी से सोशल मीडिया पर हुई थी, जो बाद में अच्छी दोस्ती में बदल गई। आरोपी ने पीड़िता का अपहरण नहीं किया है और न ही उसे लड़की के बारे में कुछ जानकारी है। 

 

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