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Lucknow: पनकी व जवाहरपुर ताप विद्युत परियोजनाओं का संचालन होगा निजी कंपनियों के हाथ में, विरोध शुरू
Thu, 23 Apr 2026 10:38 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Thu, 23 Apr 2026 10:38 AM IST
सार
मामले की जानकारी मिलते ही बिजली कर्मचारी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। फिलहाल इन परियोजनाओं का संचालन और रखरखाव का कार्य राज्य विद्युत उत्पादन निगम करता रहा है।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
राज्य विद्युत उत्पादन निगम की पनकी व जवाहरपुर ताप विद्युत परियोजनाओं के संचालन और अनुरक्षण का कार्य निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी है। इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। मामले की जानकारी मिलते ही बिजली कर्मचारी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। पनकी ताप विद्युत परियोजना (कानपुर) लगभग 100 इंजीनियर, 75 जूनियर इंजीनियर, 75 टेक्नीशियन ग्रेड-2, 245 अन्य नियमित कर्मचारी तथा 500 से अधिक संविदाकर्मी कार्यरत हैं।
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इसी प्रकार जवाहरपुर परियोजना (एटा) में करीब 150 इंजीनियर, 90 जूनियर इंजीनियर, 100 टेक्नीशियन ग्रेड-2, 135 अन्य कर्मचारी और 500 से अधिक संविदाकर्मी कार्य कर रहे हैं। फिलहाल इन परियोजनाओं का संचालन और रखरखाव का कार्य राज्य विद्युत उत्पादन निगम करता रहा है। 13 अप्रैल को निगम के अधीक्षण अभियंता रविंद्र कुमार श्रीवास्तव ने परियोजना के मुख्य प्रबंधक को पत्र भेजा है। कहा गया है कि दोनों परियोजनाओं का रखरखाव और संचालन के लिए यूनिफाइड टेंडर प्रस्ताव मुख्यालय भेजा जाए। इसकी जानकारी मिलते ही बिजली कर्मचारी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है।
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संघर्ष समिति ने दी आंदोलन की चेतावनी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है पनकी और जवाहरपुर परियोजनाओं का संचालन निजी कंपनियों को सौंपा जाता है, तो लगभग 2000 से अधिक कर्मचारियों की सेवाएं अनावश्यक घोषित कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि यह कदम मुनाफा कमाने वाले उत्पादन निगम को कमजोर कर सार्वजनिक क्षेत्र को समाप्त करने की शुरुआत है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि इन जनविरोधी निर्णयों को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं उग्र किया जाएगा।
84 फीसदी बिल बढ़ने की वजह नहीं बता पा रहा पश्चिमांचल
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में करीब 84 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन निगम अब तक इसकी स्पष्ट वजह नहीं बता पाया है। इस पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मीटरों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए विद्युत नियामक आयोग से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
निगम के अनुसार 27 जनवरी तक 11,91,440 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 9,56,744 मीटर प्रीपेड मोड में कार्यरत हैं। पहले नॉन-स्मार्ट मीटर के दौरान जुलाई से दिसंबर 2024 के बीच औसत मासिक खपत 118.94 यूनिट थी, जो स्मार्ट मीटर लगने के बाद जुलाई से दिसंबर 2025 में बढ़कर 219.15 यूनिट हो गई। यानी औसतन 100.21 यूनिट (लगभग 84.24%) की वृद्धि हुई। इस बढ़ोतरी पर परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आपत्ति जताई और इसे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार बताया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी वृद्धि मीटरों में गड़बड़ी की ओर संकेत करती है।
नियामक आयोग ने निगम से विस्तृत रिपोर्ट मांगी, लेकिन लगभग एक महीने बाद भी निगम ठोस कारण नहीं बता सका। निगम ने केवल यह जानकारी दी है कि मीटरों के नमूनों की जांच सीपीआरआई में कराई जा रही है और 5 प्रतिशत उपभोक्ताओं के यहां चेक मीटर लगाए जा रहे हैं। परिषद का कहना है कि यह कदम पर्याप्त नहीं हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं का संभावित शोषण रोका जा सके।
निगम के अनुसार 27 जनवरी तक 11,91,440 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 9,56,744 मीटर प्रीपेड मोड में कार्यरत हैं। पहले नॉन-स्मार्ट मीटर के दौरान जुलाई से दिसंबर 2024 के बीच औसत मासिक खपत 118.94 यूनिट थी, जो स्मार्ट मीटर लगने के बाद जुलाई से दिसंबर 2025 में बढ़कर 219.15 यूनिट हो गई। यानी औसतन 100.21 यूनिट (लगभग 84.24%) की वृद्धि हुई। इस बढ़ोतरी पर परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आपत्ति जताई और इसे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार बताया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी वृद्धि मीटरों में गड़बड़ी की ओर संकेत करती है।
नियामक आयोग ने निगम से विस्तृत रिपोर्ट मांगी, लेकिन लगभग एक महीने बाद भी निगम ठोस कारण नहीं बता सका। निगम ने केवल यह जानकारी दी है कि मीटरों के नमूनों की जांच सीपीआरआई में कराई जा रही है और 5 प्रतिशत उपभोक्ताओं के यहां चेक मीटर लगाए जा रहे हैं। परिषद का कहना है कि यह कदम पर्याप्त नहीं हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं का संभावित शोषण रोका जा सके।