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Lucknow News : राज्य उपभोक्ता आयोग का आदेश, बिना कनेक्शन बिल भेजने पर बीएसएनल चुकाए हर्जाना

Mon, 20 Mar 2023 09:15 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 20 Mar 2023 09:15 PM IST
सार

आदेश राज्य उपभोक्ता आयोग की सुशील कुमार व विकास सक्सेना की पीठ ने दिया। इसके साथ ही पीठ ने जिला आयोग की तरफ से पूर्व में पारित निर्णय को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया।

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Lucknow News : Order of State Consumer Commission, BSNL to pay damages for sending connection bill without
बीएसएनएल - फोटो : PTI

विस्तार

बिना कनेक्शन लिए ही बार-बार पोस्टपेड मोबाइल कनेक्शन का बिल भेजना प्रताड़ना कारित है। इस लिए भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) पीड़ित को मानसिक उत्पीड़न व परेशानी के एवज में पांच हजार रुपये का क्षतिपूर्ति हर्जाना चुकाए। यह आदेश राज्य उपभोक्ता आयोग की सुशील कुमार व विकास सक्सेना की पीठ ने दिया। इसके साथ ही पीठ ने जिला आयोग की तरफ से पूर्व में पारित निर्णय को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया।

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पीठ ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत के बाद भी बार बार गलत बिल भेजना किसी को प्रताड़ित करने के समान है। बीएसएनएल के जिला प्रबंधक, एटा की तरफ से यह अपील जिला आयोग की तरफ से अक्तूबर 2008 में पारित निर्णय व आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी। इस वाद में पोस्ट पेड मोबाइल सेवा का कनेक्शन न लेने पर भी एटा निवासी वीरेंद्र कुमार को बीएसएनएल ने मोबाइल नंबर 9412282340 का लंबा चौड़ा बिल जारी कर भेज दिया।
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परेशान वीरेंद्र ने मामले की शिकायत बीएसएनएल के जिला कार्यालय पहुंचकर की। मौजूद अफसरों ने इसे कंप्यूटर के स्तर से हुई तकनीकी चूक बताते हुए भविष्य में पोस्टपेड बिल न आने का भरोसा दिलाया। इसके बाद भी विभागीय स्तर पर कंप्यूटर में दर्ज त्रुटि को दुरुस्त न करलगातार पोस्टपेड कनेक्शन का बिल भेजकर उसे मानसिक तौर पर प्रताड़ित व परेशान किया जाता रहा।
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वर्ष 2003 में वीरेंद्र ने इस मामले में क्षतिपूर्ति हर्जाना दिलवाने का एक वाद जिला उपभोक्ता आयोग, एटा में दाखिल किया। जिला आयोग ने बीएसएनएल की कार्य प्रणाली को मानसिक तौर पर उत्पीड़ित करने वाला मानते हुए नरेंद्र को पांच हजार रुपये क्षतिपूर्ति हर्जाना चुकाने का आदेश दिया। बीएसएनएल ने इसके खिलाफ वर्ष 2008 में राज्य आयोग में अपील करते हुए कहा कि जब पीड़ित के पास उक्त नंबर का प्री-पेड मोबाइल कनेक्शन नहीं है, तो बिल आने से उसे क्या नुकसान। इस लिए क्षतिपूर्ति के आदेश को निरस्त किया जाए।


पीठ ने सुनवाई में पाया कि वीरेंद्र की शिकायत के बावजूद कम्प्यूटर स्तर की त्रुटि को दुरूस्त न कराया जाना और गलत बिल भेजना जारी रखना, प्रताड़ना कारित है। ऐसे में जिला आयोग के पारित निर्णय को सही मानते हुए अपील को निरस्त योग्य माना जाता है।

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