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Lucknow News: व्हाइटनर से नाम बदलने पर मिली सजा रद्द
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अधिकरण ने कहा- स्पष्टीकरण पर विचार किए बिना दंडादेश देना गलत, तीन माह में सेवा लाभ देने के निर्देश
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। पुलिस कार्यालय झांसी में एएस चेक कोर्स के लिए एक आरक्षी के स्थान पर दूसरे का नाम दर्ज करने के मामले में दी गई परिनिंदा की सजा उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा अधिकरण ने निरस्त कर दी है। अधिकरण ने कहा कि दंडाधिकारी ने आरक्षी के स्पष्टीकरण में उठाए गए तथ्यों पर विचार किए बिना दंडादेश पारित किया।
सदस्य (न्यायिक) रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने यह आदेश आरक्षी दीपक कुमार की निर्देश याचिका पर एक अक्तूबर को दिया। दीपक कुमार पुत्र सोनेश्वर पाल, ग्राम लालपुर, पोस्ट व थाना मंगलपुर, जनपद कानपुर देहात के निवासी हैं। उनकी पहली नियुक्ति वर्ष 2008 में आरक्षी पद पर हुई थी और सात नवंबर 2013 को उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति हुई। वर्ष 2018 में वह पुलिस कार्यालय झांसी में चरित्र पंजिका लिपिक के साथ तैनात थे।
आरोप था कि उन्होंने आरक्षी सर्वेंद्र कुमार के स्थान पर व्हाइटनर लगाकर आरक्षी सत्येंद्र बहादुर का नाम एएस चेक कोर्स के लिए दर्ज किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, झांसी ने छह अगस्त 2019 को परिनिंदा की सजा दी थी। पुलिस उप महानिरीक्षक, झांसी परिक्षेत्र ने 25 नवंबर 2019 को अपील खारिज कर दी थी।
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अधिकरण ने दोनों आदेश निरस्त करते हुए कहा कि मामले में याची की दुर्भावना स्पष्ट नहीं होती। इन आदेशों के कारण रोके गए सभी परिणामी सेवा लाभ तीन माह में देने के निर्देश दिए।
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माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। पुलिस कार्यालय झांसी में एएस चेक कोर्स के लिए एक आरक्षी के स्थान पर दूसरे का नाम दर्ज करने के मामले में दी गई परिनिंदा की सजा उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा अधिकरण ने निरस्त कर दी है। अधिकरण ने कहा कि दंडाधिकारी ने आरक्षी के स्पष्टीकरण में उठाए गए तथ्यों पर विचार किए बिना दंडादेश पारित किया।
सदस्य (न्यायिक) रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने यह आदेश आरक्षी दीपक कुमार की निर्देश याचिका पर एक अक्तूबर को दिया। दीपक कुमार पुत्र सोनेश्वर पाल, ग्राम लालपुर, पोस्ट व थाना मंगलपुर, जनपद कानपुर देहात के निवासी हैं। उनकी पहली नियुक्ति वर्ष 2008 में आरक्षी पद पर हुई थी और सात नवंबर 2013 को उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति हुई। वर्ष 2018 में वह पुलिस कार्यालय झांसी में चरित्र पंजिका लिपिक के साथ तैनात थे।
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आरोप था कि उन्होंने आरक्षी सर्वेंद्र कुमार के स्थान पर व्हाइटनर लगाकर आरक्षी सत्येंद्र बहादुर का नाम एएस चेक कोर्स के लिए दर्ज किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, झांसी ने छह अगस्त 2019 को परिनिंदा की सजा दी थी। पुलिस उप महानिरीक्षक, झांसी परिक्षेत्र ने 25 नवंबर 2019 को अपील खारिज कर दी थी।
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अधिकरण ने दोनों आदेश निरस्त करते हुए कहा कि मामले में याची की दुर्भावना स्पष्ट नहीं होती। इन आदेशों के कारण रोके गए सभी परिणामी सेवा लाभ तीन माह में देने के निर्देश दिए।