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हिट एंड रन : साक्ष्य मिटाने में सपा नेता गिरफ्तार, स्केटिंग क्लब व कोच पर केस
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लखनऊ। डेढ़ सौ किमी की रफ्तार से एसयूवी दौड़ाकर एएसपी श्वेता श्रीवास्तव के बेटे नामिश की जान लेने के मामले में पुलिस ने सपा के पूर्व जिला पंचायत सदस्य रविंद्र सिंह उर्फ पप्पू को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी सार्थक सिंह के पिता रविंद्र को एसयूवी को धोकर साक्ष्य मिटाने व खास मकसद से आपराधिक घटना कारित करने का आरोपी बनाया गया है। वहीं, मंगलवार को गिरफ्तार किए गए सार्थक व देवश्री को बुधवार को कोर्ट में पेश करने के बाद वहीं से जेल भेज दिया गया। हालांकि, रविंद्र को देर शाम सीजेएम कोर्ट से जमानत मिल गई। उधर, मामले में स्केटिंग क्लब और कोच पर भी एफआईआर दर्ज की गई है।
गाजीपुर के संजय गांधीपुरम की निवासी एएसपी श्वेता श्रीवास्तव एसआईटी में तैनात हैं। वह मंगलवार सुबह अपने दस साल के बेटे नामिश को लेकर स्केटिंग के लिए जनेश्वर मिश्र पार्क ले गई थीं। इस दौरान नामिश जी-20 रोड पर कोच व एक अन्य साथी के साथ स्केटिंग कर रहा था। तभी शहीद पथ की तरफ से आ रही तेज रफ्तार एसयूवी नामिश को रौंदते हुए गुजर गई थी। इससे मासूम की मौके पर ही मौत हो गई थी। पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर करीब 10 घंटे बाद इंदिरानगर निवासी रविंद्र सिंह के बेटे सार्थक सिंह और उसके साथी सराफ के बेटे देवश्री वर्मा को गिरफ्तार कर लिया था।
डीसीपी पूर्वी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि मामले में सामने आया था कि वारदात के बाद जब दोनों आरोपी घर पहुंचे थे तो रविंद्र ने साक्ष्य मिटाने के लिए एसयूवी की धुलाई की थी। फिर कवर से ढक कर खड़ी कर दी थी। वह बेटे और उसके साथी को भगाने के प्रयास में था। इसलिए सुबूतों के आधार पर रविंद्र को भी आरोपी बनाया गया और गिरफ्तारी की गई।
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रविंद्र ने बोला था-सार्थक नाम का मेरा कोई बेटा नहीं
पुलिस ने रविंद्र के घर पर दबिश से पहले ही देवश्री को दबोच लिया था। उसने बताया था कि कार सार्थक चला रहा था। जब पुलिस उसके घर पहुंची तो रविंद्र ने कहा कि सार्थक नाम का मेरा कोई बेटा नहीं है। वह बार-बार अपने बेटे का नाम सिद्धू बता रहा था। जब पुलिस ने सख्ती की तब उसको बाहर निकाला। यहीं से कार भी बरामद की गई। जांच में ये भी सामने आया कि 30-40 हजार रुपये देकर वह सार्थक व देवश्री को बाहर भेजने वाला था, जिससे पुलिस पहुंचे तो दोनों न मिलें।
जब मामला शांत होता तो गाड़ी सही करवाते
पुलिस को आरोपियों ने बताया कि वह सबसे पहले खुद बचने के लिए भागने वाले थे। क्योंकि उनको आशंका थी कि पुलिस जरूर पहुंच जाएगी, लेकिन ये अंदेशा नहीं था कि इतनी जल्दी पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिन में जब मामला थोड़ा ठंडा पड़ता तो वह एसयूवी को सर्विस सेंटर पर देकर डेंट सही करवाते।
दुकानदार की तहरीर पर स्केटिंग क्लब व कोच पर केस
हादसे के बाद इलाकाई दुकानदार अशरफ अली ने बुधवार को गोमतीनगर थाने में तहरीर दी कि जनेश्वर मिश्र पार्क के पास व जी-20 मार्ग पर स्केटिंग की जाती है। इससे काफी दिक्कतें होती हैं। एडीसीपी पूर्वी सैयद अली अब्बास ने बताया कि तहरीर के आधार पर अवध अकादमी क्लब, उसके कोच दिव्यांश अरोड़ा व गौरव पर धारा 268 (ऐसा कृत्य जिससे आम लोगों को दिक्कत हो), धारा 336 (ऐसा कार्य करना जिससे मानव जीवन को खतरा हो) व धारा 283 (पब्लिक मार्ग में बाधा उत्पन्न कर व्यक्ति को संकट में डालाना) के तहत केस दर्ज किया गया है।
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गाजीपुर के संजय गांधीपुरम की निवासी एएसपी श्वेता श्रीवास्तव एसआईटी में तैनात हैं। वह मंगलवार सुबह अपने दस साल के बेटे नामिश को लेकर स्केटिंग के लिए जनेश्वर मिश्र पार्क ले गई थीं। इस दौरान नामिश जी-20 रोड पर कोच व एक अन्य साथी के साथ स्केटिंग कर रहा था। तभी शहीद पथ की तरफ से आ रही तेज रफ्तार एसयूवी नामिश को रौंदते हुए गुजर गई थी। इससे मासूम की मौके पर ही मौत हो गई थी। पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर करीब 10 घंटे बाद इंदिरानगर निवासी रविंद्र सिंह के बेटे सार्थक सिंह और उसके साथी सराफ के बेटे देवश्री वर्मा को गिरफ्तार कर लिया था।
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डीसीपी पूर्वी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि मामले में सामने आया था कि वारदात के बाद जब दोनों आरोपी घर पहुंचे थे तो रविंद्र ने साक्ष्य मिटाने के लिए एसयूवी की धुलाई की थी। फिर कवर से ढक कर खड़ी कर दी थी। वह बेटे और उसके साथी को भगाने के प्रयास में था। इसलिए सुबूतों के आधार पर रविंद्र को भी आरोपी बनाया गया और गिरफ्तारी की गई।
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रविंद्र ने बोला था-सार्थक नाम का मेरा कोई बेटा नहीं
पुलिस ने रविंद्र के घर पर दबिश से पहले ही देवश्री को दबोच लिया था। उसने बताया था कि कार सार्थक चला रहा था। जब पुलिस उसके घर पहुंची तो रविंद्र ने कहा कि सार्थक नाम का मेरा कोई बेटा नहीं है। वह बार-बार अपने बेटे का नाम सिद्धू बता रहा था। जब पुलिस ने सख्ती की तब उसको बाहर निकाला। यहीं से कार भी बरामद की गई। जांच में ये भी सामने आया कि 30-40 हजार रुपये देकर वह सार्थक व देवश्री को बाहर भेजने वाला था, जिससे पुलिस पहुंचे तो दोनों न मिलें।
जब मामला शांत होता तो गाड़ी सही करवाते
पुलिस को आरोपियों ने बताया कि वह सबसे पहले खुद बचने के लिए भागने वाले थे। क्योंकि उनको आशंका थी कि पुलिस जरूर पहुंच जाएगी, लेकिन ये अंदेशा नहीं था कि इतनी जल्दी पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिन में जब मामला थोड़ा ठंडा पड़ता तो वह एसयूवी को सर्विस सेंटर पर देकर डेंट सही करवाते।
दुकानदार की तहरीर पर स्केटिंग क्लब व कोच पर केस
हादसे के बाद इलाकाई दुकानदार अशरफ अली ने बुधवार को गोमतीनगर थाने में तहरीर दी कि जनेश्वर मिश्र पार्क के पास व जी-20 मार्ग पर स्केटिंग की जाती है। इससे काफी दिक्कतें होती हैं। एडीसीपी पूर्वी सैयद अली अब्बास ने बताया कि तहरीर के आधार पर अवध अकादमी क्लब, उसके कोच दिव्यांश अरोड़ा व गौरव पर धारा 268 (ऐसा कृत्य जिससे आम लोगों को दिक्कत हो), धारा 336 (ऐसा कार्य करना जिससे मानव जीवन को खतरा हो) व धारा 283 (पब्लिक मार्ग में बाधा उत्पन्न कर व्यक्ति को संकट में डालाना) के तहत केस दर्ज किया गया है।