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Lucknow News: पांच मौतों के बाद जागे अफसर, आज से तोड़ेंगे रेलवे के जर्जर आवास
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लखनऊ। आनंदनगर की फतेह अली रेलवे कॉलोनी हादसे में पांच लोगों के जान गंवाने के बाद उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल प्रशासन की नींद टूटी है। सोमवार से जर्जर रेलवे कॉलोनियों को ढहाने का अभियान शुरू होगा। पहले चरण में इंजीनियरिंग विभाग, आरपीएफ व पुलिस की मदद से शांतिपुरम रेलवे कॉलोनी के सौ जर्जर आवासों को ढहाया जाएगा।
फतेह अली रेलवे कॉलोनी के निष्प्रयोज्य घोषित क्वार्टर की छत गिर जाने से लोको वर्कशॉप में संविदा सफाईकर्मी सतीश, उनकी पत्नी सलोनी व बच्चों- अंश, हर्षिता, हर्षित की मौत हो गई। घटना के बाद से रेलवे प्रशासन के हाथ-पैर फूले हुए हैं। हर तरफ से सवाल उठ रहे हैं कि निष्प्रयोज्य घोषित हो चुके आवासों में लोग कैसे रह रहे हैं? लोग अवैध रूप से रह रहे हैं तो किसकी शह पर? यह भी सवाल उठ रहा है कि जो आवास निष्प्रयोज्य घोषित हो गए, उनको क्यों नहीं तोड़ा गया? बहरहाल, तीखे सवालों के बीच अब रेलवे प्रशासन कंडम हो चुके आवासों में अवैध रूप से रहने वालों के खिलाफ सोमवार से अभियान चलाएगा।
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आंकड़े बताते हैं कि सब अफसरों की मिलीभगत से चल रहा है...
निष्प्रयोज्य घोषित थे, दरवाजे-खिड़की उखाड़ लिए, पर बिजली कैसे जला रहे थे
-32 रेलवे कॉलोनियां हैं लखनऊ में
-700 रेलवे आवास हो चुके हैं निष्प्रयोज्य घोषित
-5 से छह साल हो चुके हैं कॉलोनियों को निष्प्रयोज्य घोषित किए हुए
-5000 से अधिक लोग अवैध रूप से रह रहे हैं रेलवे कॉलोनियों और इनमें निष्प्रयोज्य घोषित आवासों में।
-4 से 5 करोड़ रुपये सालाना रेलवे को हो रहा राजस्व का नुकसान अवैध तरीके से कॉलोनियों में रहने वालों से। किराये पर देने के साथ ही अवैध रूप से इन्हें बिजली की सुविधा भी मुहैया करा दी गई।
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-1.5-2 लाख यूनिट बिजली की खपत है हर माह कॉलोनियों में अवैध रूप से रहने वालों का एक अनुमान के मुताबिक।
जहां हुईं पांच मौतें, वहां दूसरे चरण में चलेगा बुलडोजर
पहले चरण में शांतिपुरम रेलवे कॉलोनी के जर्जर आवासों को तोड़ने का सिलसिला शुरू किया जाएगा। इसके बाद फतेह अली कॉलोनी के 98 व मुनव्वर बाग के जर्जर आवास तोड़े जाएंगे।
आरपीएफ जर्जर आवासों की सूची के इंतजार में
रेलवे कॉलोनियों की देखरेख व लेखा-जोखा इंजीनियरिंग विभाग के पास होता है। मेंटेनेंस का काम भी विभाग देखता है। अब तक उत्तर रेलवे इंजीनियरिंग विभाग ने कंडम घोषित किए गए आवासों की सूची आरपीएफ को नहीं सौंपी है। बताया जा रहा है कि सूची मिलने के बाद आरपीएफ मौके पर जाकर जांच करेगी कि कंडम आवासों में अवैध कब्जे हैं या नहीं। अवैध कब्जा होने पर उसे खाली कराया जाएगा। वहीं, अन्य आवासों में अवैध रूप से रहने वालों का पता लगाने के लिए आवंटियों व उनमें रह रहे लोगों का मिलान किया जाएगा।
अवैध कब्जा देने वालों की तलाश
रेलवे कॉलोनियों में निष्प्रयोज्य घोषित हो चुके आवासों को किराये पर उठाने वालों की तलाश की जा रही है। हालांकि, इंजीनियरिंग विभाग के अफसरों और आरपीएफ की मिलीभगत से ही इन जर्जर आवासों को किराये पर उठाया जाता रहा है। लिहाजा इस तलाश के पूरे होने व अंजाम तक पहुंचने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।