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Lucknow News: बर्लिन मैराथन का हिस्सा बनेंगे 64 के बजरंग, 58 की आशा
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अनुराग बाजपेई
लखनऊ। कहते हैं कि खेलने की कोई उम्र नहीं होती। जज्बा भी उम्र का कोई मोहताज नहीं होता। जिसमें जोश है वही युवा है। यह सब साबित कर रहे हैं शहर के दंपती रिटायर्ड कर्नल कर्नल बजरंग सिंह और उनकी पत्नी आशा सिंह। बजरंग 64 वर्ष के हैं तो आशा 58 की। दोनों वर्ल्ड बर्लिन मैराथन (42.195 किमी) का हिस्सा बनेंगे। यह इनके कॅरिअर की पांचवीं मैराथन होगी।
बजरंग और आशा नित नए कीर्तिमान रच रहे हैं। 24 सितंबर को बर्लिन मैराथन में भाग लेने वाले वे भारत के एकमात्र दंपती होंगे। दोनों की एथलेटिक्स से जुड़ने की कहानी बेहद रोचक है। रिटायर होने के बाद कर्नल बजरंग सिंह ने फिटनेस को बरकरार रखने के लिए दौड़ना शुरू किया। 56 साल की उम्र में शौकिया तौर पर शुरू की यह दौड़ उन्हें कॅरिअर की दूसरी पारी में खूब आगे ले गई। वहीं, आशा की बात करें तो पति के रिटायरमेंट तक बच्चों का कॅरिअर संवर चुका था। इसलिए आशा ने भी 50 वर्ष की उम्र से बजरंग के साथ दौड़ना शुरू कर दिया। यह पहल जल्द ही रंग लाने लगी और दोनों ही वेटरन वर्ग में नए रिकॉर्ड बनाते चले गए।
ये हैं असली युवा...
बजरंग और आशा वर्ष 2016 से अब तक 125 से अधिक क्षेत्रीय, राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मैराथन दौड़ का हिस्सा बन चुके हैं। बर्लिन मैराथन में बजरंग जहां 60 से 65 वर्ष के आयुवर्ग में भाग लेंगे, वहीं आशा 55 से 60 वर्ष की आयुवर्ग की रेस का हिस्सा बनेंगी। इससे पहले दोनों लंदन मैराथन (2 अक्तूबर 2022), शिकागो मैराथन (9 अक्तूबर 2022), न्यूयार्क मैराथन (6 नवंबर 2022) और बोस्टन मैराथन (7 अप्रैल 2023) में भाग ले चुके हैं।
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सेना का अनुभव बजरंग के काम आया
सुल्तानपुर के गांव परवरभार में गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले कर्नल बजरंग सिंह का सेना का अनुभव उनके हमेशा काम आया। मॉर्निंग वॉक तो हमेशा उनके रूटीन का हिस्सा रहा है। इसलिए रिटायर होने के बाद उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ लगाने का दम भरा और इसमें उन्हें सफलता भी मिली। इसके बाद तो वे देश भर में होने वाली मैराथन के वेटरन वर्ग में भाग लेने लगे। वे बर्लिन मैराथन में भाग लेने वाले यूपी से एकमात्र वेटरन एथलीट हैं।
50 की उम्र में पति के साथ दौड़ना शुरू किया और उनसे आगे निकल गईं
पति बजरंग के साथ निभाने के लिए दौड़ने वाली आशा की कहानी भी बेहद रोचक है। अयोध्या में जन्मीं और पली-बढ़ीं आशा की जिंदगी के 50 साल घर संवारने में ही बीत गए। पर, जब ट्रैक पर आईं, तो कुछ समय में ही लंबी दूरी की दौड़ में पति से भी आगे निकल गईं। उन्होंने वर्ष 2021 में 12 घंटे लगातार दौड़कर 114.7 किमी. की दूरी तय कर रिकॉर्ड बनाया। अभी साल भी नहीं बीता था कि उन्होंने 24 घंटे लगातार दौड़कर 178 किमी. दूरी नाप दी। इसके साथ ही उन्होंने नया इतिहास रच दिया। अगले साल यानी वर्ष 2022 (2 और 3 जुलाई) में बंगलूरू में आयोजित एशिया और ओसियाना चैंपियनशिप में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए टीम वर्ग में रजत पदक जीता।
ऐसा संकल्प : मैराथन में मिलने वाली रकम बालिकाओं की शिक्षा पर खर्च करेंगे
बजरंग और आशा का संकल्प है कि वे बर्लिन मैराथन में मिलने वाली राशि जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा पर खर्च करेंगे। इसके लिए दोनों ने एक ट्रस्ट का भी गठन किया है। रन बर्लिन फॉर गर्ल एजुकेशन के नाम से कैंपेन भी शुरू किया है। बजरंग बताते हैं कि हम इसे सोशल मीडिया पर प्रचारित करने के अलावा अपने परिचितों से भी संपर्क कर रहे हैं। इससे जो भी जुटेगा, चिह्नित गरीब बच्चियों की शिक्षा पर खर्च किया जाएगा।
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लखनऊ। कहते हैं कि खेलने की कोई उम्र नहीं होती। जज्बा भी उम्र का कोई मोहताज नहीं होता। जिसमें जोश है वही युवा है। यह सब साबित कर रहे हैं शहर के दंपती रिटायर्ड कर्नल कर्नल बजरंग सिंह और उनकी पत्नी आशा सिंह। बजरंग 64 वर्ष के हैं तो आशा 58 की। दोनों वर्ल्ड बर्लिन मैराथन (42.195 किमी) का हिस्सा बनेंगे। यह इनके कॅरिअर की पांचवीं मैराथन होगी।
बजरंग और आशा नित नए कीर्तिमान रच रहे हैं। 24 सितंबर को बर्लिन मैराथन में भाग लेने वाले वे भारत के एकमात्र दंपती होंगे। दोनों की एथलेटिक्स से जुड़ने की कहानी बेहद रोचक है। रिटायर होने के बाद कर्नल बजरंग सिंह ने फिटनेस को बरकरार रखने के लिए दौड़ना शुरू किया। 56 साल की उम्र में शौकिया तौर पर शुरू की यह दौड़ उन्हें कॅरिअर की दूसरी पारी में खूब आगे ले गई। वहीं, आशा की बात करें तो पति के रिटायरमेंट तक बच्चों का कॅरिअर संवर चुका था। इसलिए आशा ने भी 50 वर्ष की उम्र से बजरंग के साथ दौड़ना शुरू कर दिया। यह पहल जल्द ही रंग लाने लगी और दोनों ही वेटरन वर्ग में नए रिकॉर्ड बनाते चले गए।
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ये हैं असली युवा...
बजरंग और आशा वर्ष 2016 से अब तक 125 से अधिक क्षेत्रीय, राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मैराथन दौड़ का हिस्सा बन चुके हैं। बर्लिन मैराथन में बजरंग जहां 60 से 65 वर्ष के आयुवर्ग में भाग लेंगे, वहीं आशा 55 से 60 वर्ष की आयुवर्ग की रेस का हिस्सा बनेंगी। इससे पहले दोनों लंदन मैराथन (2 अक्तूबर 2022), शिकागो मैराथन (9 अक्तूबर 2022), न्यूयार्क मैराथन (6 नवंबर 2022) और बोस्टन मैराथन (7 अप्रैल 2023) में भाग ले चुके हैं।
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सेना का अनुभव बजरंग के काम आया
सुल्तानपुर के गांव परवरभार में गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले कर्नल बजरंग सिंह का सेना का अनुभव उनके हमेशा काम आया। मॉर्निंग वॉक तो हमेशा उनके रूटीन का हिस्सा रहा है। इसलिए रिटायर होने के बाद उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ लगाने का दम भरा और इसमें उन्हें सफलता भी मिली। इसके बाद तो वे देश भर में होने वाली मैराथन के वेटरन वर्ग में भाग लेने लगे। वे बर्लिन मैराथन में भाग लेने वाले यूपी से एकमात्र वेटरन एथलीट हैं।
50 की उम्र में पति के साथ दौड़ना शुरू किया और उनसे आगे निकल गईं
पति बजरंग के साथ निभाने के लिए दौड़ने वाली आशा की कहानी भी बेहद रोचक है। अयोध्या में जन्मीं और पली-बढ़ीं आशा की जिंदगी के 50 साल घर संवारने में ही बीत गए। पर, जब ट्रैक पर आईं, तो कुछ समय में ही लंबी दूरी की दौड़ में पति से भी आगे निकल गईं। उन्होंने वर्ष 2021 में 12 घंटे लगातार दौड़कर 114.7 किमी. की दूरी तय कर रिकॉर्ड बनाया। अभी साल भी नहीं बीता था कि उन्होंने 24 घंटे लगातार दौड़कर 178 किमी. दूरी नाप दी। इसके साथ ही उन्होंने नया इतिहास रच दिया। अगले साल यानी वर्ष 2022 (2 और 3 जुलाई) में बंगलूरू में आयोजित एशिया और ओसियाना चैंपियनशिप में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए टीम वर्ग में रजत पदक जीता।
ऐसा संकल्प : मैराथन में मिलने वाली रकम बालिकाओं की शिक्षा पर खर्च करेंगे
बजरंग और आशा का संकल्प है कि वे बर्लिन मैराथन में मिलने वाली राशि जरूरतमंद बालिकाओं की शिक्षा पर खर्च करेंगे। इसके लिए दोनों ने एक ट्रस्ट का भी गठन किया है। रन बर्लिन फॉर गर्ल एजुकेशन के नाम से कैंपेन भी शुरू किया है। बजरंग बताते हैं कि हम इसे सोशल मीडिया पर प्रचारित करने के अलावा अपने परिचितों से भी संपर्क कर रहे हैं। इससे जो भी जुटेगा, चिह्नित गरीब बच्चियों की शिक्षा पर खर्च किया जाएगा।