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Lucknow News : आठ दिन बाद भी नहीं हो सका पुलिस कमिश्नरेट के पुनर्गठन पर फैसला, अधिकारी असमंजस में
Thu, 10 Nov 2022 08:47 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 10 Nov 2022 08:47 PM IST
सार
कमिश्नरेट के पुनर्गठन की जिम्मेदारी डीजीपी मुख्यालय को दी गई थी। माना जा रहा था कि कमिश्नरेट को जल्द पुनर्गठित कर दिया जाएगा। लेकिन एक सप्ताह बाद भी अब तक पुनर्गठन नहीं हो सका है।
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वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश के तीन पुलिस कमिश्नरेट के विस्तार के आठ दिन बाद वहां के पुनर्गठन पर फैसला नहीं हो सका है। कैबिनेट ने 2 नवंबर को लखनऊ, कानपुरनगर और वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट का विस्तार करते हुए ग्रामीण क्षेत्र के थानों को पुलिस कमिश्नरेट में मर्ज करने का निर्णय लिया था। कमिश्नरेट के पुनर्गठन की जिम्मेदारी डीजीपी मुख्यालय को दी गई थी। माना जा रहा था कि कमिश्नरेट को जल्द पुनर्गठित कर दिया जाएगा। लेकिन एक सप्ताह बाद भी अब तक पुनर्गठन नहीं हो सका है।
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सूत्रों का कहना है कि सभी तीनों पुलिस कमिश्नरेट ने पुनर्गठन का प्रस्ताव डीजीपी को भेज दिया था। इसमें वाराणसी और कानपुर में जोन बढ़ाए जाने और लखनऊ ग्रामीण के थानों को कमिश्नरेट के मौजूदा जोन में ही समायोजित करने का प्रस्ताव था। जानकारों का कहना है कि दिक्कत महिला थानों को लेकर आ रही है। क्योंकि पुलिस कमिश्नरेट के गठन के बाद लखनऊ, कानपुर और वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिला थाना खोल दिया गया था।
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अब कमिश्नरेट में ग्रामीण क्षेत्र भी समायोजित होने के बाद दो-दो महिला थाने हो जाएंगे। बताया जा रहा है कि एक क्षेत्र में दो महिला थाने के औचित्य को लेकर निर्णय नहीं हो पा रहा है। शासन की ओर से जारी अधिसूचना में कमिश्नरेट में महिला थाने को भी जोड़ दिया गया है। ऐसे में महिला थाना समाप्त करने के लिए दोबारा अधिसूचना जारी करानी पड़ सकती है।
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असमंजस में हैं ग्रामीण क्षेत्रों के पुलिस
वहीं सूत्रों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के पुलिस कप्तान अब तक फैसला न होने से असमंजस में हैं। क्योंकि कैबिनेट के फैसले के समय कहा गया था कि पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होने तक वर्तमान व्यवस्था बहाल रहेगी। लेकिन कमिश्नरेट के अधिकारियों से ग्रामीण क्षेत्रों की घटनाओं को लेकर भी सवाल जवाब किए जा रहे हैं।