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लखनऊ : पूरे प्रदेश में फैला नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का नेटवर्क, एसटीएफ ने गिरोह के सरगना सहित दो को दबोचा, अन्य की तलाश में दबिश

Wed, 16 Feb 2022 12:03 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 16 Feb 2022 12:03 AM IST
सार

पूछताछ में दोनों ने कुबूल किया कि गिरोह का नेटवर्क पूरे प्रदेश में फैला है। एजेंटों के जरिए वह लोगों को फंसाते है, फिर मोटी रकम वसूल लेते हैं। जिसमें से एजेंटों को 10 से 15 प्रतिशत का कमीशन दिया जाता है।

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Lucknow: Network of gangs cheating in the name of job spread across the state, STF arrested two including gang leader, raided in search of others
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा एसटीएफ ने रविवार को किया था। इस गिरोह के सरगना सहित दो को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में दोनों ने कुबूल किया कि गिरोह का नेटवर्क पूरे प्रदेश में फैला है। एजेंटों के जरिए वह लोगों को फंसाते है, फिर मोटी रकम वसूल लेते हैं। जिसमें से एजेंटों को 10 से 15 प्रतिशत का कमीशन दिया जाता है। वहीं बाकी की रकम गिरोह के प्रमुख लोगों में भूमिका के आधार पर बांटा जाता है। एसटीएफ की टीम गिरोह से सीधे ताल्लुक रखने वाले 15 लोगों की तलाश कर रही है। इसके लिए कई जगह दबिश दी गई है।

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एसटीएफ केप्रभारी एसपी विशाल विक्रम सिंह की विशेष टीम ने रविवार को दो जालसाजों को दबोचा था। पकड़े गये जालसाजों में मूलरूप से बस्ती के परशुरामपुर स्थित गौरामिश्रानी निवासी विनय कुमार मिश्रा व बिहार गोपालगंज का विजय कुमार दुबे शामिल हैं। दोनों गिरोह बनाकर आयुष मंत्रालय, लखनऊ मेट्रो, एयरपोर्ट अथॉरिटी, लखनऊ नगर निगम, ऑर्डिनेंस फैक्ट्री, आर्मी नर्सिंग जैसे सरकारी विभागों में संविदा पर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करते हैं।
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इस गिरोह का सरगना विनय कुमार मिश्रा है। जो दो अन्य लोगों सचेंद्र शुक्ला और संजय सिंह के साथ मिलकर कंपनी खोल रखी है। इसी कंपनी की आड़ में यह ठगी का धंधा चल रहा है। एसटीएफ के सामने पूछताछ में दोनों ने कुबूल किया कि उनके गिरोह में कई लोग शामिल हैं। इनकी संख्या 15 से अधिक है। दोनों के गिरफ्तार होने के बाद ही जैसे 15 लोगों के नाम एसटीएफ को मिले तो उनकी कुंडली खंगालनी शुरू कर दी गई। एसटीएफ के मुताबिक इस मामले में लखनऊ के अलावा पूर्वांचल केकुछ जिलों में टीमों ने दबिश दी है। लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
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केमिस्ट की नौकरी गई तो ठगी के लिए खोली कंपनी
एसटीएफ प्रभारी एसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक गिरोह के सरगना विनय कुमार मिश्रा ने दो साल पहले प्रगति पथ सर्विसेज कंपनी व प्रगतिपथ सेवा संस्थान बनाया। इन दोनों संस्थानों में विनय के दो साझीदार है। एक संजय सिंह दूसरा सचेंद्र शुक्ला। तीनों ने मिलकर इस कंपनी की आड़ में बेरोजगारों को संविदा पर नौकरी दिलाने का काम शुरू किया। उनसे पद के मुताबिक दाम तय करते, फिर रुपये हासिल कर फर्जी नियुक्ति पत्र भी पकड़ा देते थे। 

एजेंटों के जरिए बेरोजगारों को टारगेट करते थे। मोटी रकम हासिल कर लेते। इसके बाद एजेंटों को 10- 15 प्रतिशत का कमीशन देते थे। ताकि उनको अगला शिकार तलाशने में दिक्कत न हो। इसके अलावा अपने एजेंटों को बाहर विशेष यात्रा पर भी भेजते थे। ताकि उनको इस बात का अहसास होता रहे कि कंपनी उनकी हर बातों का ख्याल रखती है। विनय मिश्रा कभी एक काम पर टिका नहीं रहा। उसने 2012 में एहसास वेलफेयर फाउंडेशन (एनजीओ) और आई केयर सर्विसेज के नाम से कंपनी बनाई।

कंपनी ज्यादा दिन तक नहीं चल सकी। इसके बाद उसने इंदिरागांधी एयरपोर्ट दिल्ली में ग्राउंड स्टाफ सुपरवाइजर की नौकरी तीन साल तक की। फिर उसने दो साल तक पारजा बिल्डर व वसुंधरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के फ्लैट व प्लॉट बेचे। इसके बाद दो सालत एआर फार्मा किदवईनगर कानपुर में केमिस्ट के पद पर तैनात रहा। वहां भी वह ज्यादा दिन नहीं टिक सका। इसके बाद अपनी कंपनी खोलकर फर्जीवाड़ा करना शुरू कर दिया।

ठगी के रुपये से बनाई करोड़ों की संपत्ति
एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक विनय कुमार मिश्रा बस्ती जिले के गौरामिश्रानी का रहने वाला है। उसने एक दशक में ठगी व जालसाजी के जरिए लखनऊ में करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली है। बस्ती में अपने पैतृक मकान पर भी लाखों रुपये खर्च किये। इसके अलावा गुडंबा के कल्याणपुर आदर्शनगर में आलीशॉन मकान तैयार किया। इसके बाद गोमतीनगर विस्तार इलाके के सेक्टर-6 वैष्ण  खंड में भी करोड़ों की कोठी तैयार कर ली। लग्जरी कारों का शौकीन विनय मिश्रा के बैंक खातों की डिटेल खंगाली जा रही है। ताकि यह पता चल सके कि विनय ने पिछले एक दशक में कितने रुपयों की हेराफेरी की है।


दोनों साझीदारों की भी खंगाली जा रही कुंडली
एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक विनय कुमार मिश्रा ने लॉक डाउन के दौरान अचानक से लाखों रुपये लगाकर कंपनी खोली। इस कंपनी में उसके दो साझीदार संजय सिंह व सचेंद्र शुक्ला है। जालसाजी के जरिए कमाए गये रकम को तीन हिस्साें में बांटा जाता है। जिसमें विनय मिश्रा व संजय सिंह के हिस्से में 40-40 प्रतिशत और सचेंद्र शुक्ला के 20 प्रतिशत मिलता है। एसटीएफ अब इन दोनों की भी कुंडली खंगाल रही है। ताकि इस फर्जीवाड़ में इन दोनों की भूमिका साफ हो सके।

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