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मेट्रो के लिए अपनी-अपनी ‘पटरी’
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 19 Jul 2013 02:01 PM IST
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सरकार ने राजधानी में मेट्रो रेल चलाने की दिशा में कदम आगे बढ़ा तो दिया है,
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लेकिन जिन अफसरों पर सरकार के इस ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी डाली गई है वही इसे लेकर दुविधा में हैं।
अफसर कह रहे हैं कि, मेट्रो चल जाए तो बड़ी बात है। वजह है प्रोजेक्ट के लिए लिया जाने वाला कर्ज। मेट्रो के लिए जापान से कर्ज की बातचीत चल रही है।
जापान काफी कम ब्याज दर पर कर्ज देने को राजी भी है लेकिन, उसकी कुछ शर्तें हैं जिन्हें अधिकारी यहां के लिहाज से मुफीद भी मान रहे हैं।
समस्या यह है कि सूबे के एक बड़े प्रशासनिक प्रमुख जापान के बजाय विश्व बैंक से कर्ज लेने की भूमिका तैयार करने में जुटे हैं और इसके लिए जापान की शर्तों को नाजायज ठहराने की कोशिश की जा रही है।
शासन के गलियारे में चल रही खुसर-पुसर पर यकीन करें तो प्रशासनिक प्रमुख इंडिया के उन चुनिंदा अफसरों में हैं जो विश्व बैंक की ‘गुडबुक’ में शामिल बताए जाते हैं।
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उनकी बेटी भी वहीं रहती है जहां विश्व बैंक का मुख्यालय है। ऐसे में विश्व बैंक की तरफ उनका झुकाव स्वाभाविक भी है भले ही जापान के मुकाबले ज्यादा ब्याज दर पर कर्ज दे रहा हो।
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अफसरों का कहना है कि सरकार के स्तर से भले ही मेट्रो रेल चलाने का रास्ता साफ हो गया हो पर प्रशासनिक प्रमुख का विश्व बैंक प्रेम सरकार के इस ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ पर भारी पड़ सकता है।
अब वक्त ही बताएगा कि, प्रशासनिक प्रमुख सरकार के प्रति अपनी निष्ठा दिखाते हैं या विश्व बैंक के प्रति।