सबके लिए अच्छी साबित नहीं होगी लखनऊ मेट्रो
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मेट्रो से सुविधाएं बढ़ेंगी। बाजारों का रूप बदलेगा। पर जिन लोगों की जमीन जाएगी उनके लिए तो यह घाटे का सौदा होगा। लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एलएमआरसी) ने जमीन लेने के लिए मुआवजे की जो दरें तय की हैं बाजार भाव उसका चार गुना है। एलएमआरसी सर्किल रेट पर जमीन लेगा। इससे विरोध के स्वर मुखर होने की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल एलएमआरसी मान रहा है कि वह अब तक के सबसे ऊंची दरों पर मुआवजा देने जा रहा है, लेकिन लोगों को यहां जितनी बड़ी दरों पर मुआवजा मिलने की उम्मीद थी, वह टूटने के कगार पर है। निजी जमीन लेने का काम अप्रैल में शुरू होगा।
मेट्रो रेल परियोजना के लिए निजी भूमि लेने को लेकर डीएम राजशेखर की अध्यक्षता में बनाई गई अर्जन समिति ने जमीन की कीमत तय कर दी है। इन भू- स्वामियों को वर्तमान सर्किल रेट के हिसाब से भुगतान किया जाएगा और यही मुआवजा होगा।
'सरकार हमारे साथ छल कर रही है'
इसी सप्ताह के भीतर मुआवजा नियमावली को उच्चतम स्तर पर अनुमोदित करा के शासन अधिसूचना जारी कर देगा।
एलएमआरसी सिंगारनगर, आलमबाग और बरगिवां में निजी जमीन लेगा। ऐसा पहली बार है जब राजधानी में किसी सरकारी परियोजना के लिए सर्किल रेट पर मुआवजा दिया जाएगा।
निजी जमीन के तौर पर फिलहाल करीब साढ़े नौ हजार वर्ग मीटर भूमि एलएमआरसी अधिग्रहित करेगा। सबसे अधिक भूमि आलमबाग और सिंगारनगर स्टेशन के आसपास की होगी। इसको लेकर कारोबारियों में सबसे अधिक शंका है।
आलमबाग व्यापार मडल के अध्यक्ष प्रशांत भाटिया का कहना है कि सरकार कारोबारियों के साथ छल करने जा रही है। एक ओर तो धंधा बंद होगा, दूसरी ओर केवल सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा मिलेगा। यहां जमीन का बाजार भाव चार गुना तक है। ऐसे में सरकार को मुआवजा नीति में बदलाव करना चाहिए।