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Lucknow : भड़काऊ पर्चे छापने को PFI के कमाल केपी ने खोली थी कंपनी, सौहार्द बिगाड़ने के लिए रची थी गहरी साजिश

Fri, 07 Apr 2023 06:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा अशोक मिश्रा, लखनऊ
अशोक मिश्रा, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 07 Apr 2023 06:29 AM IST
सार

पीएफआई के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं हिट स्कवायड के सरगना केरल निवासी कमाल केपी ने अपनी प्रिटिंग कंपनी खोली थी। ये कंपनी सीएए-एनआरसी, महाराष्ट्र के गोरेगांव में हुई हिंसा, हरियाणा में दलितों का उत्पीड़न और यूपी के हाथरस कांड के बाद जातीय हिंसा को भड़काने के लिए पर्चें, पम्फलेट और पोस्टर छाप रही थी।

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Lucknow: Kamal KP of PFI had opened a company to print inflammatory leaflets.
(सांकेतिक तस्वीर)

विस्तार

देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की गहरी साजिश रची थी। पीएफआई के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं हिट स्कवायड के सरगना केरल निवासी कमाल केपी ने अपनी प्रिटिंग कंपनी खोली थी।

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ये कंपनी सीएए-एनआरसी, महाराष्ट्र के गोरेगांव में हुई हिंसा, हरियाणा में दलितों का उत्पीड़न और यूपी के हाथरस कांड के बाद जातीय हिंसा को भड़काने के लिए पर्चें, पम्फलेट और पोस्टर छाप रही थी। इसका खुलासा एसटीएफ की गिरफ्त में आए कमाल केपी ने दो दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान किया है।
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सूत्रों के मुताबिक कमाल केपी ने पूछताछ के दौरान बताया कि अलग-अलग राज्यों के विवादित मुद्दों को हवा देकर दंगे भड़काने के लिए पर्चें, पोस्टर आदि की जरूरत पड़ती थी। पुलिस की सख्ती की वजह से कोई भी प्रिंटिंग प्रेस पीएफआई के इस पर्चों को नहीं छापता था। दरअसल, पर्चें में प्रिंटिंग प्रेस का नाम और मोबाइल नंबर देने की अनिवार्यता से उनके फंसने का डर रहता था।
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इस मुसीबत से निपटने के लिए पीएफआई के संस्थापकों में शामिल पी. कोया ने कमाल केपी को प्रिंटिंग कंपनी खोलने की सलाह दी। जिसके बाद उसने अल्टरनेट प्रेस के नाम से कंपनी खोली। इस कंपनी के लिए फंडिंग का बंदोबस्त पी. कोया और पीएफआई का राष्ट्रीय महासचिव रऊफ शरीफ करते थे। बताते चलें कि रऊफ शरीफ को ईडी ने जबकि पी. कोया को एनआईए ने बीते दिनों गिरफ्तार किया है।


एसटीएफ को मिला था दिल्ली से सुराग
पिछले वर्ष नई दिल्ली के शाहीनबाग इलाके में स्थित पीएफआई और सीएफआई के ठिकानों पर एसटीएफ ने छापा मारकर ऐसे तमाम भड़काऊ पर्चे बरामद किए थे। इससे पहले हाथरस कांड में गिरफ्तार पीएफआई के सिद्दीक कप्पन के पास से भी ऐसे पर्चे बरामद हुए थे जो हाथरस कांड की आड़ में यूपी में जातीय हिंसा भड़काने की साजिश से संबंधित थे। एसटीएफ बीते एक साल से पता लगाने का प्रयास कर रही थी कि आखिर इन पर्चों को कहां छापा गया था।

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