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Smuggling: लखनऊ बन रहा तस्करी के सोने की सबसे बड़ी मंडी, रोजाना हो रही 15 करोड़ की खपत

Mon, 03 Jul 2023 10:22 AM IST
ishwar ashish नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 03 Jul 2023 10:22 AM IST
सार

लखनऊ में बड़े पैमाने पर सोने की तस्करी हो रही है। यहां की सराफा मंडियों में रोजाना 35 से 40 किलो सोने के बिस्किट की खपत होती है। इससे हर महीने करीब 70 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी होती है।

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Lucknow is the biggest market of gold smuggling.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजधानी लखनऊ तस्करी के सोने की बड़ी मंडी बनती जा रही है। यहां की सराफा मंडियों में रोजाना 35 से 40 किलो सोने के बिस्किट की खपत होती है। कारोबार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इसमें बैंकों से लाया गया सोना महज 30 फीसदी ही होता है। यानी 70 फीसदी सोना ऐसा होता है, जिसपर कोई टैक्स नहीं चुकाया जाता। यानी सराफा मंडियों में रोजाना औसतन 25 किलो तस्करी का सोना खपा दिया जाता है। औसत दर 60 लाख रुपये प्रति किग्रा. के हिसाब से देखें तो राजधानी में तस्करी के सोने का रोजाना का कारोबार 15 करोड़ रुपये का होता है।

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तस्करी का सोना राजधानी में खपाए जाने का मामला वैसे कोई नया नहीं है। यहां चल रहा काला कारोबार हाल ही में आयकर अफसरों के छापा मारने के बाद काफी चर्चा में रहा। तस्करी के जरिये आया 100 किग्रा. सोना खपाए जाने को लेकर आयकर अफसरों की टीम ने चार दिनों तक सराफा कारोबारियों के प्रतिष्ठानों और घरों को खंगाला था। इस जांच में बहुत कुछ आयकर अफसरों के हाथ लगा है। कारोबारियों के मुताबिक छापे के बाद से बैंकों से सोने की खरीद करीब 10 फीसदी तक बढ़ गई है। एक सप्ताह पहले तो सराफा मंडियों में आने वाले कुल सोना में बैंकों से खरीदे गए सोना की हिस्सेदारी महज 20 फीसदी ही होती थी।
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हर माह 67.50 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी
साप्ताहिक बंदी को छोड़ दें तो हर महीने कम से कम 25 दिन सराफा मंडियों में कारोबार होता है। सोना पर कुल 18 फीसदी टैक्स देना होता है। 15 करोड़ रुपये का तस्करी का सोना खपाए जाने पर टैक्स के 2.70 करोड़ रुपये सीधे-सीधे सप्लायर, मध्यस्थता करने वाले और बेचने वाले की जेबों में चला जाता है। प्रति माह तस्करी के सोने का कारोबार औसतन 375 करोड़ रुपये का है। यानी 67.50 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी हो जाती है। सूत्रों के मुताबिक सहालग के दिनों में तस्करी के सोने की खपत दोगुनी हो जाती है।

यूं समझें खेल को: अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले पंद्रह दिन से सोने की औसतन कीमत 51 लाख रुपये प्रति किलो चल रही है। इस सोने पर 12.5 फीसदी कस्टम ड्यूटी व 2.5 प्रतिशत सेस लगता है। राजधानी की सराफा मंडियों में एसबीआई और यस बैंक से सोना आता है। बैंकों से खरीदने पर कस्टम ड्यूटी व सेस चुकाने पर प्रति किग्रा. सोना की कीमत करीब 9.00 लाख रुपये बढ़ जाती है। इस एक किग्रा सोना को एक नंबर में बेचा जाए तो 3 फीसदी जीएसटी के हिसाब से 1.80 लाख रुपये ग्राहक से वसूलना होगा। तस्करी से खरीदा गया सोना कैश में बेचा जाता है। जीएसटी को भी जोड़ दिया जाए तो सीधे-सीधे 18 फीसदी धंधेबाजों की जेबों में चला जाता है। यही वजह है कि यह धंधा बढ़ रहा है।

इनमें बंटती है टैक्स चोरी की रकम

लखनऊ में तस्करी के सोने को खपाने का एक सिंडीकेट है। इस सिंडीकेट में सोने को बेचने, खरीदने एवं मध्यस्थता करने वाले शामिल होते हैं। नेपाल, कोलकाता आदि से आने वाले तस्करी के सोने पर कस्टम ड्यूटी व सेस का जो पैसा बच जाता है वह बेचने, खरीदने एवं मध्यस्थता करने वालों में बंट जाता है।

चार रास्तों से सोने की आवक
सूत्रों के मुताबिक तस्करी का सोना नेपाल, कोलकाता, जयपुर व दिल्ली के रास्ते लखनऊ पहुंच रहा है। इसमें भी सबसे ज्यादा आवक नेपाल एवं कोलकाता के रास्ते से हो रही है।

ऐसे बना रहे तस्करी के सोने को खरा
बिस्किट की शक्ल में आने वाले तस्करी के सोने पर बैंक का नाम और फर्जी नंबर दर्ज कर देते हैं। ग्राहक को झांसा देने के लिए यह सब किया जाता है। यह काम रिफाइनरी में होता है।

छापे से बैंक से सोने की खरीद बढ़ी
लखनऊ सराफा एसोसिएशन के वरिष्ठ महामंत्री प्रदीप कुमार अग्रवाल बताते हैं कि तस्करी के सोना के खिलाफ जब से आयकर के छापे बढ़े हैं, बैंकों से खरीद बढ़ी है। वहीं, लखनऊ महानगर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष वर्मा कहते हैं, तस्करी का सोना बाजार में पहुंचने से ईमानदार लोगों का कारोबार चौपट हो गया है। बाजार में कुछ कारोबारी सस्ते गहने बेचते हैं। वे ऐसा इसलिए कर पाते हैं, क्योंकि सोना तस्करी का होता है।

फैक्ट फाइल: सोना पर कितना टैक्स
12.5 फीसदी कस्टम ड्यूटी
2.5 फीसदी सेस
3.00 फीसदी जीएसटी

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