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बच्चों के लिए लखनऊ देश में पांचवां सबसे असुरक्षित शहर, NCRB रिपोर्ट में भयावह आकड़े

Tue, 20 Mar 2018 01:34 AM IST
अभिषेक यादव/अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक यादव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 20 Mar 2018 01:34 AM IST
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lucknow is most dangerous city for children in india.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

लखनऊ के माल थाना क्षेत्र के जंगल में पहली कक्षा की छात्रा की हत्या... हाल में स्कूलों में बच्चों पर जानलेवा हमले... ऐसी कई घटनाएं इशारा कर रही हैं कि राजधानी बच्चों के लिए असुरक्षित होती जा रही है। स्थिति यह है कि बाल अपराधों में लखनऊ देश के 19 बड़े शहरों में पांचवें स्थान पर है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, लखनऊ में वर्ष 2016 में 956 बच्चों के साथ जघन्य अपराध हुए। वहीं, 81 बच्चे दुराचार व यौन हिंसा के शिकार बने।

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एनसीआरबीआई के आंकड़ों के अनुसार लखनऊ से ऊपर केवल दिल्ली (7,392 बाल अपराध), मुंबई (3,400), पुणे (1,180) और बंगलुरु (1,086) हैं। यही नहीं, प्रमुख शहरों में बाल अपराध के 19,081 मामलों में 5 फीसदी लखनऊ के हैं। बाल अधिकारों व संरक्षण पर काम करने वाली वनिका करोली कहती हैं कि ऐसे हालात को सुधारने के लिए पुलिस की कार्यशैली में सुधार के साथ उसे संवेदनशील बनाना होगा।
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470 मामले चाइल्ड अब्यूज के
चाइल्ड लाइन लखनऊ के समन्वयक अजीत कुशवाहा बताते हैं कि साल 2017 में ही उनके पास बच्चों के अब्यूज के 470 मामले आए। यह दर्शाता है कि जघन्य अपराध ही नहीं छोटे-मोटे अपराध भी कम नहीं हो रहे हैं। इन शिकायतों में स्कूलों की शिकायतों के साथ लड़कियों के उत्पीड़न की शिकायतें भी शामिल होती हैं।

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एनसीआरबी की रिपोर्ट: 2016 में राजधानी के बच्चों से जघन्य अपराध के 956 मामले

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प्रतीकात्मक तस्वीर

अपराध और आंकड़े
हत्याएं - 09
कुल अपहरण - 844
शादी के लिए लड़की का अपहरण - 286
यौन अपराध (अप्राकृतिक) : 11
पॉक्सो (दुराचार व यौन हिंसा) : 81
12 गुना बढ़े लंबित मामले : पुलिस की लचर कार्रवाई

पुलिस की लचर कार्रवाई से 12 गुना बढ़े लंबित मामले
- बच्चों के मामलों में लखनऊ पुलिस की कार्यशैली भी ढीली पड़ जा रही है।
- लखनऊ में दर्ज हुए 956 मामलों के अलावा पुलिस के सामने पूर्व के 35 मामले भी 2016 में लंबित थे। इनमें से :
- 393 मामलों को सही पाते हुए भी फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई क्योंकि उचित साक्ष्य नहीं मिल पाए थे। केवल दो मामले फर्जी पाए गए।

- महज 161 मामलों में पुलिस कोर्ट में चार्जशीट दायर कर पाई। यानी चार्जशीट रेट केवल 29 प्रतिशत रहा, जबकि देश का औसत 42 प्रतिशत है।

- 435 मामले इस तरह 2017 के लिए लंबित रह गए, जबकि 2016 लंबित मामलों की संख्या केवल 35 थी।

इसलिए कोर्ट में भी लंबे खिंच रहे केस

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- 2016 में 161 मामलों में चार्जशीट दायर। पहले के 552 मामले लखनऊ की निचली अदालत में चल रहे थे।
- 64 मामलों का ही ट्रायल पूरा हो सका।
- 34 को ही सजा हुई, 30 आरोपी अलग-अलग वजहों से रिहा।
- 649 मामले लंबित जो कुल चल रहे मामलों का 91 प्रतिशत है।

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