Women's Day: बेटियों...डरो मत, तुम लखनऊ में हो, विमेन फ्रेंडली बनने की ओर राजधानी लखनऊ
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आइए मिलकर बेटियों के मन से असुरक्षा का डर निकालें। खौफ से भरी उनकी आंखों को एक सुकून दें ताकि वे भर सकें उड़ान खुले आसमान में। दहशत की बेड़ियों में जकड़ी बेटियों को उनके लायक, उनके जैसा एक समाज दें। नियम भी हैं, कानून भी बहुतेरे हैं। कई बार जानकारी न होने पर हम सही वक्त पर इनका इस्तेमाल करने से चूक जाते हैं।
नतीजा, पीड़िता और उसका परिवार दर-दर की ठोकरें खाता रहता है, भटकता रहता है। कई बार तो वर्षों बीत जाते हैं और बुलंद होते जाते हैं अपराधियों के हौसले। ऐसा फिर न हो, इसके लिए हर बच्ची को, हर युवती को ये मालूम होना जरूरी है कि उसकी सुरक्षा के लिए कई हेल्प लाइन हैं। एक तरफ 181 तो दूसरी ओर 1090 चौबीस घंटे सक्रिय है। इससे इतर लखनऊ कमिश्नरेट में महिला अपराध व सुरक्षा प्रकोष्ठ ही अलग से काम कर रहा है। हर कदम पर राजधानी की बेटियों को सुरक्षा का भरोसा दिलाती पुलिस टीम की हर एक सदस्य को महिला दिवस पर सलाम करती रोली खन्ना की रिपोर्ट...
घर-बाहर आपकी हमसफर ‘लेडी कॉप’ महिला अपराध और सुरक्षा प्रकोष्ठ
कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने के साथ ही अस्तित्व में आया महिला अपराध और सुरक्षा प्रकोष्ठ। घर हो या बाहर, कोई भी लड़की, कहीं पर भी हो, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली है डीसीपी शालिनी ने। उनकी टीम का अहम हिस्सा हैं एसीपी श्वेता श्रीवास्तव और डॉ. अर्चना सिंह। साथ ही लखनऊ कमिश्नरेट की पूरी टीम मुस्तैद है को राजधानी विमेन फ्रेंडली बनाने को।
पहले जानिए और फिर कभी जरूरत पर खुद परखिए इन व्यवस्थाओं को
‘कुटंब’ में पति-पत्नी के रिश्तों को देतीं नया रंग
आमतौर पर परामर्श केंद्र में पति-पत्नी-परिवार और वकील को साथ बैठा कर सुलह या तलाक जैसे फैसले होते आए हैं। डीसीपी शालिनी के मुताबिक, हम लखनऊ कमिश्नरेट में लागू योजना कुटुंब के तहत पति-पत्नी को अकेले बैठाकर काउंसलिंग करते हैं और उन्हें रिश्तों की अहमियत समझने का मौका देते हैं।
दरअसल ये एक ऐसा रिश्ता है, जिसे भीड़ की नहीं, एक दूसरे के वक्त, दिल की बातें साझा करने की जरूरत होती है। ‘सिंगल टेबल सिंगल केस’ की तर्ज पर काम कर रहे हैं। जबरदस्ती की सुलह नहीं कराते हैं। यह कुटुंब की सफलता ही है कि हमने एक महीने की सीटिंग में 30 परिवारों को जोड़ दिया।
‘साथी’ और ‘पैरवी’ योजना पर भी हो रहा काम
पीड़िता को बयान, मेडिकल, आर्थिक सहायता और काउंसलिग में मदद के लिए लखनऊ कमिश्नरेट में साथी योजना शुरू की गई है। ‘वन विक्टिम-वन ऑफिसर’ व्यवस्था के तहत अब एक पीड़िता के साथ एक ही अधिकारी काम करेगा। जिन मामलों की जांच पूरी हो गई है, उसे फास्ट ट्रैक कोर्ट तक ले जाकर, मामले के निपटारे और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पैरवी योजना शुरू की गई है। सबसे अहम बात की जल्दबाजी में सुबूत जुटाने और उनके इस्तेमाल में कोई चूक न हो जाए, इसे विशेष रूप से ध्यान रखते हुए जांच में विशेष सावधानी बरती जाती है।
सुरक्षित राजधानी हमारी जिम्मेदारी
महिला अपराध व सुरक्षा प्रकोष्ठ की डीसीपी शालिनी, एसीपी श्वेता श्रीवास्तव, एसीपी डॉ. अर्चना सिंह व टीम के सदस्य।
पूरे प्रदेश में कहीं भी आधी रात को भी मिलेगी मदद बस एस्कॉर्ट फॉर सिक्योरिटी को कैब सेवा न समझें
इसे ऐसे समझें, बीते दिन वाराणसी मडुआडीह स्टेशन पर आधी रात को पहुंची लड़की को सवारी वाहन नहीं मिला। उसने सुरक्षा के लिहाज से एस्कॉर्ट की मांग की। 112 पर आई फोन कॉल के बाद उसे एस्कॉर्ट फॉर सिक्योरिटी सेवा उपलब्ध कराई गई।
कहने का आशय है कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक एस्कॉर्ट सेवा उपलब्ध कराई जाती है। रात को कहीं भी जा रही महिला को यदि असुरक्षा का डर हो और उसके वाजिब कारण हों तो उसकी सूचना पर एस्कॉर्ट किया जाता है। यदि मदद मांगने वाली के पास वाहन नहीं है तो उसे ऑटो-टैंपो, सवारी वाहन करवा कर घर तक छुड़वाया जाता है। इसकी जरूरत न होने पर जिस सवारी से वह जा रही है, उसकी मॉनिटरिंग की जाती है। एक घंटे के भीतर एस्कॉर्ट सेवा मांगने वाली लड़की से फीडबैक भी लेते हैं।
डीसीपी कहती हैं कि एस्कॉर्ट सेवा का मतलब यह नहीं कि यह आपको ऑफिस से घर या घर से ऑफिस छोड़ने के लिए है। लखनऊ कमिश्नरेट में इस वक्त कुल 90 पीआरवी हैं और इसमें से 10 फीसदी महिला पीआरवी सक्रिय है। त्योहार को देखते हुए इसकी संख्या बढ़ाई जा रही है।
फोन करें या सोशल मीडिया पर 112 को टैग करें
किसी भी लड़की को मदद चाहिए तो 24 घंटे में कभी भी कहीं से भी 112 पर फोन करें या फिर सोशल मीडिया पर मदद मांगे और 112 नंबर को टैग कर दें। आपसे तुरंत संपर्क किया जाएगा।