लखनऊ : राज्यों को कोयला आयात करने का निर्देश वापस लिया जाए, एआईपीईएफ ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को भेजा पत्र
शैलेंद्र दुबे ने कहा कि अतीत में कोयला आयात की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और कदाचार का विषय उठता रहा है। आयातित कोयले के ओवर-इनवॉइसिंग और बंदरगाह पर कोयला परीक्षण में हेराफेरी के कई मामले दर्ज हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ ) ने घरेलू कोयले की कमी को पूरा करने के लिए राज्यों को 10 प्रतिशत कोयला आयात करने के संबंधी बिजली मंत्रालय के 28 अप्रैल का निर्देश वापस लेने की मांग की है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह को भेजे गए एक पत्र में एआईपीईएफ के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि अगर राज्यों को कोयले का आयात करने के लिए मजबूर किया जाता है तो भारत सरकार को इसका अतिरिक्त बोझ उठाना चाहिए ताकि पहले से ही आर्थिक रूप से संकटग्रस्त बिजली कंपनियों और आम उपभोक्ताओं पर बोझ न पड़े। एआईपीईएफ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता पर केंद्र सरकार के साथ उठाने की भी अपील की है।
एआईपीईएफ के पत्र में कहा गया है कि वर्तमान संकट भारत सरकार की नीतिगत विफलता और विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय की कमी का परिणाम है। रेलवे वैगनों की कमी के कारण स्थिति और भी बदतर हो गई है। 2016 में सीआईएल के 35000 करोड़ रुपये के संचित राजस्व को छीनने के भारत सरकार के निर्णय ने नई खदानों के विकास और मौजूदा खदानों की क्षमता में वृद्धि को पंगु बना दिया। यदि इस अधिशेष को कोयला खदान क्षेत्र में वापस निवेश कर दिया जाता तो वर्तमान कमी नहीं होती।
शैलेंद्र दुबे ने कहा कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद एक वर्ष के लिए सीएमडी सीआईएल के पद को खाली रखने से पता चलता है कि कोयले की कमी के लिए भारत सरकार स्वयं जिम्मेदार थी अत: आयातित कोयले के लिए अतिरिक्त शुल्क केंद्र सरकार द्वारा देय है और नीति के रूप में राज्यों पर यह बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। पत्र में मांग की गई है कि अतिरिक्त आयातित कोयला राज्यों को मौजूदा सीआईएल दरों पर उपलब्ध कराया जाना चाहिएए और आयातित कोयले व भारतीय कोयले का अंतर भारत सरकार द्वारा दिया जाना चाहिए। रेल मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि कोयले की आवाजाही के लिए वैगनों की आवश्यकता प्रतिदिन 441 रैक है और उपलब्धता प्रति दिन केवल 405 रैक है। 2017-18 से 2021-22 की अवधि के दौरान रेलवे द्वारा वैगनों के लिए दिए गए ऑर्डर औसतन 10,400 वैगन प्रति वर्ष थे। इसके विपरीत इसी अवधि के लिए प्रति वर्ष 23592 वैगन तक लंबित था जिसके लिए आदेश दिए गए थे लेकिन वैगनों की आपूर्ति नहीं की गई थी।
शैलेंद्र दुबे ने कहा कि अतीत में कोयला आयात की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और कदाचार का विषय उठता रहा है। आयातित कोयले के ओवर-इनवॉइसिंग और बंदरगाह पर कोयला परीक्षण में हेराफेरी के कई मामले दर्ज हैं। डीआरआई द्वारा उठाए गए इन मामलों को तार्किक निष्कर्ष पर ले जाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने राज्य के उत्पादन गृहों को कोयले का आयात करने का निर्देश देते हुए स्पष्ट रूप से इस कारक को नजरअंदाज कर दिया है कि अधिकांश राज्यों के तापीय बिजलीघरं को कोयला आयात में कोई पूर्व अनुभव नहीं है। इससे राज्य धोखाधड़ी के जोखिम से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम नहीं होंगे।