फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Lucknow: Instruction to import coal to states should be withdrawn, AIPEF sent letter to Union Energy Minister

लखनऊ : राज्यों को कोयला आयात करने का निर्देश वापस लिया जाए, एआईपीईएफ ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को भेजा पत्र

Fri, 13 May 2022 12:58 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 13 May 2022 12:58 PM IST
सार

शैलेंद्र दुबे ने कहा कि अतीत में कोयला आयात की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और कदाचार का विषय उठता रहा है। आयातित कोयले के ओवर-इनवॉइसिंग और बंदरगाह पर कोयला परीक्षण में हेराफेरी के कई मामले दर्ज हैं।

विज्ञापन
Lucknow: Instruction to import coal to states should be withdrawn, AIPEF sent letter to Union Energy Minister
भारतीय रेलवे कोयला आपूर्ति (सांकेतिक तस्वीर)

विस्तार

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ ) ने घरेलू कोयले की कमी को पूरा करने के लिए राज्यों को 10 प्रतिशत कोयला आयात करने के संबंधी बिजली मंत्रालय के 28 अप्रैल का निर्देश वापस लेने की मांग की है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह को भेजे गए एक पत्र में एआईपीईएफ के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि अगर राज्यों को कोयले का आयात करने के लिए मजबूर किया जाता है तो भारत सरकार को इसका अतिरिक्त बोझ उठाना चाहिए ताकि पहले से ही आर्थिक रूप से संकटग्रस्त बिजली कंपनियों और आम उपभोक्ताओं पर बोझ न पड़े। एआईपीईएफ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से इस मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता पर केंद्र सरकार के साथ उठाने की भी अपील की है।

विज्ञापन


एआईपीईएफ  के पत्र में कहा गया है कि वर्तमान संकट भारत सरकार की नीतिगत विफलता और विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय की कमी का परिणाम है। रेलवे वैगनों की कमी के कारण स्थिति और भी बदतर हो गई है। 2016 में सीआईएल के 35000 करोड़ रुपये के संचित राजस्व को छीनने के भारत सरकार के निर्णय ने नई खदानों के विकास और मौजूदा खदानों की क्षमता में वृद्धि को पंगु बना दिया। यदि इस अधिशेष को कोयला खदान क्षेत्र में वापस निवेश कर दिया जाता तो वर्तमान कमी नहीं होती।
विज्ञापन


शैलेंद्र दुबे ने कहा कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद एक वर्ष के लिए सीएमडी सीआईएल के पद को खाली रखने से पता चलता है कि कोयले की कमी के लिए भारत सरकार स्वयं जिम्मेदार थी अत: आयातित कोयले के लिए अतिरिक्त शुल्क केंद्र सरकार द्वारा देय है और नीति के रूप में राज्यों पर यह बोझ नहीं डाला  जाना चाहिए। पत्र में मांग की गई है कि अतिरिक्त आयातित कोयला राज्यों को मौजूदा सीआईएल दरों पर उपलब्ध कराया जाना चाहिएए और आयातित कोयले व भारतीय कोयले का अंतर भारत सरकार द्वारा दिया जाना चाहिए। रेल मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि कोयले की आवाजाही के लिए वैगनों की आवश्यकता प्रतिदिन 441 रैक है और उपलब्धता प्रति दिन केवल 405 रैक है। 2017-18 से 2021-22 की अवधि के दौरान रेलवे द्वारा वैगनों के लिए दिए गए ऑर्डर औसतन 10,400 वैगन प्रति वर्ष थे। इसके विपरीत इसी अवधि के लिए प्रति वर्ष 23592 वैगन तक लंबित था जिसके लिए आदेश दिए गए थे लेकिन वैगनों की आपूर्ति नहीं की गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


शैलेंद्र दुबे ने कहा कि अतीत में कोयला आयात की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और कदाचार का विषय उठता रहा है। आयातित कोयले के ओवर-इनवॉइसिंग और बंदरगाह पर कोयला परीक्षण में हेराफेरी के कई मामले दर्ज हैं। डीआरआई द्वारा उठाए गए इन मामलों को तार्किक निष्कर्ष पर ले जाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने राज्य के उत्पादन गृहों को कोयले का आयात करने का निर्देश देते हुए स्पष्ट रूप से इस कारक को नजरअंदाज कर दिया है कि अधिकांश राज्यों के तापीय बिजलीघरं को कोयला आयात में कोई पूर्व अनुभव नहीं है। इससे राज्य धोखाधड़ी के जोखिम से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम नहीं होंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed