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खुद की मर्जी से विवाह करने वालों को न करें परेशान, कोर्ट का प्रेम विवाह करने वालों की हिफाजत में अहम फैसला
Mon, 20 Jul 2020 10:29 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 20 Jul 2020 10:29 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : social media
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की एक नजीर के हवाले से कहा है कि मर्जी से विवाहित बालिग जोड़े की जिंदगी में किसी का दखल नहीं होना चाहिए। अदालत ने इस अहम विधि व्यवस्था के साथ मर्जी से शादी करने वाले बालिग दंपती के शांतिपूर्ण जीवन व आजादी में दखल न देने के निर्देश संबंधित अफसरों को दिए हैं।
इस जोड़े ने कोर्ट में सुरक्षा को लेकर गुहार लगाई थी। न्यायमूर्ति अनिल कुमार और न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा की खंडपीठ ने यह अहम फैसला हरदोई जिले के विवाहित जोड़े की याचिका का निस्तारण करते हुए सुनाया।
याचियों के वकील सालिकराम यादव का कहना था कि याची जोड़े ने स्वेच्छा से बीती 20 जून को हिंदू रीति रिवाज से आर्य समाज मंदिर में विवाह किया। बालिग होने के सबूत के तौर पर दोनों ने अपनी उम्र संबंधी और विवाह के प्रमाणपत्र याचिका के साथ पेश किए।
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याचियों के वकील ने कहा कि दोनों शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन बिता रहे हैं। अभी तक दोनों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं है। इसके बावजूद युवती के पिता उनकी शादी से नाराज होकर संबंधित थाने की पुलिस की मदद से उनके वैवाहिक जीवन में परेशानी पैदा कर रहे हैं।
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इस जोड़े ने कोर्ट में सुरक्षा को लेकर गुहार लगाई थी। न्यायमूर्ति अनिल कुमार और न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा की खंडपीठ ने यह अहम फैसला हरदोई जिले के विवाहित जोड़े की याचिका का निस्तारण करते हुए सुनाया।
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याचियों के वकील सालिकराम यादव का कहना था कि याची जोड़े ने स्वेच्छा से बीती 20 जून को हिंदू रीति रिवाज से आर्य समाज मंदिर में विवाह किया। बालिग होने के सबूत के तौर पर दोनों ने अपनी उम्र संबंधी और विवाह के प्रमाणपत्र याचिका के साथ पेश किए।
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याचियों के वकील ने कहा कि दोनों शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन बिता रहे हैं। अभी तक दोनों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं है। इसके बावजूद युवती के पिता उनकी शादी से नाराज होकर संबंधित थाने की पुलिस की मदद से उनके वैवाहिक जीवन में परेशानी पैदा कर रहे हैं।
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इस मामले की दी नजीर
इसके खिलाफ याचियों ने जीवन की हिफाजत की गुहार लगाते हुए कोर्ट की शरण ली थी। अदालत ने लता सिंह बनाम यूपी सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाते हुए याचिका में पक्षकार राज्य सरकार समेत अन्य अफसरों को निर्देश दिए कि दंपती के शांतिपूर्ण जीवन और आजादी में कोई दखल न दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने मर्जी से प्रेम विवाह करने वाली लखनऊ की लता सिंह के मामले में वर्ष 2006 में प्रशासनिक व पुलिस अफसरों को यह देखने के निर्देश दिए थे कि अगर कोई बालिग लड़का या लड़की अंतर्जातीय अथवा अंतर्धार्मिक विवाह करते हैं तो ऐसे जोड़े को कोई परेशान न करे। न ही उनके साथ कोई हिंसा-प्रताड़ना करे या धमकी दे। अगर कोई ऐसा करता है तो पुलिस उसके खिलाफ सख्ती से पेश आए।
सुप्रीम कोर्ट ने मर्जी से प्रेम विवाह करने वाली लखनऊ की लता सिंह के मामले में वर्ष 2006 में प्रशासनिक व पुलिस अफसरों को यह देखने के निर्देश दिए थे कि अगर कोई बालिग लड़का या लड़की अंतर्जातीय अथवा अंतर्धार्मिक विवाह करते हैं तो ऐसे जोड़े को कोई परेशान न करे। न ही उनके साथ कोई हिंसा-प्रताड़ना करे या धमकी दे। अगर कोई ऐसा करता है तो पुलिस उसके खिलाफ सख्ती से पेश आए।