{"_id":"63616d11e2f0261a187fb235","slug":"lucknow-game-of-saving-the-clerk-accused-of-corruption-in-recruitment-continues","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow : भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोपी लिपिक को बचाने का खेल जारी, हाईकोर्ट से जमानत याचिका भी खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow : भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोपी लिपिक को बचाने का खेल जारी, हाईकोर्ट से जमानत याचिका भी खारिज
Wed, 02 Nov 2022 04:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 02 Nov 2022 04:20 AM IST
सार
Lucknow : हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की अपील खारिज होने और विभाग से अभियोजन की स्वीकृति होने के करीब तीन माह बाद भी भर्ती घोटाले के आरोपी लिपिक अनिल कुमार यादव की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
विज्ञापन
demo pic...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की अपील खारिज होने और विभाग से अभियोजन की स्वीकृति होने के करीब तीन माह बाद भी भर्ती घोटाले के आरोपी लिपिक अनिल कुमार यादव की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। आईसीडीएस मुख्यालय में नजारत जैसे महत्वपूर्ण पटल की जिम्मेदारी संभाल रहे आरोपी लिपिक को अधिकारियों की साठगांठ से बचाने का खेल जारी है।
विज्ञापन
दरअसल, उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनाती के दौरान अनिल समेत कई अन्य लिपिकों पर अवर अभियंताओं की भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का आरोप लगा था। चूंकि उस समय सपा की सरकार थी और अनिल के कई मंत्रियों से नजदीकी संबंध थे इसलिए उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
2017 में सत्ता बदली तो आयोग में भर्ती घोटाले की जांच हुई तो आयोग के तत्कालीन सचिव महेश प्रसाद समेत कुल पांच लोगों के शामिल होने की बात सामने आई। इसमें अनिल भी था। इस आधार पर आयोग ने अनिल की प्रतिनियुक्ति रद्द कर उसे मूल विभाग में भेज दिया, लेकिन अनिल ने मैनपुरी में वापस जाने के बजाय तत्कालीन निदेशक आईसीडीएस से सांठगांठ कर मुख्यालय में ही अपनी तैनाती करा ली।
विज्ञापन
उधर आयोग ने जांच कराई तो अलग-अलग हुई तीन भर्तियों में धांधली और सभी में अनिल के शामिल होने की पुष्टि हुई। इस पर आयोग ने बाल विकास विभाग को अनिल के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था। आयोग के पत्र के आधार पर तत्कालीन निदेशक शत्रुघ्न सिंह ने अनिल को निलंबित तो किया, लेकिन कुछ ही दिन में उसे बहाल भी कर दिया गया।
इस बीच आयोग ने मामले की जांच सतर्कता आयोग को सौंप दी। जांच में दोषी पाये जाने पर तत्कालीन विशेष सचिव गृह आरपी सिंह ने विभाग को अनिल के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति देने के लिए पत्र लिखा। इस आधार पर विभाग ने अभियोजना की स्वीकृति दे दी थी।
सीएम ऑफिस के निर्देश पर भी नहीं हो पा रही कार्रवाई
गिरफ्तारी से बचने के लिए अनिल ने हाईकोर्ट की शरण ली, लेकिन कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका जुलाई में ही खारिज दी। याचिका खारिज हुए भी तीन महीने हो गए हैं, लेकिन न तो सतर्कता अधिष्ठान ने अनिल की गिरफ्तारी की और न ही विभागीय स्तर से ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी आरोपी लिपिक पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन शासन में अनुभाग स्तर के अधिकारियों से सांठगांठ करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल रखा है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अब जल्द ही उसकी गिरफ्तारी हो सकती है।