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लखनऊ : लैंड रिकॉर्ड को रजिस्ट्री विभाग से जोड़ने के सीएम ने दिए निर्देश, निदेशक कार्यालयों में भी लागू होगी ई-ऑफिस व्यवस्था
Fri, 17 Jun 2022 04:08 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 17 Jun 2022 04:08 PM IST
सार
मुख्यमंत्री ने कहा रजिस्ट्री विभाग का कार्य केवल राजस्व एकत्रित करना नहीं होना चाहिए। जमीन की रजिस्ट्री से पूर्व यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि विक्रय करने वाला व्यक्ति ही वास्तव में मालिक है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लैंड रिकॉर्ड को रजिस्ट्री विभाग से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री विभाग का कार्य केवल राजस्व एकत्रित करना नहीं होना चाहिए। जमीन की रजिस्ट्री से पूर्व यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि विक्रय करने वाला व्यक्ति ही वास्तव में मालिक है। मुख्यमंत्री राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के कामकाज की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने सचिवालय में लागू ई-ऑफिस व्यवस्था को सभी विभागाध्यक्ष और निदेशक कार्यालयों में भी लागू करने के निर्देश दिए।
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सीएम ने सरकारी विभागों की ओर से आयोगों और भर्ती बोर्डों को रिक्त पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन अधियाचन भेजने की व्यवस्था शुरू करने के भी निर्देश दिए। सीएम ने छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के ऑनलाइन आवेदन में आ ही समस्याओं के समाधान के निर्देश देते हुए कहा कि वरासत उत्तराधिकार, स्टांप पंजीयन के प्रकरणों में तकनीक की मदद से आमजन को और सहूलियत दी जा सकती है। तकनीक से भूमि रजिस्ट्री के मामलों में धोखाधड़ी भी रुकेगी और रिकॉर्ड को अपडेट करने में लगने वाला समय भी कम होगा।
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मुख्यमंत्री योगी ने कहा, गो आश्रय स्थलों को वाराणसी मॉडल पर बनाएं आत्मनिर्भर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्लॉक स्तर पर स्थापित होने वाले गो आश्रय स्थलों को वाराणसी के गोबर धन योजना मॉडल पर आत्मनिर्भर बनाया जाए। वहां गोबर, गोमूत्र आदि से विभिन्न उत्पाद तैयार होते हैं। वह बृहस्पतिवार को अपने सरकारी आवास पर गो आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रस्तुतीकरण देख रहे थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विकास खंड स्तर पर न्यूनतम दो हजार गोवंश क्षमता के आश्रय स्थलों का निर्माण 30 से 50 एकड़ में कराया जाए। गोशालाओं को आपस में लिंक कर ईंधन उत्पादन का बेहतर कार्य किया जा सकता है। उन्होंने राज्य स्तरीय आईटी बेस्ड एक पोर्टल डेवलप करने को कहा, जिसमें संरक्षित गोवंश के पंजीकरण व टीकाकरण का पूरा ब्योरा दर्ज हो।
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