अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट पर भारी पड़े ये पांच गांव!
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे सीएम अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट है। अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट की नींव का पत्थर अखिलेश 23 नवंबर को रखने जा रहे हैं। उससे पहले एक बड़ी मुसीबत उनके सामने आ गई है।
इस एक्सप्रेस वे के बीच आने वाले पांच गांवों ने अचानक अपनी जमीनें बेचने से इनकार कर दिया है। इन पांच गांवों में करीब 250 परिवार रहते हैं। ये परिवार अपने हित को देखते हुए पीछे हट गए हैं।
ये पांचों गांव मोहन रोड पर पड़ते हैं। ये रोड लखनऊ को उन्नाव से जोड़ती है। लखनऊ से ज्यादा करीब होने की वजह से गांववासी अपनी जमीनों के बदले में सरकार से बड़ी कीमत चाहते हैं।
इस 302 किलोमीटर लंबे लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे के बीच दस जिलों के 232 गांवों की 3100 हेक्टेयर जमीन इस्तेमाल की जानी है। इस प्रोजेक्ट में लखनऊ और आगरा के अलावा फिरोजाबाद, इटावा, मैनपुरी, उन्नाव, कानपुर, उरैया और कन्नौज जिले भी शामिल है।
अग्रेंजी दैनिक अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार अभी तक 13 गांवों की 105 हेक्टेयर जमीन का सौदा अभी सरकार ने किया है।
नटकौरा, महमूदपुर, कतिनघरा, रेवारी और इंदवारा गांव को दूसरे सात गांवों के बराबर मुआवजा नही मिला है। इस प्रोजेक्ट की करीब 24 हेक्टेयर जमीन इन पांच गांवों में पड़ती है।
अखिलेश को महंगा पड़ेगा भेदभाव
इन पांच गांवों को सर्किल रेट के अनुसार प्रति हेक्टेयर 50 लाख रुपए का ऑफर दिया गया। वहीं इन्ही गांवों के पास स्थित सात गांवों को प्रति हेक्टेयर 3.76 करोड़ रुपए की कीमत मिली है। बाकी छह गांवों को प्रति हेक्टेयर 2 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया गया है।
सूत्रों का मानना है कि इस मसले को सुलझाने के लिए अब अखिलेश सरकार इन पांच गांवों को भी पहले से ज्यादा मुआवजा देने के लिए तैयार है। इसके लिए एक नई अधिसूचना भी जारी की जाएगी।
यही नहीं इटावा के किसान भी अब इसी मांग के साथ पीछे हट सकते हैं। इटावा गांव के किसानों को उनकी जमीनों के लिए प्रति हेक्टेयर 32 से 45 लाख रुपए देने की बात हुई है। वहीं अखिलेश के गांव सैफई में सरकार ने किसानों को प्रति हेक्टेयर 80 लाख रुपए का मुआवजा दिया है।
इटावा के सिटी मजिस्ट्रेट ईश्वर चंद ने बताया कि यहां लखनऊ की तरह मुआवजे की रकम बढ़ाने की कोई घोषणा अभी नहीं हुई है।