लंदन के डॉक्टरों ने लखनऊ रेफर किया केस, जानिए हुआ क्या?
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पैदाइशी विकृति ‘एक्सट्रॉफी ब्लैडर’ से पीड़ित एक मासूम का ऑपरेशन कर केजीएमयू के डॉक्टरों ने उसे इस जन्मजात समस्या से छुटकारा दिला दिया। इस विकृति में बच्चे की पेशाब की थैली शरीर से बाहर आ जाती है और पेशाब हर समय टपकता रहता है। सर्जरी के बाद अब ये बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। सोमवार को उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
केजीएमयू पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के हेड प्रो. एसएन कुरील ने बताया कि मध्य प्रदेश के व्यवसायी के घर 5 जून 2015 को एक बच्चे का जन्म हुआ था। परिवार में पहले बच्चे के जन्म की खुशी उस समय तनाव में बदल गई जब उन्होंने देखा की उसे पेशाब मार्ग में कुछ विकृति है और कोई अंग बाहर निकला हुआ है।
यही नहीं बाद में उससे पेशाब भी बाहर रिसना (टपकना) शुरू हो गया। पिता ने बच्चे को जबलपुर के मेडिकल कॉलेज में दिखाया। वहां इलाज का दावा किया गया लेकिन वो उससे संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार के एक चिकित्सक डॉ. हारुन मंसूरी से संपर्क किया।
जो लंदन के ग्रेट आरमंड स्ट्रीट हॉस्पिटल फॉर चिल्ड्रेन में बाल रोग विशेषज्ञ थे। उन्होंने बच्चे के पिता को बताया कि उसे पैदाइशी विकृति ‘एक्सट्रॉफी ब्लैडर’ नाम की बीमारी है। इसके बाद उन्होंने हॉस्पिटल विश्व विख्यात पीडियाट्रिक यूरोलॉजिस्ट प्रो. अब्राहम चेरियन और डॉ. इमरान मुश्ताक से इलाज के लिए चर्चा की।
इस दौरान बच्चे के पिता भी इंटरनेट पर बीमारी के इलाज के बारे में जानकारी इकठ्ठा कर रहे थे। उन्होंने देश के कई कॉरपोरेट अस्पतालों में संपर्क किया लेकिन सभी ने सर्जरी करने में असमर्थता जता दी।
प्रो. कुरील के पास लखनऊ आने की दी सलाह
बच्चे के पिता ने बताया कि इसी बीच उनके रिश्तेदार डॉ. हारुन मंसूरी ने उन्हें फोन कर बताया कि प्रो. अब्राहम चेरियन और डॉ. इमरान मुश्ताक ने बच्चे की सर्जरी के लिए लंदन न आने की सलाह दी है।
उन्होंने बताया कि भारत में लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में पीडियाट्रिक सर्जन प्रो. एसएन कुरील इस पैदाइशी विकृति की सर्जरी से दूर करने में माहिर एक मात्र विशेषज्ञ हैं।
ओमान में चिकित्सक व बच्चे के चाचा डॉ. अकबर ने भी उन्हें प्रो. एसएन कुरील का नाम सुझाया। इसके बाद बच्चे पिता ने विदेश जाकर ऑपरेशन कराने की जगह केजीएमयू आने का मन बना लिया।
लंदन के ग्रेट आरमंड स्ट्रीट हॉस्पिटल फॉर चिल्ड्रेन में तैनात डॉ. हारुन मंसूरी ने बच्चे की सर्जरी के लिए प्रो. एसएन कुरील को एक ई-मेल कर स्पेशल रिक्वेस्ट की। इसके साथ ही बताया कि प्रो. अब्राहम चेरियन और डॉ. इमरान मुश्ताक ने भी उनके पास जाने की सलाह दी है। इसके बाद 13 अगस्त को बच्चे को लेकर उसके परिवारीजन केजीएमयू आ गए। वहां जांच के बाद 17 अगस्त को उसकी सर्जरी कर दी गई।
सात घंटे की सर्जरी से ठीक हुआ बच्चा
प्रो. एसएन कुरील ने बताया कि बच्चे की सर्जरी में कुल सात घंटे का समय लगा। अन्य संस्थानों में इस तरह की सर्जरी चिकित्सक करते हैं लेकिन 90 फीसदी मामलों में बच्चों को दोबारा दिक्कत हो जाती है। जिसमें पेशाब की थैली दोबारा बाहर निकल आना और फिर उसमें से पेशाब टपकना शामिल है।
प्रो. कुरील ने बताया कि उन्होंने एक नई तकनीक इस सर्जरी के लिए विकसित की है। जिसे अंतराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। इसे ‘कुरील टेक्निक’ का नाम दिया गया है। इससे सफलता की दर 100 फीसदी हो गई है। अब तक वो 200 से अधिक ऐसी सर्जरी कर चुके हैं।
2014 में ऑस्ट्रिया में यूरोपियन सोसाइटी ऑफ पीडियाट्रिक यूरोलॉजी के सिल्वर जुबली अधिवेशन में इस ऑपरेशन की नई तकनीक के प्रदर्शन के लिए बुलाया गया था। कई विशेषज्ञों ने इसे सीखने के लिए केजीएमयू आने की इच्छा जताई है। एनेस्थेटिस्ट प्रो. जीपी सिंह, डॉ. पियूष, सिस्टर वंदना, डॉ. अर्चिका, डॉ. आनंद पांडेय, डॉ. अजय, डॉ. दिगंबर और सिस्टर यादव ने इस सर्जरी में उनका साथ दिया।