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मोहनलालगंज की ग्राउंड रिपोर्ट : सरकारी योजनाओं का लाभ पाने में हो रही मुश्किल, मुफ्त राशन की है बहार
Sat, 23 Mar 2024 11:47 PM IST
ishwar ashish
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, मोहनलालगंज
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, मोहनलालगंज
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 23 Mar 2024 11:47 PM IST
सार
मोहनलालगंज लोकसभा सीट पर दलित मतदाता निर्णायक हैं। जनता का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में मुश्किल हो रही है लेकिन राशन मिलने से खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं हो रही है। यहां देखें... एक ग्राउंड रिपोर्ट
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हरिश्चंद्र, अनिल पांडेय, दिवाकर, बाबूलाल और राशेंद्र त्रिपाठी।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
गांव के टेढ़े-मेढ़े रास्तों की तरह ही मोहनलालगंज (सुरक्षित) लोकसभा सीट का सियासी समीकरण भी उलझा हुआ है। यह 1962 से ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, इसके बाद भी बसपा यहां से कभी नहीं जीती। क्षेत्र के लोगों में कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल है। उज्ज्वला, पीएम आवास योजना, शौचालय व किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं तो हैं, लेकिन इनके लाभ के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। मगर मुफ्त राशन की यहां बहार है। इन सब के बीच निवर्तमान सांसद कौशल किशोर भाजपा से तीसरी बार मैदान में हैं। मोदी की गारंटी के दावों के साथ सपा-कांग्रेस का गठबंधन व बसपा के वोट बैंक ने यहां चुनाव को त्रिकोणीय बनाकर रोमांचक कर दिया है।
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निगोंहा क्षेत्र के खुदीखेड़ा गांव निवासी किराना व्यापारी राशेंद्र त्रिपाठी शुक्रवार को दुकान पर बैठे मिले। होली के त्योहार में ग्राहकों की आवाजाही के बीच कहते हैं कि सरकारी योजनाओं जैसे ऋण आदि के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कभी लेखपाल के नहीं आने तो कभी सचिव की फाइल में कमी से परेशान होना पड़ता है। फत्तेखेड़ा के रहने वाले धरमवीर और मनीष बताते हैं कि मजदूरी करने जा रहे हैं। खेती योग्य जमीन नहीं है। सरकारी कोटे की दुकान से मुफ्त वाला राशन भरपूर मिल रहा है। इससे खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं है। मोहनलालगंज क्षेत्र के केशरी खेड़ा गांव निवासी किसान हरिश्चंद्र और सिसेंडी के बाबूलाल कहते हैं कि हम जैसे सैकड़ों किसानों को सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है। पहले फसल उचित मूल्य पर बेचने के लिए भटना पड़ता था। अब घर बैठे सुविधाएं मिल रहीं हैं। दहियर के अनिल पांडेय और भौदरी गांव के दिवाकर कहते हैं कि गांव विकसित हो रहे हैं। घर का जो सामान पहले लखनऊ लेने जाना पड़ता था, वह अब गांव में ही मिल जा रहा है।
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तीन विधानसभा में भाजपा
राजधानी लखनऊ से रायबरेली, उन्नाव, बाराबंकी और सीतापुर संसदीय सीट को जोड़ने वाली दूसरी सीट मोहनलालगंज है। यहां की पांच विधानसभाओं में से मोहनलालगंज, सरोजनीनगर, बख्शी का तालाब, मलिहाबाद तो लखनऊ में आती हैं, जबकि सिधौली सीतापुर में है। इनमें तीन पर भाजपा के पास हैं। इस सीट पर करीब 27 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिसमें 9,40,429 पुरुष तो महिला मतदाताओं की संख्या 10,82,912 है। थर्ड जेंडर 90 हैं।
दलित निर्णायक : हर चुनाव में दिखता है मजबूत असर
- चार लाख से ज्यादा रावत यानी पासी बिरादरी के मतदाता हैं। 2.53 लाख यादव मतदाता भी मजबूत हैं। 2.21 लाख जाटव भी किसी से कम नहीं हैं।
- 2.15 लाख ब्राह्मण, 1.77 लाख ठाकुर और करीब 1.75 लाख लोधी व मौर्य भी अपनी मजबूत मौजूदगी दिखाते हैं। 1.50 लाख मुस्लिम भी निर्णायक की हैसियत रखते हैं।
कभी रहा कांग्रेस का दबदबा... वर्ष 1952 में मोहनलालगंज का हिस्सा रायबरेली और उन्नाव संसदीय सीट के बीच बंटा था। यह सीट 1962 में बनी। दलितों की आबादी अधिक होने के कारण यह सुरक्षित सीट है। पहले तीन चुनाव कांग्रेस की गंगा देवी जीतीं। इसके बाद सपा की रीना चौधरी दो बार विजयी रहीं। कांग्रेस पांच बार, सपा चार बार, भाजपा तीन बार और जनता दल व लोकदल एक-एक बार जीते हैं।
खास हैं आम के बाग : चुनावी समर में होती है चर्चा
- क्रांतिकारियों की स्मृति में काकोरी में बना स्मारक, आम के लिए मशहूर मलिहाबाद, पुरातात्विक स्थल हुलासखेड़ा समेत कई प्रमुख मंदिर भी यहां हैं। आम बागान की सुविधाओं का अभाव और छुट्टा पशुओं के आश्रय स्थलों की दुर्दशा भी क्षेत्र में बड़ा मुद्दा है।