लोकायुक्त ने अमिताभ की जांच पर उठाए सवाल, मांगी रिपोर्ट
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लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने निलंबित आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के खिलाफ चल रही सतर्कता जांच से संबंधित दस्तावेज तलब कर लिए हैं। उन्होंने सतर्कता निदेशालय व सतर्कता विभाग द्वारा दी गई विरोधाभासी जानकारी मिलने पर यह कदम उठाया है।
लोकायुक्त ने सचिव सतर्कता व महानिदेशक सतर्कता दोनों को ही अमिताभ ठाकुर के खिलाफ शुरू हुई सतर्कता जांच के बारे में जानकारी देने को कहा था। इसके जवाब में सचिव के यहां से उन्हें बताया गया कि 7 जनवरी 2012 को तत्कालीन आईज़ी कार्मिक अभय कुमार प्रसाद ने तत्कालीन डीजीपी के आदेशों का हवाला देते हुए गृह विभाग से जांच करने के लिए पत्र भेजा था।
इसमें अमिताभ की चल-अचल संपत्ति की सतर्कता जांच कराने को कहा गया था। लोकायुक्त को भेजे जवाब में कहा गया है कि प्रकरण की जांच पहले सतर्कता समिति और फिर सतर्कता अधिष्ठान को दी गई।
दो माह पहले ही इस मामले में खुली जांच के आदेश हुए। साथ ही महानिदेशक सतर्कता को बता दिया गया है कि वे जांच से जुड़ी जानकारी लोकायुक्त कार्यालय को उपलब्ध करा दें।
'अमिताभ ठाकुर के खिलाफ इसके पहले जांच नहीं हुई'
जबकि महानिदेशक सतर्कता ने जवाब दिया है कि अमिताभ ठाकुर के खिलाफ इससे पहले कोई जांच नहीं हुई। जांच के लिए 9 जुलाई 2015 को ही आदेश प्राप्त हुए। इस पर जांच चल रही है।
इन विरोधाभासी जानकारियों पर लोकायुक्त ने सचिव सतर्कता को पत्र भेज कर 7 जनवरी 2012 से 9 जुलाई 2015 के दौरान जांच से संबंधित दस्तावेजों के साथ तलब किया है।
आवास आयुक्त को भी किया तलब
लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने आवास आयुक्त को भी तलब किया है। लोकायुक्त को जिलाधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार 1997 में कौशलपुरी सहकारी आवास समिति ने खरगापुर में अमिताभ ठाकुर के नाम से दो और उनके पिता व भाई के नाम से दो-दो भूखंड (कुल छह भूखंड) बेचे हैं।
लोकायुक्त का कहना है कि जहां तक उन्हें पता है, किसी सहकारी समिति द्वारा किसी परिवार के एक ही सदस्य के नाम भूखंड बेचने का नियम है। इसी नाते उन्होंने आवास आयुक्त को शुक्रवार को नियमों के साथ अपने कार्यालय बुलाया है।