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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Lok Sabha Elections: Fourth phase of voting tomorrow, this is the condition of 13 seats of UP.

Lok Sabha Elections : शह-मात के लिए जोर आजमाइश... चौथे चरण का मतदान कल, यह है यूपी की 13 सीटों का सूरत-ए-हाल

Sun, 12 May 2024 05:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 12 May 2024 05:42 AM IST
सार

हर चाल पर शह और मात के दांव चले जा रहे हैं। भाजपा के लिए लड़ाई ज्यादा बड़ी है, क्योंकि पिछले चुनाव में इस चरण की सभी लोकसभा सीटों पर दमदार जीत हासिल की थी।

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Lok Sabha Elections: Fourth phase of voting tomorrow, this is the condition of 13 seats of UP.
मतदान कल... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चौथे चरण में तेरह संसदीय सीटों में खुशहाली के ताबड़तोड़ वादों से लेकर दावे तक किए जा रहे हैं। हर चाल पर शह और मात के दांव चले जा रहे हैं। भाजपा के लिए लड़ाई ज्यादा बड़ी है, क्योंकि पिछले चुनाव में इस चरण की सभी लोकसभा सीटों पर दमदार जीत हासिल की थी। इस बार कुछ सीटों पर कांटे का संघर्ष दिखाई है। एक तरफ भाजपा के सामने अपनी धमक बनाए रखने की चुनौती है तो दूसरी तरफ सपा, बसपा और कांग्रेस राजनीतिक जमीन तलाशने की जद्दोदजहद कर रहे हैं। चौथे द्वार पर किसमें कितना है दम, बता रहे हैं अभिषेक गुप्ता....

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कानपुर : अपने साथ रहें यही सबसे बड़ी चुनौती
इस सीट से भाजपा ने मौजूदा सांसद सत्यदेव पचौरी का टिकट काट कर रमेश अवस्थी को उम्मीदवार बनाया है। इंडी गठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी आलोक मिश्रा मैदान में हैं। वहीं, बसपा ने कुलदीप भदौरिया को टिकट देकर मुकाबला रोचक बना दिया है। भाजपा प्रत्याशी के सामने भितरघात सबसे बड़ी चुनौती है। बाहरी का मुद्दा कांग्रेस ने अच्छे से भुनाया है। बसपा प्रत्याशी के बाद ठाकुर वोटर भी असमंजस में है।

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  • मुद्दे : उद्योग, रोजगार, महंगाई और विकास।

अकबरपुर : त्रिकोणीय संघर्ष, मुकाबला रोमांचक 
यहां भाजपा से मौजूदा सांसद देवेंद्र सिंह भोले को तीसरी बार मैदान में हैं। पिछली बार कांग्रेस के टिकट से लड़ चुके राजाराम पाल इस बार सपा से गठबंधन प्रत्याशी हैं। बसपा से राजेश द्विवेदी हैं। भोले के पास जीत की हैट्रिक बनाने का अवसर है लेकिन पूर्व सांसद राजाराम पाल उन्हें कांटे की टक्कर दे रहे हैं। करीब सात लाख ओबीसी वोटर भी वेट एंड वाच की स्थिति में है।

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  • मुद्दे : स्वास्थ्य सेवाएं, बेरोजगारी, अन्ना मवेशी।


उन्नाव : विकास की बात से ज्यादा जातीय गुणा-भाग
उन्नाव सीट से भाजपा के मौजूदा सांसद साक्षी महाराज मैदान में हैं। साक्षी के पास जीत की हैट्रिक बनाने का मौका है। इस सीट पर सपा से अन्नू टंडन मैदान में हैं। बीएसपी ने अशोक पांडेय पर दांव लगाया है। यहां लोध वोटर 4.25 लाख, जबकि ओबीसी 8 लाख के आसपास हैं। भाजपा इसे जीत का आधार मान रही है। वहीं, अन्नू टंडन को एंटी इनकंबेंसी का सहारा है। वहीं, बसपा अपने काडर वोट के साथ और ब्राह्मणों के सहारे है।

  • मुद्दे : शिक्षा, बेरोजगारी और महंगाई।

मिश्रिख : रिश्तेदारों के  बीच चुनावी नूराकुश्ती
जीत की हैट्रिक के लिए भाजपा ने डॉ. अशोक कुमार रावत पर भरोसा जताया है। सपा से चुनौती दे रहीं संगीता राजवंशी रिश्ते में भाजपा प्रत्याशी की सलहज हैं। बसपा से डॉ. बीआर अहिरवार मैदान में डटे हैं। आरक्षित मिश्रिख सीट पर सवर्ण और पिछड़ी जातियों का खासा असर है। इस सीट की 90 फीसदी आबादी ग्रामीण है।

  • मुद्दे : आनलाइन व्यापार और महंगाई, शैक्षिक संस्थान का अभाव। 

हरदोई : साख बचाए रखने की चुनौती
हरदोई सीट पर पिछले दस साल से भाजपा का कब्जा है। इस बार फिर से मौजूदा सांसद जयप्रकाश रावत को मैदान में उतारा है. जबकि सपा ने पूर्व सांसद उषा वर्मा को उम्मीदवार बनाया है। बसपा ने भीमराव आंबेडकर को मैदान में उतारा है। मतदाता खामोश हैं। यहां अनुसूचित जाति के करीब 30.79 फीसदी और मुस्लिम मतदाता 13 फीसदी हैं।

  • मुद्दे : अन्ना पशु , महंगाई , युवाओं में समक्ष बेरोजगारी।

सीतापुर : त्रिकोणीय जंग
भाजपा ने यहां तीसरी बार सांसद राजेश वर्मा पर भरोसा जताया है। गठबंधन से राजेश राठौर मैदान में हैं। मुस्लिम, यादव और नाराज कुर्मियों को अपने पक्ष में करने की  कोिशश में हैं। बसपा ने भाजपा के पूर्व विधायक महेंद्र यादव को टिकट दिया है। उन्हें सजातीय मतदाताओं के साथ ही बसपा के काडर वोटर पर भी भरोसा है।

  • मुद्दे : बदहाल हथकरघा उद्योग, स्वास्थ्य सुविधाएं।

शाहजहांपुर : कोर वोटरों पर भरोसा
शहीदों की नगरी शाहजहांपुर में भाजपा सांसद अरुण कुमार सागर दूसरी बार खुद को साबित करने में जुटे हैं। सपा की ज्योत्सना गोंड उच्च शिक्षित युवा हैं। वह अपने कोर वोटरों को समेटने में जुटी हैं। दलित के साथ ही मुस्लिम और यादव समीकरण पर उनको भरोसा पूरा है। बसपा के दाेदराम वर्मा काडर में सक्रिय रहे। पहली बार चुनावी समर में उतरे हैं।

  • मुद्दा : छुट्टा पशु, गोलाघाट पुल, ग्रामीण परिवहन।

इटावा : दलित वोटर ही होंगे निर्णायक
मुलायम परिवार का गढ़ रही इटावा सीट में दलित आबादी 26.85 फीसदी है। यहां दूसरी बार मौजूदा सांसद रमाशंकर कठेरिया के सामने रिवायत तोड़ने की चुनौती है। सपा प्रत्याशी जितेंद्र दोहरे से उनकी टक्कर है। वह बसपा से आए हैं। बसपा ने हाथरस की पूर्व सांसद सारिका सिंह को टिकट दिया है। इटावा में उनका मायका है। बघेल परिवार की बहू होने से उन्हें उस जाति के वोटबैंक का भरोसा है।

  • मुद्दे : रोजगार के साधन नहीं, औरैया जिला बना सुविधाएं नदारद।

कन्नौज : अखिलेश के आने से बढ़ा रोमांच
1967 में अस्तित्व में आई कन्नौज सीट पर पहले सांसद डाॅ. राम मनोहर लोहिया थे।  सपा के लिए यहां समाजवाद का परचम फहराने और भाजपा के सामने जीत दोहराने की चुनौती है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के खुद मैदान में होने से चुनावी जंग दिलचस्प है। सांसद सुब्रत पाठक भाजपा के परंपरागत वोटबैंक, मोदी-योगी के नाम के सहारे हैं। बसपा के इमरान आम आदमी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं।

  • मुद्दे : रोजगार नाममात्र का, सुविधाओं का इंतजार।

धौरहरा : आजमा रहे दांवपेच
भाजपा ने यहां से तीसरी बार भी रेखा वर्मा को उतारा है। उनके समक्ष जातीय समीकरण साधने की चुनौती है। बसपा ने पुराने भाजपाई और सांसद रेखा वर्मा के करीबी श्याम किशोर अवस्थी को चुनाव में उतारा है। बसपा काडर वोट के साथ ही ब्राह्मणों में पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने आनंद भदौरिया पर दांव लगाया है।

  • मुद्दे : अधूरी हेमपुर क्रॉसिंग, उच्च शिक्षा, पलायन, बंद चीनी मिल।

बहराइच : ध्रुवीकरण को धार
सुरक्षित सीट से भाजपा ने सांसद अक्षयबर लाल गोंड के बेटे आनंद गोंड पर दांव लगाया है। जीत के लिए यहां ध्रुवीकरण को धार दी जा रही है। यहां योगी आदित्यनाथ ताबड़तोड़ सभाएं भी कर चुके हैं। पिछली बार सपा-बसपा गठबंधन से शब्बीर अहमद मैदान में थे। मुस्लिम चेहरा होने के कारण तेजी से ध्रुवीकरण हुआ। इस बार सपा-कांग्रेस गठबंधन ने रमेश गौतम को उतार मुकाबला रोमांचक बनाया है। बसपा के बृजेश कुमार सोनकर राजनीति के नए खिलाड़ी हैं। उन्हें काडर वोटबैंक पर भरोसा है।

  • मुद्दा : बाढ़, रोजगार, परिवहन।

फर्रुखाबाद : बिरादरी की लामबंदी
आलू के लिए प्रसिद्ध फर्रुखाबाद में इस बार जाति समीकरण हावी हैं। यहां भाजपा ने बसपा के मनोज अग्रवाल और सपा के पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव को अपने पक्ष में कर लिया है। भाजपा ने दो बार के सांसद मुकेश राजपूत को फिर मौका दिया है। सपा ने डॉ. नवल किशोर शाक्य पर दांव लगाया है। वह सपा के परंपरागत वोट बैंक के साथ अपनी बिरादरी के वोट बैंक को गोलबंद कर रहे हैं। यहां शाक्य बिरादरी अभी तक भाजपा के साथ थी। बसपा ने क्रांति पांडे को मैदान में उतारा है। वह ब्राह्मण और दलित वोट बैंक के सहारे हैं।

  • मुद्दे : गंगा एक्सप्रेसवे से दूरी, छुट्टा जानवर। जरदोजी और छपाई कारोबार का खत्म होना।

लखीमपुर खीरी : टेनी की साख का सवाल
भाजपा के मौजूदा सांसद अजय मिश्र टेनी के सामने इस बार सपा के उत्कर्ष  वर्मा हैं। बसपा ने अंशय कालरा को उतारा है। टेनी के सामने जीत की चुनौती है क्योंकि तिकुनिया कांड उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है। उत्कर्ष महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक  और किसानों की मौत को लेकर मुखर हैं। बसपा को युवा वोटरों और किसानों का साथ मिलने का आसरा है।

  • मुद्दे : महंगाई, गन्ना कीमत, स्कूल, डीएपी व कीटनाशकों की कमी।
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