लखनऊ के मंदिर में सीएम योगी ने किया हनुमान चालीसा का पाठ, कहा- 'आस्था नहीं छोड़ सकता'
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चुनाव आयोग के प्रचार पर 72 घंटे की रोक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार सुबह हनुमान सेतु स्थित बजरंग बली के मंदिर में पूजा अर्चना की। मुख्यमंत्री मंगलवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे शहर के बीच में स्थित हनुमान सेतु पर बजरंग बली के मंदिर पहुंचे और उन्होंने पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की और हनुमान चालीसा का पाठ किया।
योगी मंदिर में करीब 20 मिनट तक रहे। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद मीडिया से कोई बात नहीं की और मुस्कुराते हुए वापस लौट गए। आज लखनऊ सीट से भाजपा के प्रत्याशी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह को नामांकन करना है लेकिन मुख्यमंत्री योगी इस नामांकन में शामिल नहीं होंगे।
सीएम योगी के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी मंदिर पहुंचे, नामांकन करने से पहले राजनाथ सिंह ने मंदिर में पूजा की। सीएम योगी के प्रचार करने पर चुनाव आयोग ने प्रतिबंध लगा रखा है। हालांकि उनके प्रतिबंध में मंदिर में जाना शामिल नहीं है।
आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने आखिरकार आदर्श चुनाव आचार संहिता उल्लंघन मामलों में बड़ी कार्रवाई की। सोमवार को आयोग ने योगी आदित्यनाथ पर तीन दिन चुनाव प्रचार करने पर रोक लगा दी है। आयोग ने गहरी नाराजगी भी जाहिर की है।
यह रोक आज सुबह छह बजे से शुरू हई। चुनाव आयोग ने कहा मेरठ की रैली में आदित्यनाथ द्वारा की गई अली और बजरंग बली की टिप्पणी जाहिर तौर पर उचित नहीं है। गौर हो कि, योगी ने मेरठ की रैली में कहा था कि यदि सपा बसपा गठबंधन को अली पर भरोसा है तो उन्हें बजरंग बली पर भरोसा है।
आयोग ने योगी के बयान को सीधे तौर पर एमसीसी का उल्लंघन माना। आयोग ने कहा एक राज्य का मुख्यमंत्री होने के नाते योगी पर धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के अतिरिक्त सभी के मूल नैतिक अधिकारों को बनाए रखने की जिम्मेदारी है। रैली में उनकी टिप्पणियों ने सार्वजनिक मर्यादा का उल्लंघन किया है। जो खुले तौर वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश कही जा सकती है।
'कभी भी धर्म और जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे'
आयोग द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि उनकी अली और बजरंग बली टिप्पणी मायावती की देवबंद में मुस्लिम मतदाताओं की अपील के जवाब में दी गई थी।
सीएम योगी ने आचार संहिता के उल्लंघन के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी धर्म और जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे बल्कि यह काम विपक्ष ने किया है। मेरठ में दिए गए अपने बयान पर चुनाव आयोग से मिले नोटिस के जवाब में उन्होंने कहा कि धर्म या जाति के आधार पर वोट मांगने के आरोप पूरी तरह से गलत हैं।
उन्होंने आचार संहिता का कोई उल्लंघन नहीं किया है। साथ ही ये भी कहा कि वह आयोग के प्रति पूर्ण सम्मान रखते हैं और आदर्श आचार संहिता के पालन के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा कि उनके मेरठ में दिए भाषण पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह एक विपक्षी पार्टी की प्रमुख के बयान के संदर्भ में था। उन्होंने खुलेआम मुसलमानों से उनकी पार्टी के गठबंधन के पक्ष में वोट देने की अपील की थी। क्या धर्म के आधार पर मुस्लिमों से वोट मांगना धर्मनिरपेक्षता की श्रेणी में आएगा?
अपने भाषण में छद्म धर्मनिरपेक्षता को उभारा
हरे वायरस शब्द का प्रयोग उस सोच, उस संकीर्ण स्तर की राजनीति के लिए किया गया है, जिसके तहत राजनीतिक लाभ के लिए चिरस्थापित मूल्यों को नजरअंदाज कर धर्म विशेष को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
योगी ने लिखा कि बजरंग बली में उनकी अटूट आस्था है और किसी को बुरा लगे या कोई इससे अज्ञानतावश असुरक्षित महसूस करता है तो वह इस डर से अपनी इस आस्था को छोड़ नहीं सकते हैं। बजरंग बली उनके आराध्य हैं और हर शुभ कार्य के अवसर पर उनका स्मरण करते हैं।