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लोकसभा चुनावः कांग्रेस दे रही नेहरू-गांधी परिवार से रायबरेली के सौ साल पुराने रिश्ते की दुहाई

Sat, 04 May 2019 09:14 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायबरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायबरेली Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 04 May 2019 09:14 AM IST
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lok sabha elections 2019 congress has a strong connection from raebareli
sonia and rahul(File Photo)

रायबरेली में चुनाव प्रचार खत्म होने को है। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 11 अप्रैल को नामांकन करने के बाद बृहस्पतिवार को पहली बार रायबरेली में कदम रखा। कार्यकर्ताओं की बैठक संबोधित करने के बाद वह आराम करने चली गईं। उनकी अनुपस्थिति में चुनाव प्रचार की कमान बेटी प्रियंका गांधी ने संभाल रखी है। 

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यहां देश के बाकी हिस्सों से भी कांग्रेस के कार्यकर्ता पहुंचे हैं। जिन इलाकों में मतदान हो चुका है, वहां से बहुत से कांग्रेस नेता अमेठी और रायबरेली पहुंच गए हैं। कई जगह तो स्थानीय से ज्यादा बाहरी कार्यकर्ता दिख रहे हैं। सोनिया का स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा, जबकि उत्तर प्रदेश में पारा 45 डिग्री छू रहा है। प्रचार में उतनी सक्रिय न होने के बावजूद लोग सोनिया की जीत तय मान रहे हैं। ज्यादातर लोगों की जुबान पर सोनिया का नाम है। सर्जिकल स्ट्राइक और न्याय के शोर के बीच यहां चर्चा इस बात की है कि जीत का अंतर कितना होगा।
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सपा-बसपा ने सोनिया के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा है। वहीं, अमेठी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराने के लिए हर संभव कोशिश कर रही भाजपा भी सोनिया के प्रति नरम दिख रही है। पार्टी ने सोनिया के खिलाफ मजबूत प्रत्याशी नहीं उतारा है। भाजपा ने कांग्रेस से आए विधायक दिनेश प्रताप सिंह को टिकट दिया है। दिनेश दो बार कांग्रेस विधान परिषद सदस्य रहे हैं और पिछले साल अप्रैल में भाजपा में शामिल हुए थे। उससे पहले वह विधान परिषद में कांग्रेस दल के नेता थे। उन्हें सोनिया का करीबी माना जाता था। इससे पहले सोनिया का चुनाव प्रबंधन दिनेश और उनका परिवार ही देखते थे। उनके भाई राकेश सिंह रायबरेली की हरचंदपुर सीट से कांग्रेस से विधायक चुने गए थे। दूसरे भाई अवधेश सिंह रायबरेली जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।
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1921 में रायबरेली गए थे पंडित नेहरू
रायबरेली से नेहरू-गांधी परिवार का लगभग सौ साल पुराना नाता है। यही नहीं, सोनिया द्वारा 2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराना और 2006 में लोकसभा से त्यागपत्र देना लोग भूले नहीं हैं। विकास के ढेरों कार्य कराने का श्रेय भी सोनिया को है। गांधी परिवार का रायबरेली से नाता 1921 में जुड़ा। तब जवाहरलाल नेहरू किसानों पर हुई पुलिस फायरिंग का विरोध करने रायबरेली आए। फिरोज गांधी 1952 में यहां से सांसद बने। दोबारा 1957 में जीते।  वह सांसद के तौर पर मिलने वाली तनख्वाह का एक हिस्सा रायबरेली डिग्री कॉलेज को देते थे।

रायबरेली ने इंदिरा को हराया था
फिरोज के बाद इस क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व इंदिरा गांधी ने किया। 1977 में राज नारायण से हार के बाद 1980 में इंदिरा दो जगह से लड़कर जीतीं। इसके बाद उन्होंने ने रायबरेली सीट छोड़ दी, जहां उपचुनाव में भतीजे अरुण नेहरू को खड़ा किया। 1996 और 1998  में यह सीट विपक्ष के हाथों में रही। 1999 में कैप्टन सतीश शर्मा 73 हजार वोटों से जीते। सोनिया ने राजनीति में प्रवेश 1999 में अमेठी से चुनाव लड़कर किया लेकिन 2004 में  बेटे राहुल गांधी के लिए अमेठी छोड़ दी।

घर-घर संपर्क कर रहे भाजपा कार्यकर्ता 
बछरावां निवासी अध्यापक उमाशंकर त्रिपाठी बताते हैं कि रायबरेली के पूर्व विधायक अखिलेश सिंह की बेटी अदिति के कांग्रेस में शामिल होने और विधायक चुने जाने से दिनेश का परिवार कांग्रेस नेतृत्व से नाराज था। इसी वजह से उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा। दिनेश सिंह को संघ और भाजपा के काडर का भरोसा है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उनके समर्थन में सभा संबोधित कर चुके हैं। हरचंदपुर में वकील शांभवी सिंह कहते हैं कि शहरी इलाक़ों में भले कांग्रेस दिख रही हो, लेकिन भाजपा कार्यकर्ता घर-घर जनसंपर्क में लगे हैं। मतगणना के दिन संभव है, वह लोग अचंभित रह जाएं, जो आज रायबरेली को सोनिया के लिए आसान मान रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग मोदी का समर्थन भी कर रहे हैं।

सोनिया की लगातार धमाकेदार जीत
2006 में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के अध्यक्ष का पद लाभ का पद माने जाने पर सोनिया नेे इस्तीफा दे दिया। उपचुनाव में वह 4.18 लाख वोट से जीतीं। उसके बाद के दो चुनाव साढे़ तीन लाख से अधिक मतों से जीतीं। 2009 में उनके खिलाफ लड़े भाजपा के आरबी सिंह 25 हजार तो 2014 में भाजपा के अजय अग्रवाल एक लाख वोट बटोर पाए। भाजपा कार्यकर्ता शैलेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि पहले भाजपा प्रत्याशी बाहरी थे, लेकिन दिनेश हमारे बीच के हैं। 

कांग्रेस ने लगाया विकास रोकने का आरोप
कांग्रेस का कहना है कि पिछले 15 वर्ष में सोनिया कई बड़े प्रोजेक्ट रायबरेली लाईं। कांग्रेस रेल कोच फैक्ट्री, रेल व्हील फैक्ट्री, एम्स, पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, फूड पार्क, स्पाइस पार्क और मोटर ड्राइविंग कॉलेज जैसी परियोजनाएं गिनाती है। राजीव गांधी उड़ान अकादमी, हिंदुस्तान पेपर मिल, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड पहले से ही हैं। गांधी परिवार के सहयोगी किशोरी लाल शर्मा पर्चे बंटवा रहे हैं कि सोनिया ने रायबरेली का कैसा विकास किया व पिछले 5 वर्षों में कई विकास कार्य भाजपा सरकारों ने ठप कर दिए। रायबरेली के 16 लाख मतदाताओं में से आठ लाख आदिवासी, दलित और पिछड़े हैं। लगभग चार लाख मुसलमान हैं। सभी जातियों में गांधी परिवार के लिए बड़ा सम्मान है।


कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की लोकसभा सीट पर इस बार भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी कड़ी चुनौती पेश कर रही हैं। लेकिन यहां का परिणाम सिर्फ एक बात पर निर्भर है कि लोग विकास चाहते हैं या वीआईपी क्षेत्र का तमगा। अमेठी के गांवों में अधिकतर सड़कें, नालियां बदहाल हैं। बिजली कभी आती है, कभी नहीं आती। स्कूल, कॉलेजों का भी अभाव है। लोग नरेंद्र मोदी को वोट देने की बात कह रहे हैं, लेकिन उन्हें अमेठी की पहचान खोने का डर भी है, जो कि गांधी परिवार से जुड़ी है।

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