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बसपा का प्लान-2024: काडर वोट के साथ BSP का पसमांदा व पिछड़े वर्ग पर जोर, इन तीन मोर्चों पर पार्टी करेगी काम

Tue, 17 Jan 2023 06:36 AM IST
आकाश दुबे अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ Published by: आकाश दुबे Updated Tue, 17 Jan 2023 06:36 AM IST
सार

पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने जन्मदिन पर कहा था कि पार्टी अब अगले चुनाव खुद के दम पर ही लड़ेगी। इस बाबत सिपहसालारों को कार्ययोजना भी बताई गई कि यदि तीन मोर्चों पर पार्टी फोकस कर ले आगे की राह आसान हो जाएगी। इसके लिए सभी कोआर्डिनेटरों की जिम्मेदारियां भी तय की जाएंगी। 

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lok sabha chunav BSP Plan 2024 With cadre vote BSP s emphasis on Pasmanda and backward classes
बसपा सुप्रीमो मायावती - फोटो : amar ujala

विस्तार

सोशल इंजीनियरिंग के जरिए नए-नए प्रयोग करने में माहिर बसपा लोकसभा चुनाव -2024 में अपने काडर वोट के साथ पसमांदा मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग पर ज्यादा जोर दे रही हैं। तीन मोर्चों को लेकर बनाई गई नई कार्ययोजना को पार्टी निकाय चुनाव में भी आजमा सकती है। दरअसल, पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने जन्मदिन पर कहा था कि पार्टी अब अगले चुनाव खुद के दम पर ही लड़ेगी। इस बाबत सिपहसालारों को कार्ययोजना भी बताई गई कि यदि तीन मोर्चों पर पार्टी फोकस कर ले आगे की राह आसान हो जाएगी। इसके लिए सभी कोआर्डिनेटरों की जिम्मेदारियां भी तय की जाएंगी। 

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इन मोर्चों पर काम करेगी पार्टी 
एससी वोट:  प्रदेश में 21 प्रतिशत से ज्यादा अनुसूचित जाति के मतदाता विधानसभा की 300 से ज्यादा सीटों को प्रभावित करते हैं। लोकसभा चुनाव में भी यही हाल है। यहां 17 सीटें तो एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। विधानसभा चुनाव में बसपा का काडर वोटर छिटका तो पार्टी मात्र एक सीट पर सिमट गई। अब पार्टी अपना काडर वोट मजबूत करने में जुटी है। उसे इस वर्ग को संदेश देना होगा कि बसपा कमजोर नहीं है। यदि यह वर्ग पूरी ताकत से साथ आया तो तस्वीर बदली जा सकती है।

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पसमांदा मुस्लिम: प्रदेश में 18 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम वोटर माने जाते हैं। विशेष तौर पर 11 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम निर्णायक हैं। इनमें भी 70 प्रतिशत से ज्यादा संख्या पसमांदा मुस्लिमों (पिछड़ों) की है। चूंकि यह पहले भी पार्टी के साथ रहे हैं। अब भाजपा की तरफ इनका रुझान होने से बसपा में खलबली है। पार्टी का तर्क है कि विधानसभा चुनाव में इस वर्ग ने सपा के साथ जाकर देख लिया। अब बसपा के साथ आएं तो सत्ता परिवर्तन हो सकता है। 

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पिछड़ा वर्ग: बसपा सबसे बड़ा दांव पिछड़ा वर्ग पर लगाने जा रही है। प्रदेश में 50 प्रतिशत से ज्यादा यह संख्या किसी भी चुनाव का परिणाम अपने दम पर तय करती है। वर्ष 2014 व 2019 के लोकसभा चुनावों में भी यह देखा गया। यदि 2007 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो बसपा ने अति पिछड़ों पर दांव लगाकर सत्ता प्राप्त की थी। इस बार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण के मामले को भी बसपा भुनाना चाहती है। कहा गया है कि सिपहसालार जनता तक यह संदेश पहुंचाएं किभाजपा जानबूझकर ओबीसी आरक्षण को लागू ही नहीं करना चाहती है।

हर मोर्च पर अलग कोऑर्डिनेटर
नई कार्ययोजना को लागू करने के लिए बसपा हर मोर्च पर अलग अलग कोऑर्डिनेटर तैनात करने की तैयारी में है। यह कोआर्डिनेटर इन समाज के लोगों के बीच जाकर नए लोगों को जोड़ेंगे। खास तौर से युवाओं पर फोकस करेंगे। पार्टी सुप्रीमो खुद यह रिपोर्ट लेंगी कि किस समाज में कितना काम किया गया। मंडल स्तर पर साप्ताहिक व मुख्यालय स्तर पर मासिक बैठक में इसकी जानकारी देनी होगी।

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