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लोहिया विधि विवि : डिप्लोमा की राह में हॉस्टल की दीवार
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डॉ. राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय।
लखनऊ। डॉ. राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में यूजी-पीजी के नियमित पाठ्यक्रमों के साथ प्रोफेशनल पीजी डिप्लोमा कोर्स भी संचालित होते हैं। पेशेवरों के बीच इनकी मांग होने के बावजूद हर साल सीटें खाली रह जाती हैं। वजह है- पीजी डिप्लोमा छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा नहीं होना। राजधानी से बाहर के विद्यार्थियों को महंगे निजी आवास का सहारा लेना पड़ता है, जिससे वे प्रवेश से कतराते हैं।
विश्वविद्यालय में पीजी डिप्लोमा इन साइबर लॉ, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (आईपीआर) और मीडिया लॉ के एक वर्षीय पाठ्यक्रम संचालित हैं। तीनों में 38-38 सीटें हैं। आंकड़ों के मुताबिक साइबर लॉ में 2023-24 में 26 और 2024-25 में 35 प्रवेश हुए, लेकिन 2025-26 में संख्या घटकर 18 रह गई। मीडिया लॉ में दोनों सत्रों में 12-12 प्रवेश हुए, जबकि 2025-26 में सिर्फ तीन विद्यार्थी दाखिला ले सके। इस सत्र में मीडिया लॉ में आठ, आईपीआर में 23 और साइबर लॉ में 43 प्रवेश हुए हैं।
तीन दिन शाम की कक्षाएं, बाहर वालों के लिए मुश्किल
इन पाठ्यक्रमों की कक्षाएं सप्ताह में तीन दिन शाम 5:30 से 8:30 बजे तक चलती हैं। ऐसे में दूसरे शहरों से रोजाना आवागमन मुश्किल है। नतीजा यह कि प्रवेश लेने वालों में करीब 75 फीसदी स्थानीय विद्यार्थी होते हैं। हॉस्टल सुविधा होती तो इन पाठ्यक्रमों की सीटें भरने की राह शायद आसान होती।
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भविष्य में किया जा सकता है विचार
विवि में वर्तमान में छात्रावास की क्षमता सीमित है। साथ ही, पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की प्रकृति को देखते हुए वर्तमान व्यवस्था के तहत इन पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटित नहीं किया जाता है। भविष्य में अतिरिक्त छात्रावास सुविधा उपलब्ध होने पर, उपलब्धता और विवि के प्रचलित नियमों और नीतियों के अनुसार डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को भी छात्रावास आवंटन पर विचार किया जा सकता है।
- डॉ. शशांक शेखर, प्रवक्ता, लोहिया विधि विवि
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विश्वविद्यालय में पीजी डिप्लोमा इन साइबर लॉ, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (आईपीआर) और मीडिया लॉ के एक वर्षीय पाठ्यक्रम संचालित हैं। तीनों में 38-38 सीटें हैं। आंकड़ों के मुताबिक साइबर लॉ में 2023-24 में 26 और 2024-25 में 35 प्रवेश हुए, लेकिन 2025-26 में संख्या घटकर 18 रह गई। मीडिया लॉ में दोनों सत्रों में 12-12 प्रवेश हुए, जबकि 2025-26 में सिर्फ तीन विद्यार्थी दाखिला ले सके। इस सत्र में मीडिया लॉ में आठ, आईपीआर में 23 और साइबर लॉ में 43 प्रवेश हुए हैं।
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तीन दिन शाम की कक्षाएं, बाहर वालों के लिए मुश्किल
इन पाठ्यक्रमों की कक्षाएं सप्ताह में तीन दिन शाम 5:30 से 8:30 बजे तक चलती हैं। ऐसे में दूसरे शहरों से रोजाना आवागमन मुश्किल है। नतीजा यह कि प्रवेश लेने वालों में करीब 75 फीसदी स्थानीय विद्यार्थी होते हैं। हॉस्टल सुविधा होती तो इन पाठ्यक्रमों की सीटें भरने की राह शायद आसान होती।
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भविष्य में किया जा सकता है विचार
विवि में वर्तमान में छात्रावास की क्षमता सीमित है। साथ ही, पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की प्रकृति को देखते हुए वर्तमान व्यवस्था के तहत इन पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटित नहीं किया जाता है। भविष्य में अतिरिक्त छात्रावास सुविधा उपलब्ध होने पर, उपलब्धता और विवि के प्रचलित नियमों और नीतियों के अनुसार डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को भी छात्रावास आवंटन पर विचार किया जा सकता है।
- डॉ. शशांक शेखर, प्रवक्ता, लोहिया विधि विवि