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Lucknow News: एचआरएफ की ब्रांडेड छोड़ मरीजों को लिखी जा रहीं लोकल दवाएं

Tue, 13 Jan 2026 02:36 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 13 Jan 2026 02:36 AM IST
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Local medicines are being prescribed to patients instead of branded HRF medicines.
केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में मरीजों को हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) की ब्रांडेड दवाएं छोड़कर लोकल कंपनियों की दवाएं लेने पर मजबूर किया जा रहा है। ओपीडी से लेकर वार्ड में मरीजों को डॉक्टर लोकल कंपनियों की महंगी दवाएं लिख रहे हैं। इन दवाओं की कीमत भी ब्रांडेड से ज्यादा होती है। कोई कार्रवाई न होने की वजह से यह सिलसिला लगातार जारी है।
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दवा विक्रेताओं ने बताया कि कुछ वर्षों से स्थानीय स्तर पर कंपनी पंजीकृत कराकर दवाएं बनाने का चलन बढ़ा है। ये दवाएं लखनऊ के पते पर ही पंजीकृत हैं। इनकी गुणवत्ता ब्रांडेड कंपनियों के मुकाबले कम रहती है, लेकिन कीमतें काफी अधिक होती हैं। स्थानीय स्तर की कंपनी होने से वितरण का खर्च कम रहता है और डॉक्टरों से संपर्क कर उन्हें ये दवाएं लिखने के लिए प्रेरित करने के लिए प्रलोभन देना भी आसान होता है।
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केजीएमयू के एचआरएफ स्टोर में इस समय ज्यादातर दवाएं ब्रांडेड कंपनियों की हैं। ब्रांडेड कंपनियों से सीधे खरीद होने की वजह से केजीएमयू को इन दवाओं में 70 फीसदी तक छूट मिल जाती है। इसी वजह से मरीजों को भी बाजार के मुकाबले काफी कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध हो जाती हैं। कुछ डॉक्टर स्थानीय कंपनियों के प्रलोभन की वजह से एचआरएफ में मौजूद दवाओं के बजाय बाहरी दवाएं लिख रहे हैं। इस वजह से मरीजों को सस्ती दवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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केस 1- हरदोई निवासी नीतू बेटे की आंख में समस्या होने पर सोमवार को इलाज के लिए केजीएमयू आई थीं। इस दौरान उन्होंने न्यूरोलॉजी, नेत्र और बाल रोग विभाग की ओपीडी में दिखाया। तीनों विभागों से उन्हें करीब 15 दवाएं लिखी गईं। इनमें से एक भी दवा एचआरएफ काउंटर में नहीं थीं। मजबूरी में उन्हें बाहर से दवाएं लेनी पड़ीं।

केस 2-
बलरामपुर निवासी सूरजलाल ने केजीएमयू की पेन क्लीनिक में दिखाया। उन्हें चार दवाएं लिखी गईं, लेकिन इनमें से सिर्फ दो दवाएं ही मिलीं। ऐसे में उन्हें बाहर से दवाएं लेनी पड़ीं।
केस 3-
गोंडा निवासी सूरज कुमार ने जनरल सर्जरी विभाग की ओपीडी में दिखाया। उन्हें चार दवाएं लिखी गईं, लेकिन एक दवाई एचआरएफ काउंटर से नहीं मिली। यह दवा उन्हें बाहर से लेनी पड़ी।




Iकेजीएमयू के एचआरएफ स्टोर पर सभी विभागों के लिए नामी कंपनियों की ब्रांडेड दवाएं उपलब्ध हैं। मरीजों को यही दवाएं लिखी जानी चाहिए। इससे गरीब मरीज अपना इलाज करा सकेंगे।I


I- डॉ. कुमार शांतनु, चेयरमैन, एचआरएफ केजीएमयूI

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

केजीएमयू में एचआरएफ से दवा लेने पहुंचे मरीज।

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