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लखनऊ मेट्रो के अधिकारी बोले, लोग पतंगबाजी बंद कर दें, मेट्रो की दिक्कतें दूर हो जाएंगी

Tue, 12 Sep 2017 08:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 12 Sep 2017 08:57 PM IST
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LMRC officers speak on issues related to metro run.
लखनऊ मेट्रो के अधिकारी व एमडी कुमार केशव (बीच में) - फोटो : amar ujala

लखनऊवालों का पतंगबाजी का शौक मेट्रो के सुहाने सफर में अड़ंगा डाल रहा है। चाइनीज मांझा और पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाला पतला तार रोजाना करीब छह बार तक ट्रेन संचालन के समय बिजली सप्लाई ठप कर रहा है।

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ऐसे में कई बार 15 मिनट तक ट्रेनों को स्टेशनों पर खड़ा रखना पड़ रहा है। लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) की ऑपरेशन देख रही टीम को रोजाना रात के वक्त तार में उलझे मांझे निकालने पड़ रहे हैं।
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ट्रेन ऑपरेशन का काम देख रहे निदेशक रॉलिंग स्टॉक महेंद्र कुमार ने मंगलवार को मेट्रो भवन में हुई प्रेसवार्ता में बताया कि रोजाना ओवरहेड इक्विपमेंट्स (ओएचई) से तीन से चार घंटे तक पतंग उड़ाने वाले मांझे को सफाई कर निकलवाया जा रहा है। चाइनीज मांझा बनाने में धातु के गुण वाले तत्व उपयोग किए जाते हैं। इस कारण तार में मांझा फंसे होने और इसके लटकने पर ट्रेन से छूने पर करंट प्रवाहित हो जाता है।
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ऐसा होने पर सिस्टम बिजली की आपूर्ति को ट्रिप कर देता है। वहीं, मेट्रो खड़ी रहने से यात्रियों को भी समस्या झेलनी पड़ रही है। इसका एक ही विकल्प है कि लोग खुद मेट्रो लाइन के पास पतंग उड़ाना बंद करें। इससे मेट्रो के बेवजह खड़े होने की समस्या को खत्म किया जा सकेगा।

पूरी संतुष्टि होने के बाद ही वापस आएगी ट्रेन

LMRC officers speak on issues related to metro run.
एमडी कुमार केशव - फोटो : amar ujala

एमडी कुमार केशव ने बताया कि हम अभी केवल चार ट्रेनें ही चला रहे हैं। जरूरत होने पर पांचवीं ट्रेन चलाई जाएगी। बताया कि जो ट्रेन खराब हुई थी वह अलस्टॉम के मुताबिक तैयार है। खुद अलस्टॉम के एशिया फेसिफिक और इंडिया के हेड लखनऊ पहुंचे हुए हैं। लेकिन हम कोई जल्दबाजी नहीं कर रहे।

यह ट्रेन तभी रूट पर लौटेगी जब हम पूरी तरह संतुष्ट होंगे। एमडी का कहना है कि मेरा स्टाफ ट्रेन को मैन्युली भी चला सकता है। लेकिन, हमें यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करना है। ऐसे में पूरी ट्रेन को ऑटोमेटिक सिस्टम से ही चलाया जाएगा। यही वजह है कि खराबी आने पर ट्रेन को दूसरी उस ट्रेन से खींचकर ले जाया गया, जो ऑटोमेटिक सिस्टम से संचालित हो रही थी।

72 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार तक दौड़ रही मेट्रो
निदेशक महेंद्र कुमार ने बताया कि ट्रेन को अभी 72 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से यात्रियों के साथ हम दौड़ा रहे हैं। यह स्पीड हमें कृष्णानगर से ट्रांसपोर्टनगर के बीच मिल रही है। मवैया स्पान पर अधिकतम स्पीड 45 किमी है। यहां स्पीड सिस्टम के मुताबिक धीमी करनी होती है।

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