लखनऊ। बजट का संकट होने के बाद भी कुछ वार्डों को फायदा पहुंचाने के लिए बीते माह जारी हुए दस करोड़ रुपये लागत के टेंडर नगर निगम प्रशासन ने निरस्त कर दिए हैं। इसको लेकर नगर निगम प्रशासन ने आदेश भी जारी कर दिया है। सभी कार्यकारिणी सदस्यों की सहमति के बिना जारी किए गए इन टेंडरों को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद टेंडर निरस्त करने का निर्णय लिया गया। 14वें वित्त के बजट से कर्मचारियों को वेतन बांटने का आदेश शासन से जारी होने के ठीक एक दिन पहले ही टेंडर जारी किए जाने को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे थे। हैरानी की बात यह थी कि इससे पहले मई मेें ही प्रदेश सरकार नए कामों को नहीं कराए जाने का आदेश जारी कर चुकी थी। इसके बाद भी दस करोड़ के टेंडर जारी कर दिए गए। इसको लेकर सपा, कांग्रेस के पार्षद दल नेताओं से सहित ज्यादातर पार्षदों ने नाराजगी जताई थी। दस करोड़ के जो टेंडर जारी हुए थे उनमें 110 में से महज 22 वार्ड ही शामिल किए गए थे। ----- सबने कहा, अब समान रूप से हो काम नगर निगम कार्यकारिणी सदस्य और भाजपा पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि कर्मचारियों का वेतन बांटने के बाद 14वें वित्त का जो पैसा बचता है, उससे सभी वार्डों में समान रूप से काम कराए जाने चाहिए। सपा पार्षद दल के नेता यावर हुसैन रेशू का आरोप है कि शासनादेश आने से ठीक एक दिन पहले दस करोड़ के कामों के टेंडर जारी करना एक सोची समझी साजिश थी। कुछ लोग यह सोच रहे थे वेतन बंटने के बाद बजट कम हो जाएगा, ऐसे में वह पहले ही अपने वार्ड में ज्यादा काम करा लें। इसी से विवाद हो रहा था। कांग्रेस पार्षद दल की नेता ममता चौधरी का कहना है कि कुछ खास वार्डों में ही काम कराना सही नही था। उसी को लेकर टेंडर निरस्त करने की मांग की गई थी। ------------------ इन वार्डों के लिए जारी हुए थे टेंडर लाला लाजपत राय, महानगर, अलीगंज, जानकीपुरम द्वितीय हिंद नगर, डालीगंज-निराला नगर, मनकामेश्वर, भारतेंदु हरिश्चंद्र, इंदिरा प्रियदर्शिनी, राजीव गांधी- प्रथम, लाल बहादुर शास्त्री-प्रथम, कन्हैया माधवपुर-प्रथम, सआदतगंज, हैदरगंज-द्वितीय, विद्यावती-प्रथम व द्वितीय, शारदा नगर-द्वितीय, खरिका प्रथम, सरोजनी नगर-प्रथम, मैथिलीशरण गुप्त, लोहिया नगर, शंकरपुरवा-प्रथम व द्वितीय, इस्माइलगंज-प्रथम व द्वितीय, लाल बहादुर शास्त्री-द्वितीय व बाबू जगजीवन राम वार्ड। -------------- नगर निगम कार्यकारिणी में लिए गए निर्णय के बाद दस करोड़ के जो टेंडर जारी किए गए थे उनको निरस्त कर दिया गया है। पहले जो दस करोड़ के टेंडर जारी हुए थे वह जब 122 करोड़ के कामों की सूची बनी थी, उनमें शामिल थे। चूंकि बजट कम हो गया है ऐसे में संशोधित सूची बनी है। इसके हिसाब से अब करीब 54 करोड़ के टेंडर जारी किए जा रहे हैं। -मनीष कुमार सिंह