{"_id":"63cef548dafd2f60c746a585","slug":"lko-lucknow-news-lko6676682193-2023-01-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"राष्ट्रीय बालिका दिवस पर विशेष : सिस्टम का मिला साथ तो उठाने लगीं आवाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राष्ट्रीय बालिका दिवस पर विशेष : सिस्टम का मिला साथ तो उठाने लगीं आवाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
-
रोली खन्ना
लखनऊ। राजधानी की बेटियां अपने खिलाफ होने वाले अपराध आवाज उठाने को आगे आने लगी हैं। खास ये कि सिस्टम ने भी खुद को उनकी मांग के हिसाब से ढालना शुरू कर दिया है। इसकी बानगी हैं 181 वन स्टॉप सेंटर में विगत एक वर्ष में दर्ज होने वाले छेड़छाड़, साइबर अपराध और घरेलू हिंसा के वे मामले, जिनमें लड़कियों ने खुद आगे बढ़कर मदद मांगी। सेंटर ने उनकी इस हिम्मत को भरोसे में बदला। उन्हें बिना थाने के चक्कर लगवाए, गोपनीयता बरकरार रखते हुए स्टिंग ऑपरेशन तक कर डाले। बिना लाठी-डंडा चलाए, महज लिखित स्वीकृति और नियमित फॉलोअप के ही शोहदों व साइबर अपराधियों की नकेल कस दी। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर पढ़िए बेटियों के हौसले की दास्तां कहती रिपोर्ट।
शोहदों के डर से बाहर निकलना था मुश्किल, अब राहें आसान
जनवरी 2023 में 18 साल की एक लड़की 181 वन स्टाप सेंटर पहुंचती है। उसने बताया कि बीते एक वर्ष से आशियाना में कुछ लड़के आते-जाते वक्त उसे परेशान करते हैं। डर के मारे उसने स्कूल जाना बंद कर दिया है। हद तो तब हो गई जब उन लड़कों ने उसका मोबाइल फोन छीन लिया और पास ही एक सुनसान इलाके में आकर लेने को कहा। उनके गलत इरादों और बढ़ते दुस्साहस को देख लड़की ने सीधे वन स्टॉप सेंटर का रुख किया। सेंटर की टीम ने लड़कों को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं मिले। फिर टीम की एक सदस्य को उस लड़की की सहेली बनाकर लड़कों के बताए इलाके में भेजा गया और लड़कों को पकड़ लिया गया। इनके परिवार से लिखित लिया गया और वार्निंग देकर लड़कों को छोड़ा गया। अब वह लड़की फिर से स्कूल जाने लगी है।
सोशल मीडिया पर करता था मेरा पीछा, करिअर प्रभावित होने लगा
बात वर्ष 2022 की है। 24 वर्षीय मॉडल युवती 181 पहुंची। उसका कहना था कि बीते एक साल से एक युवक सोशल मीडिया से उसकी फोटो लेकर उसे अलग-अलग तरह से परेशान कर धमका रहा है। वो पुलिस में नहीं जाना चाहती, क्योंकि उसे सुर्खियों में नहीं आना। माता-पिता से इसलिए नहीं कह सकती कि वे लोग परेशान हो उठेंगे। सेंटर की टीम ने उस लड़के को फॉलो किया, उसका पता लगाकर पकड़ लाई। यहां भी परिवार और दोषी से लिखित लेकर आरोपी को वार्निंग देकर छोड़ा गया।
विज्ञापन
बेटियों के बढ़ते हौसले का प्रमाण
जनवरी 2022 से जनवरी 2023 तक के इन मामलों में लड़कियों ने खुद आगे आकर 181 वन स्टॉप सेंटर से मदद मांगी।
155 केस : घरेलू हिंसा
25 मामले : छेड़खानी
12 मामले : साइबर अपराध
(स्रोत : वन स्टॉप सेंटर का रिकॉर्ड)
बेटियों को देना होगा भरोसे का माहौल
181 वन स्टॉप सेंटर की सेंटर मैनेजर अर्चना सिंह कहती हैं, सामाजिक दबाव का डर बहुत ज्यादा है। इसीलिए महिलाएं व बच्चियां कुछ कहने से डरती हैं। हम उनकी गोपनीयता बनाए रखकर उनका भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। समाज के जिम्मेदार भी इस पहल में साथ आ जाएं तो विमेन फ्रेंडली सोसाइटी की परिकल्पना सच हो जाएगी।
विज्ञापन
रोली खन्ना
लखनऊ। राजधानी की बेटियां अपने खिलाफ होने वाले अपराध आवाज उठाने को आगे आने लगी हैं। खास ये कि सिस्टम ने भी खुद को उनकी मांग के हिसाब से ढालना शुरू कर दिया है। इसकी बानगी हैं 181 वन स्टॉप सेंटर में विगत एक वर्ष में दर्ज होने वाले छेड़छाड़, साइबर अपराध और घरेलू हिंसा के वे मामले, जिनमें लड़कियों ने खुद आगे बढ़कर मदद मांगी। सेंटर ने उनकी इस हिम्मत को भरोसे में बदला। उन्हें बिना थाने के चक्कर लगवाए, गोपनीयता बरकरार रखते हुए स्टिंग ऑपरेशन तक कर डाले। बिना लाठी-डंडा चलाए, महज लिखित स्वीकृति और नियमित फॉलोअप के ही शोहदों व साइबर अपराधियों की नकेल कस दी। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर पढ़िए बेटियों के हौसले की दास्तां कहती रिपोर्ट।
शोहदों के डर से बाहर निकलना था मुश्किल, अब राहें आसान
जनवरी 2023 में 18 साल की एक लड़की 181 वन स्टाप सेंटर पहुंचती है। उसने बताया कि बीते एक वर्ष से आशियाना में कुछ लड़के आते-जाते वक्त उसे परेशान करते हैं। डर के मारे उसने स्कूल जाना बंद कर दिया है। हद तो तब हो गई जब उन लड़कों ने उसका मोबाइल फोन छीन लिया और पास ही एक सुनसान इलाके में आकर लेने को कहा। उनके गलत इरादों और बढ़ते दुस्साहस को देख लड़की ने सीधे वन स्टॉप सेंटर का रुख किया। सेंटर की टीम ने लड़कों को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं मिले। फिर टीम की एक सदस्य को उस लड़की की सहेली बनाकर लड़कों के बताए इलाके में भेजा गया और लड़कों को पकड़ लिया गया। इनके परिवार से लिखित लिया गया और वार्निंग देकर लड़कों को छोड़ा गया। अब वह लड़की फिर से स्कूल जाने लगी है।
विज्ञापन
सोशल मीडिया पर करता था मेरा पीछा, करिअर प्रभावित होने लगा
बात वर्ष 2022 की है। 24 वर्षीय मॉडल युवती 181 पहुंची। उसका कहना था कि बीते एक साल से एक युवक सोशल मीडिया से उसकी फोटो लेकर उसे अलग-अलग तरह से परेशान कर धमका रहा है। वो पुलिस में नहीं जाना चाहती, क्योंकि उसे सुर्खियों में नहीं आना। माता-पिता से इसलिए नहीं कह सकती कि वे लोग परेशान हो उठेंगे। सेंटर की टीम ने उस लड़के को फॉलो किया, उसका पता लगाकर पकड़ लाई। यहां भी परिवार और दोषी से लिखित लेकर आरोपी को वार्निंग देकर छोड़ा गया।
विज्ञापन
बेटियों के बढ़ते हौसले का प्रमाण
जनवरी 2022 से जनवरी 2023 तक के इन मामलों में लड़कियों ने खुद आगे आकर 181 वन स्टॉप सेंटर से मदद मांगी।
155 केस : घरेलू हिंसा
25 मामले : छेड़खानी
12 मामले : साइबर अपराध
(स्रोत : वन स्टॉप सेंटर का रिकॉर्ड)
बेटियों को देना होगा भरोसे का माहौल
181 वन स्टॉप सेंटर की सेंटर मैनेजर अर्चना सिंह कहती हैं, सामाजिक दबाव का डर बहुत ज्यादा है। इसीलिए महिलाएं व बच्चियां कुछ कहने से डरती हैं। हम उनकी गोपनीयता बनाए रखकर उनका भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। समाज के जिम्मेदार भी इस पहल में साथ आ जाएं तो विमेन फ्रेंडली सोसाइटी की परिकल्पना सच हो जाएगी।