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छोटे भाई ने लिवर देकर दी नई जिंदगी, केजीएमयू में 13वां लिवर प्रत्यारोपण
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केजीएमयू के डॉक्टरों ने शुक्रवार को एक मरीज का लिवर प्रत्यारोपण किया। डॉक्टरों का कहना है मरीज-डोनर दोनों आईसीयू में हैं। दोनों की हालत स्थिर है। डॉक्टरों की टीम उन पर नजर बनाए हुए है।
विभागाध्यक्ष डॉ. अभिजीत चंद्रा ने बताया कि आलमबाग निवासी रोगी युवक (28) बीते तीन साल से लिवर सिरोसिस से ग्रस्त था। उसे पीलिया भी था। मरीज का प्लेटलेट्स काउंट बहुत कम हो गया था। गंभीर अवस्था में मरीज को केजीएमयू गेस्ट्रो सर्जरी विभाग लाया गया। मरीज के छोटे भाई ने अपना लिवर दान किया है। लिवर डोनर भाई छात्र है।
विभागाध्यक्ष डॉ. अभिजीत चन्द्रा ने बताया कि प्रत्यारोपण में केजीएमयू के 100 से अधिक डॉक्टरों और कर्मचारियों की एक टीम लगी थी। मरीज और डोनर दोनों की हालत स्थिर है। केजीएमयू के ट्रांसप्लांट आईसीयू में भर्ती करके टीम उनकी निगरानी कर रही है। डॉ. अभिजीत ने बताया कि केजीएमयू में यह 13वां लिवर प्रत्यारोपण हुआ है। अब तक 90 प्रतिशत प्रत्यारोपण सफल रहे हैं। डॉ. अभिजीत चंद्रा ने बताया कि प्रत्यारोपण में अभी तक मरीज के करीब आठ लाख रुपये खर्च हुए हैं। हालांकि राज्य सरकार की ओर से उसे यह राशि वापस भी मिल जाएगी।
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ये टीम रही शामिल
प्रत्यारोपण टीम में डॉ. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता ने प्रत्यारोपण किया। नई दिल्ली से डॉ. शालीन अग्रवाल और डॉ. राजेश डे मौजूद रहे। गेस्ट्रो सर्जरी विभाग के डॉ. संदीप कुमार वर्मा, डॉ. सुमित रूंगटा, डॉ. जीपी सिंह, डॉ. रति प्रभा, डॉ. तन्मय तिवारी, डॉ. तूलिका चंद्रा, डॉ. अमिता जैन, डॉ. नीरा कोहली समेत अन्य स्टाफ का सहयोग रहा।
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विभागाध्यक्ष डॉ. अभिजीत चंद्रा ने बताया कि आलमबाग निवासी रोगी युवक (28) बीते तीन साल से लिवर सिरोसिस से ग्रस्त था। उसे पीलिया भी था। मरीज का प्लेटलेट्स काउंट बहुत कम हो गया था। गंभीर अवस्था में मरीज को केजीएमयू गेस्ट्रो सर्जरी विभाग लाया गया। मरीज के छोटे भाई ने अपना लिवर दान किया है। लिवर डोनर भाई छात्र है।
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विभागाध्यक्ष डॉ. अभिजीत चन्द्रा ने बताया कि प्रत्यारोपण में केजीएमयू के 100 से अधिक डॉक्टरों और कर्मचारियों की एक टीम लगी थी। मरीज और डोनर दोनों की हालत स्थिर है। केजीएमयू के ट्रांसप्लांट आईसीयू में भर्ती करके टीम उनकी निगरानी कर रही है। डॉ. अभिजीत ने बताया कि केजीएमयू में यह 13वां लिवर प्रत्यारोपण हुआ है। अब तक 90 प्रतिशत प्रत्यारोपण सफल रहे हैं। डॉ. अभिजीत चंद्रा ने बताया कि प्रत्यारोपण में अभी तक मरीज के करीब आठ लाख रुपये खर्च हुए हैं। हालांकि राज्य सरकार की ओर से उसे यह राशि वापस भी मिल जाएगी।
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ये टीम रही शामिल
प्रत्यारोपण टीम में डॉ. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता ने प्रत्यारोपण किया। नई दिल्ली से डॉ. शालीन अग्रवाल और डॉ. राजेश डे मौजूद रहे। गेस्ट्रो सर्जरी विभाग के डॉ. संदीप कुमार वर्मा, डॉ. सुमित रूंगटा, डॉ. जीपी सिंह, डॉ. रति प्रभा, डॉ. तन्मय तिवारी, डॉ. तूलिका चंद्रा, डॉ. अमिता जैन, डॉ. नीरा कोहली समेत अन्य स्टाफ का सहयोग रहा।