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आयुष्मान योजना में नहीं होता किडनी व लिवर प्रत्यारोपण, दलाल कर रहे गुमराह

Tue, 24 Sep 2019 11:57 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Tue, 24 Sep 2019 11:57 AM IST
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liver and kidney transplant not included ayushman yojana, patient helpless
ayushman yojna - फोटो : amar ujala
आयुष्मान योजना में 1354 बीमारियां शामिल हैं, लेकिन किडनी, लिवर व हृदय प्रत्यारोपण सहित तमाम बीमारियां शामिल नहीं है। ऐसे में इनसे ग्रसित मरीज आयुष्मान का कार्ड लेकर अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। इसका फायदा दलाल उठाते हैं। वे कार्डधारकों को निजी अस्पतालों में कार्ड से इलाज करवाने के नाम पर ठगी कर रहे हैं।
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वहीं दूसरी ओर गरीबों को पांच लाख तक का इलाज देने वाली आयुष्मान योजना के नाम पर ठगी के मामले भी सामने आने लगे हैं। जिन बीमारियों का इलाज आयुष्मान कार्ड से नहीं हो सकता है, उनके नाम पर ठगी की जा रही है। 
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कुछ एंबुलेंस चालक और अस्पताल में घूमने वाले दलाल गरीब मरीजों को झांसा दे रहे हैं। कुछ रुपये लेकर किडनी प्रत्यारोपण कराने का दावा कर रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि आयुष्मान योजना में किडनी, लिवर, हार्ट प्रत्यारोपण, लिवर में स्टंट प्रत्यारोपण आदि को शामिल नहीं किया गया है।
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केस 1

रायबरेली निवासी संध्या (45) का इलाज एसजीपीजीआई से चल रहा है। चिकित्सक ने किडनी प्रत्यारोपण की सलाह दी। करीब 10 से 14 माह की वेटिंग बताते हुए रुपये का इंतजाम करने को कहा। इसी बीच संध्या का आयुष्मान कार्ड आ गया। वह परिवारीजनों के साथ एसजीपीजीआई पहुंची।

यहां बताया गया कि आयुष्मान योजना के जरिए किडनी प्रत्यारोपण नहीं किया जाता है। इसी बीच एक चिकित्सक के कक्ष के सामने एक व्यक्ति मिला। उसने योजना के जरिए इलाज कराने और तीन माह के अंदर प्रत्यारोपण के लिए नंबर लगवाने का दावा किया। परिवारीजन उसके झांसे में आ गए। वह पांच हजार रुपये लेकर गायब हो गया। संध्या के पति विजय सिंह ने मामले की शिकायत निदेशक से की है। लेकिन रुपये लेने वाले को वह पहचान नहीं सके।

केस 2
लखनऊ के पटेल नगर निवासी शिवमूरत द्विवेदी (60) को किडनी प्रत्यारोपण होना है। उन्हें उनकी पत्नी किडनी देने के लिए तैयार हैं। वह एसजीपीजीआई में दिखाने के बाद डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान पहुंचे। यहां आयुष्मान का कार्ड दिखाया। डॉक्टर ने बताया कि इस योजना से किडनी प्रत्यारोपण नहीं होता है।

गेट से बाहर एंबुलेंस का चालक मिला। उसने मदद का भरोसा देकर शिवमूरत का कार्ड ले लिया। बदले में दो हजार रुपये लिए। अभी तक न कार्ड लौटाया और न रुपये। शिवमूरत दो-तीन दिन तक अस्पताल में उसे ढूंढते रहे, लेकिन नहीं मिला।

आयुष्मान से जुड़े सवाल नोडल अधिकारी के जवाब

  • सवाल- आयुष्मान का नया कार्ड बन सकता है क्या?
  • जवाब- आयुष्मान का कार्ड जनगणना 2011 के अनुसार, जारी हुई सूची से बन रहा है। जिन लोगों का नाम सूची में है, उनका गोल्डन कार्ड बन रहा है। सूची एएनएम व आशा सहयोगी के पास देखी जा सकती है। अलग से कार्ड नहीं बन सकता है। इसलिए इसके नाम पर किसी को रुपये न दें।
  • सवाल- क्या अस्पताल में भर्ती होते वक्त कोई चार्ज लगता है?
  • जवाब- कार्ड लेकर अस्पताल पहुंचें। भर्र्ती होने, ऑपरेशन और दवा का पैसा नहीं लगता है। यदि जांच में रुपये खर्च हुए हैं तो डिस्चार्ज होते समय अस्पताल लौटाता है।
  • सवाल- किन अस्पतालों में इलाज करा सकते हैं?
  • जवाब- सभी सरकारी अस्पताल और योजना में सूचीबद्ध किए गए प्राइवेट अस्पताल। लखनऊ में 129 प्राइवेट अस्पताल सूची में शामिल हैं।
  • सवाल- अस्पताल में कोई दिक्कत हो तो किससे सहयोग लें।
  • जवाब- सभी अस्पतालों में एक आयुष्मान मित्र तैनात है। वह सुविधाएं दिलाने में मरीज की मदद करेगा। अस्पताल में एक हेल्प डेस्क भी है।
  •  

शिकायत या सुझाव हों तो हमें बताएं

केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत चयनित परिवार के सदस्यों का पांच लाख रुपये तक का इलाज किया जाता है। सरकारी अस्पतालों के साथ ही योजना में चयनित अस्पताल में भी कार्डधारक परिवार के सदस्य इलाज करा सकते हैं। पर, अब भी लाभार्थियों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

इसीलिए अमर उजाला ने एक अभियान की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य योजना में आ रही समस्याओं को सामने लाना और उनके निराकरण की दिशा में काम करना है, जिससे लाभार्थियों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। यदि आपकी कोई शिकायत हो या सुझाव हों तो हमें बताएं।
व्हाट्सअप नंबर- 8859108092, मेल -  chandrab@knp.amarujala.com
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