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बिना सर्जरी खुलेगा हृदय का ब्लॉकेज, एसजीपीजीआई में शुरू हुई लिथोप्लास्टी, गंभीर मरीजों को नहीं करना पड़ेगा इंतजार
Sat, 13 Mar 2021 03:37 PM IST
ishwar ashish
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 13 Mar 2021 03:37 PM IST
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- फोटो : amar ujala
राजधानी लखनऊ के रामसिंह (60) की आर्टरी में कैल्शियम से पथरी बन गई थी। इसे हटाने के लिए पहले सर्जरी करनी होती, फिर स्टेंट पड़ता। सर्जरी के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता। लेकिन यहां शुरू हुई लिथोप्लास्टी तकनीक ने रामसिंह राहत दे दी। इस तकनीक से हार्ट की आर्टरी में जमे कैल्शियम को तोड़कर स्टेंट लगा दिया गया। अब वह पूरी तरह ठीक हैं।
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रामसिंह की तरह तमाम हृदय रोगियों को इस नई तकनीक का फायदा मिलेगा। इस तकनीक के शुरू होने से सर्जरी की वेटिंग भी कम होने की उम्मीद है। यहां करीब दो साल से अधिक की वेटिंग चल रही है।
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कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. नवीन गर्ग ने बताया कि उम्रदराज मरीजों में यह समस्या ज्यादा मिलती है। करीब एक हजार गंभीर हृदय रोगियों में करीब 10 से 15 में स्टेंट से पहले कैल्शियम की वजह से जमा होने वाली पथरी हटाने की जरूरत पड़ती है। नई तकनीक से सर्जरी का दबाव कम होगा।
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ऐसे काम करती है तकनीक
पीजीआई के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. नवीन गर्ग ने बताया कि जिस तरह किडनी स्टोन को तोड़ा जाता है, उसी तरह हृदय की आर्टरी में बनी पथरी को भी एंजियोग्राफी कैथेटर के माध्यम से हटाया जाता है। इस तकनीक को लिथोप्लास्टी कहते हैं। आर्टरी के कैल्शियम को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाता है। जब ये बारीक हो जाते हैं तो स्टेंट लगा दिया जाता है। इसका फायदा यह होता है कि मरीज सर्जरी से बच जाता है। इस पर करीब ढाई लाख रुपये खर्च आता है।