बदली दिनचर्या और तनाव की वजह से लड़कियों में हो रही ये बीमारी
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तनाव, भाग-दौड़ भरी जीवन शैली व कॅरिअर की चिंता के कारण होने वाले हार्मोनल असंतुलन से महिलाओं कई बीमारियों की चपेट में आ रही हैं। खासतौर से मासिक अनियामितता, चेहरे एवं शरीर पर अस्वाभाविक बाल, मुहांसे, मोटापा, बांझपन आदि इसी का परिणाम है।
चिकित्सीय भाषा में इसे पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम नाम दिया गया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी के पूर्व निदेशक प्रो. एसके तिवारी ने शुक्रवार को टीसीआई सेंटर गोमती नगर में आयोजित संगोष्ठी में ये जानकारी दी।
रिसर्च सोसाइटी ऑफ होम्योपैथी व त्रिलोक चंद्र गोयल चेरेटेबिल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित संगोष्ठी में प्रो.तिवारी ने बताया कि यदि समय पर इस रोग का इलाज न किया जाए तो डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना, हृदय रोग व बांझपन हो सकता है।
केंद्रीय होम्योपैथिक परिषद के सदस्य डॉ. अनिरुद्ध वर्मा ने बताया कि आजकल 30-35 फीसदी महिलाएं इस रोग से प्रभावित हैं। इस मौके पर नेत्र रोग विशेषक डॉ. उपसम गोयल, सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. सीपी सिंह ने मुख्य वक्ता प्रो.एसके तिवारी को सम्मानित किया।
बताया गया हेपेटाइटिस सी के बारे में
हेपेटाइटिस-सी संक्रमण के इलाज में अब मरीज को एक दिन में मात्र 5 से 6 गोलियां लेनी होती हैं। यह उपचार छह माह तक चलता है। इससे 80 से 90 फीसदी रोगी पूरी तरह से वायरस के संक्रमण से मुक्त हो जाते हैं।
यही नहीं इस इलाज में खर्च भी कम होता है। संजय गांधी पीजीआई की वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी मोनालिसा चौधरी ने ये जानकारी शुक्रवार को दी। उन्होंने बताया कि वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे 28 जुलाई को मनाया जाता है।
संक्रमित रक्त से होने वाले हेपेटाइटिस सी के संक्रमण को रोकने और उसके इलाज की नवीनतम जानकारी चिकित्सकों तक पहुंचाने के लिए 26 जुलाई को एसजीपीजीआई में एक सतत् चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) का आयोजन किया जाएगा।
इसमें हेपेटाइटिस-सी के संक्रमण के उपचार की जानकारी दी जाएगी। संगोष्ठी का मुख्य व्याख्यान एम्स दिल्ली के गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के हेड पद्मश्री डॉ. एसके आचार्या देंगे। वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे की थीम इस वर्ष की ‘हेपेटाइटिस से बचाव’ है।