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लखनऊ : हत्या के मामले में उम्रकैदी 38 साल बाद बरी, 1979 के एक मामले में हुई थी सजा
Sun, 08 May 2022 06:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 08 May 2022 06:32 AM IST
सार
41 साल पहले हुई हत्या के मामले में उसे सत्र अदालत से आजीवन कारावास की सजा हुई थी। इसके खिलाफ उसने वर्ष 1984 में हाईकोर्ट में अपील की। कोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से मंजूर कर उसे हत्या के आरोप से दोषमुक्त कर दिया।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हत्या के मामले में एक उम्रकैदी को 38 साल बाद बरी कर दिया। 41 साल पहले हुई हत्या के मामले में उसे सत्र अदालत से आजीवन कारावास की सजा हुई थी। इसके खिलाफ उसने वर्ष 1984 में हाईकोर्ट में अपील की। कोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से मंजूर कर उसे हत्या के आरोप से दोषमुक्त कर दिया।
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न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव-प्रथम की खंडपीठ ने यह फैसला एकमात्र जीवित अपीलकर्ता राजबहादुर सिंह की अपील पर सुनाया। अपील में उन्नाव की सत्र अदालत से 19 जनवरी 1984 को उसे हत्या के जुर्म में सुनाई गई उम्रकैद की सजा के फैसले को चुनौती दी गई थी। इस मामले के अन्य सजायाफ्ता अपीलकर्ताओं की मृत्यु की वजह से उनकी अपीलों को समाप्त किया गया था।
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घटना उन्नाव के अजगैन थाने से संबंधित थी जिसमें अपीलकर्ता के खिलाफ अन्य आरोपियों के साथ मिलकर हत्या, आग लगाने आदि के आरोप थे। अपीलकर्ता की तरफ से उसे इस मामले में गलत फंसाए जाने की दलील दी गई। उधर, सरकारी वकील ने अपील का विरोध किया।
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कोर्ट ने अपीलकर्ता को हत्या के जुर्म में सुनाई गई उम्रकैद की सजा को संदेह से परे साबित न किया जाना करार देकर समाप्त कर दिया। साथ ही आगजनी आदि के आरोपों में उसकी दोषसिद्धि व सजा की पुष्टि की है।