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यूपी: हड़ताल को लेकर राजस्व परिषद और लेखपाल संघ आमने-सामने, लगाए आरोप

Thu, 26 Dec 2019 07:09 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 26 Dec 2019 07:09 PM IST
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Lekhpal Sangh and Rajasav Parishad face to face over strike.
- फोटो : amar ujala

प्रदेश में लेखपालों की हड़ताल को लेकर राजस्व परिषद और लेखपाल संघ आमने-सामने हो गए हैं। राजस्व परिषद ने बीते दो वर्ष में लेखपालों को दी गई सुविधाओं और लाभों की सूची जारी करते हुए प्रदेश के मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को स्थानीय स्तर पर लेखपालों से बात कर हड़ताल समाप्त कराने के लिए पत्र लिखा है। उधर, लेखपाल संघ का आरोप है कि परिषद के अधिकारी प्रदेश स्तर पर संघ के पदाधिकारियों से बातचीत कर समस्या समाधान निकालने की जगह लेखपालों में फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं।

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प्रदेश में 10 दिसंबर से लेखपालों की हड़ताल चल रही है। लेखपालों की हड़ताल समाप्त कराने के लिए सरकार ने लेखपाल संघ के पदाधिकारियों को निलंबित करने से लेकर बर्खास्त करने तक का प्रयास कर लिया। सरकार के दबाव के बाद भी लेखपालों की हड़ताल समाप्त नहीं होने पर अब राजस्व परिषद ने मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है।
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लेखपाल संघ का कहना है कि सरकार के स्तर पर मांग पूरी नहीं होने तक लेखपाल संघ हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। लेखपाल संघ ने राजस्व परिषद की ओर से जारी सूची में बताई गई हर सुविधा और लाभ की हकीकत लेखपालों को बताई है।
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लेखपाल संघ के महामंत्री ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि संघ प्रदेश में किसान, मजदूर और नौजवान को परेशान नहीं करना चाहता। लेकिन संघ की वाजिब मांगों का शासनादेश जारी नहीं कर कार्य बहिष्कार के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने मुख्य सचिव से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

विधानसभा का घेराव स्थगित
ब्रजेश कुमार ने बताया कि लेखपाल संघ की 8 सूत्री मांगों पर शासनादेश जारी नहीं होने से नाराज लेखपालों ने 26 दिसंबर को विधानसभा घेराव करने की घोषणा की थी। लेकिन, प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में उपद्रव से बनी तनावपूर्ण स्थिति के चलते संघ ने विधानसभा घेराव का कार्यक्रम स्थगित कर दिया है। उन्होंने कहा कि पूर्ण कार्य बहिष्कार मांगें पूरी नहीं होने तक जारी रहेगा।

राजस्व परिषद का दावा

- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लेखपालों को स्मार्ट फोन उपलब्ध कराए गए हैं।
- ई-डिस्ट्रिक योजना के तहत सभी लेखपालों को लैपटॉप दिए गए हैं।
- जन सुविधा केंद्रों द्वारा दी जा रही सुविधाओं में आय, जाति, निवास प्रमाण पत्रों के आवेदन पत्रों की प्रिंटिंग पर होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति भी लेखपालों को दी गई है।
- लेखपालों को फर्नीचर, शौचालय, बैठने की व्यवस्था के लिए हर तहसील को एक लाख रुपये का बजट दिया गया है।

- लेखपालों की जल्द पदोन्नति के लिए राजस्व निरीक्षकों के 1409 पद सृजन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। लेखपालों की पदोन्नति के लिए 2015 में 1308 और 2016 में 500 राजस्व निरीक्षकों के पद सृजित किए गए हैं।
- चयन वर्ष 2016-17 और 2017-18 में रिक्त पदों के सापेक्ष 2521 कार्मिकों को राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया है।

- 643 लेखपालों को उनके आग्रह पर उनके गृह मंडल (गृह जिले को छोड़कर) में स्थानांतरण किया गया है।
- लेखपालों और राजस्व निरीक्षकों द्वारा विभिन्न फसलों की क्राप कटिंग प्रयोगों के लिए देय राशि को सौ से बढ़ाकर दो सौ रुपये किया गया है।
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधी योजना में लेखपालों को प्रति खाता इंसेंटिव दिलाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।

लेखपाल संघ का पलटवार

- लेखपालों को स्मार्ट फोन देने का निर्णय 27 अक्तूबर 2014 को लिया गया था। पांच साल बाद दो बार आंदोलन करने पर 2019 में स्मार्ट फोन दिया गया। स्मार्ट फोन लेखपालों की मांग नहीं थी बल्कि सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में डिजिटल व्यवस्था के लिए दिया था।
- आनलाइन प्रमाण पत्र की व्यवस्था के लिए शासन ने 27 अक्तूबर 2014 को लेखपालों को लैपटाप देने का निर्णय किया था। दो बार आंदोलन करने पर पांच वर्ष बाद 2019 में लैपटाप दिया गया। लेखपालों ने पांच वर्ष तक खुद के खर्च से काम किया।

- ई-डिस्ट्रिक योजना में लेखपाल निजी व्यय पर कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की सहमति के बाद 16 जुलाई 2018 को पांच रुपये भुगतान का निर्णय लिया गया था, लेकिन भुगतान आज तक नहीं मिला।
- तहसीलों में आधारभूत सुविधाओं के लिए लंबे आंदोलन के बाद 5 जुलाई 2018 को राजस्व परिषद ने पत्र जारी किया। लेकिन, पत्र स्पष्ट नहीं होने से तहसीलों में लेखपालों को आज तक सुविधा नहीं मिली है।

- 3 मई 2018 को पांच लेखपालों पर एक राजस्व निरीक्षक नियुक्त करने का निर्णय किया गया। लेकिन, प्रस्ताव दस लेखपालों पर एक राजस्व निरीक्षक का बनाया गया। मुख्यमंत्री की सहमति के बाद भी राजस्व निरीक्षक के 1409 पद सृजन का प्रस्ताव लंबित है।

- लेखपालों को पदोन्नति नहीं दी जा रही है। राजस्व निरीक्षक के पद सृजित नहीं होने से पूरे सेवाकाल में एक भी पदोन्नति नहीं मिलने से लेखपाल कुंठित हैं। इससे वेतन विसंगति भी उत्पन्न हो गई है।
- 2018 में निजी अनुरोध पर लेखपालों का गृह मंडल में एक भी स्थानांतरण नहीं किया गया। 2019 में 2700 आवेदन के सापेक्ष 643 लेखपालों का स्थानांतरण किया गया।

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