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बहराइच : पैसे लेकर भी लेखपाल ने नहीं दर्ज की वरासत, डीएम से की फरियाद तो मिला न्याय

Sat, 23 Mar 2019 07:42 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला बहराइच
न्यूज डेस्क, अमर उजाला बहराइच Published by: Amulya Rastogi Updated Sat, 23 Mar 2019 07:42 PM IST
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lekhpal didnt register the will after taking the money, dm orders justice
बहराइच के डीएम शंभु कुमार - फोटो : amar ujala
बहराइच के खम्हरिया शुक्ल गांव निवासी किसान के पिता की मौत के दो माह बाद भी लेखपाल ने वरासत नहीं दर्ज की। उससे कागजात के साथ पैसे भी लिये गये थे। डीएम के सामने मामला पहुंचा, तो वह आग बबूला हो गए। डीएम ने दो माह से चक्कर लगाने पर एसडीएम महसी और कानूनगो को नोटिस थमाते हुए एक सप्ताह में जवाब मांगा है। 
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लेखपाल को आरोप पत्र थमाते हुए जांच तहसीलदार महसी को सौंपी है। डीएम नेआनन-फानन में ग्रामीण की वरासत दर्ज कराकर संशोधित खतौनी शनिवार को किसान को सौंपी। इस पर किसान डीएम कार्यालय में फफक कर रो पड़ा।
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महसी तहसील क्षेत्र के ग्राम खम्हरिया शुक्ल निवासी तिलकराम के पिता रामहेत का निधन 28 दिसंबर को हो गया था। पिता की मौत के बाद तिलकराम ने वरासत कराने के लिए सभी भाईयों व मां का आधार कार्ड, पुरानी खतौनी और सरकारी खर्चे के नाम पर करीब पांच सौ रुपये क्षेत्रीय लेखपाल लल्लूराम को दे दिए थे। 
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इसी बीच 30 जनवरी को उसके भाई संतोष कुमार उर्फ पकुला की भी मौत हो गई। इसकी सूचना लेखपाल लल्लूराम को देने के बाद भी वरासत दर्ज नहीं की गई। पीड़ित किसान ने जिलाधिकारी शंभु कुमार से मामले की शिकायत की। डीएम के संज्ञान में आने पर उन्होंने तत्काल वरासत दर्ज करने के आदेश दिए। 

फिर भी लेखपाल की हीलाहवाली बरकरार रही। पुनः पीड़ित किसान डीएम के पास पहुंचा तो जिलाधिकारी का रुख सख्त हो गया। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम सुरेंद्र नारायण त्रिपाठी और राजस्व निरीक्षक रामचंदर गुप्ता को स्पष्टीकरण की नोटिस थमा दी।

मिलेगा बीमा का लाभ

जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी महसी को यह भी निर्देश दिया है कि तहसील में अभियान चलाकर वरासत के मामलों को समय से निस्तारित करायें। किसी भी आवेदनकर्ता को अनावश्यक रूप से दौड़ाया न जाये। डीएम शंभु कुमार ने यह भी निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता तिलकराम को पारिवारिक लाभ योजना व मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना से नियमानुसार आच्छादित भी किया जाय।

तो गांव की राजनीति का शिकार था किसान
पीड़ित किसान तिलकराम ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि गांव के ग्राम प्रधान उससे चुनावी रंजिश रखते हैं। इसी के चलते वरासत में उसका नाम दर्ज नहीं होने दिया जा रहा था। लेखपाल भी ग्राम प्रधान के बहकावे में काम करते हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि इस मामले में तहसीलदार जांच कर रहे हैं।
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