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Lucknow News: कुकरैल नदी के किनारे भीखमपुर में एलडीए बनाएगा उर्मिला वन
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उर्मिला वन का मानचित्र देखतीं कमिश्नर।
लखनऊ। एलडीए कुकरैल नदी के किनारे भीखमपुर में करीब 24 एकड़ क्षेत्रफल में उर्मिला वन विकसित करेगा। इस वन को पूरी तरह प्राकृतिक रूप में विकसित किया जाएगा और सुरक्षा के लिए फेंसिंग को छोड़कर बाकी कोई पक्का निर्माण नहीं होगा। बुधवार को मंडलायुक्त रोशन जैकब ने स्थल का निरीक्षण कर जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इस मौके पर एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार भी मौजूद रहे।
एलडीए वीसी ने बताया कि पेपरमिल कॉलोनी के भीखमपुर के पास कुकरैल नदी से सटी लगभग 24 एकड़ भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया था। अब उस स्थान पर उर्मिला वन विकसित किया जाएगा। यह वन शहरवासियों को ताजी सांस तो देगा ही, पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रदेश भर में चलाए जा रहे महाअभियान में एक अलग कीर्तिमान भी स्थापित करेगा। इसके लिए यहां मियावॉकी पद्धति से पौधरोपण किया जाएगा, जिससे सघन वन विकसित होगा।
यहां रोपित होने वाले पेड़-पौधों का चयन भी पर्यावरण को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इससे एक तरफ वायु शुद्धि, छाया एवं शीतलता, मिट्टी सुधार, कटाव नियंत्रण व जैव विविधता को समर्थन मिलेगा। वहीं, दूसरी तरफ कुकरैल नदी के किनारे का वन बनाए जाने से जल गुणवत्ता में सुधार, बाढ़ और जैव विविधता एवं जलवायु शुद्धिकरण होगा।
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वन में लगाए जाने वाले पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए पूरे वन क्षेत्र में अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसमें निर्धारित दूरी पर पॉप-अप स्प्रिंकलर लगाए जाएंगे, जिससे पौधों को नियमित रूप से पानी दिया जा सकेगा।
लगेंगे विभिन्न प्रजातियों के पौधे
एलडीए के सहायक उद्यान अधिकारी कर्ण सिंह ने बताया कि उर्मिला वन में बरगद, पीपल, पारस पीपल, पाकड़, पिलखन, आम, अमरूद, नीम, सैलिक्स, कैलामस, थ्रीविया नोडिफीलिया व गूलर आदि के पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा अर्जुन, जामुन, बांस और नदी के किनारे कैना, लोटस, वॉटर लिली, कोलकेसिया, वॉटर ल्यूटस, सालविनिया व विटिवर आदि प्रजातियों के भी पौधे लगाये जाएंगे, जो पानी में लेड की मात्रा को नियंत्रित रखेंगे।
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एलडीए वीसी ने बताया कि पेपरमिल कॉलोनी के भीखमपुर के पास कुकरैल नदी से सटी लगभग 24 एकड़ भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया था। अब उस स्थान पर उर्मिला वन विकसित किया जाएगा। यह वन शहरवासियों को ताजी सांस तो देगा ही, पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रदेश भर में चलाए जा रहे महाअभियान में एक अलग कीर्तिमान भी स्थापित करेगा। इसके लिए यहां मियावॉकी पद्धति से पौधरोपण किया जाएगा, जिससे सघन वन विकसित होगा।
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यहां रोपित होने वाले पेड़-पौधों का चयन भी पर्यावरण को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इससे एक तरफ वायु शुद्धि, छाया एवं शीतलता, मिट्टी सुधार, कटाव नियंत्रण व जैव विविधता को समर्थन मिलेगा। वहीं, दूसरी तरफ कुकरैल नदी के किनारे का वन बनाए जाने से जल गुणवत्ता में सुधार, बाढ़ और जैव विविधता एवं जलवायु शुद्धिकरण होगा।
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वन में लगाए जाने वाले पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए पूरे वन क्षेत्र में अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इसमें निर्धारित दूरी पर पॉप-अप स्प्रिंकलर लगाए जाएंगे, जिससे पौधों को नियमित रूप से पानी दिया जा सकेगा।
लगेंगे विभिन्न प्रजातियों के पौधे
एलडीए के सहायक उद्यान अधिकारी कर्ण सिंह ने बताया कि उर्मिला वन में बरगद, पीपल, पारस पीपल, पाकड़, पिलखन, आम, अमरूद, नीम, सैलिक्स, कैलामस, थ्रीविया नोडिफीलिया व गूलर आदि के पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा अर्जुन, जामुन, बांस और नदी के किनारे कैना, लोटस, वॉटर लिली, कोलकेसिया, वॉटर ल्यूटस, सालविनिया व विटिवर आदि प्रजातियों के भी पौधे लगाये जाएंगे, जो पानी में लेड की मात्रा को नियंत्रित रखेंगे।