{"_id":"618d801ead37e37da325b271","slug":"lda-administration-broke-almirah-of-clerk-lucknow-news-lko6040102139","type":"story","status":"publish","title_hn":"13 भूखंड व भवन की रजिस्ट्री करने वाले बाबू की अलमारी तोड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
13 भूखंड व भवन की रजिस्ट्री करने वाले बाबू की अलमारी तोड़ी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एलडीए की 13 संपत्तियों की बिना आवंटन रजिस्ट्री कराने वाले बाबू पवन गौतम की अलमारी और मेज की दराज बृहस्पतिवार को तोड़ी गईं। कुल 160 फाइलें निकली हैं।
इनमें से अधिकांश की रजिस्ट्री तीन महीने से अधिक पुरानी हैं। फिर भी इन फाइलों को संपत्ति विभाग या रिकॉर्ड रूम नहीं भेजा गया था।
नायब तहसीलदार स्निग्धा चतुर्वेदी ने नई बिल्डिंग में दूसरे तल पर बनी रजिस्ट्री सेल में रखी अलमारी और मेज की दराज का लॉक तोड़वाया।
इसमें से निकली फाइलों की सूची बनवाई गई है। नायब तहसीलदार ने बताया कि जांच के बाद रिकॉर्ड रूम को फाइलें हैंडओवर कर दी जाएंगी।
मेज की दराज से मिले रजिस्टर में उन संपत्तियों का विवरण है, जिनकी रजिस्ट्री बाबू ने कराई। इस रजिस्टर में जाली दस्तावेज का उपयोग कर रजिस्ट्री की गईं 13 भवन, भूखंड के बारे में कोई सूचना दर्ज नहीं की गई है।
माहभर तक सूचना छिपाए रहा स्टाफ
रजिस्ट्री सेल का स्टाफ एक महीने तक अलमारी और मेज की दराज की सूचना छिपाए रहा, जबकि इस अलमारी और मेज के पास पूर्व से तैनात व नए कर्मचारी बैठ रहे थे। किसी तरह अधिकारियों तक इसकी सूचना पहुंचने के बाद अलमारियों को खुलवाया जा सका।
तीन महीने की ऑडिट के बाद सुरक्षित हुई एलडीए की वेबसाइट
तीन महीने तक चले सिक्योरिटी ऑडिट के बाद एलडीए के वेब पोर्टल और सर्वर को सुरक्षित बना लिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि अब डाटा के साथ पोर्टल पर कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। इसके लिए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की अधिकृत विशेषज्ञ संस्था कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम-इंडिया (सर्ट-इन) से प्रमाण पत्र भी एलडीए को जारी हो गया है। एलडीए के ओएसडी देवांश त्रिवेदी ने बताया कि बृहस्पतिवार को सर्ट-इन से वेब सिक्योरिटी ऑडिट सर्टिफिकेट जारी हो गया। यह ऑडिट एलडीए ने लगातार पोर्टल पर डाटा से छेड़छाड़ और संपत्तियों के रिकॉर्ड बदले जाने की सामने आने के बाद कराया गया। ऑडिट में ओटीपी बाईपास और टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन बाईपास व अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा इंतजाम को परखा गया। कुछ दिक्कतें सामने आईं, जिनको ठीक करा दिया गया है। प्रोग्रामर एनालिस्ट राघवेंद्र मिश्र का कहना है कि संस्था द्वारा समय-समय पर बताए गए उन सभी तकनीकी बिंदुओं जिनसे सॉफ्टवेयर की सुरक्षा को खतरा हो सकता था। उनका समाधान किया गया है। तीन महीने के बाद अब वेबसाइट को पूरी तरह सुरक्षित बना लिया गया है।
विज्ञापन
अब बिना ओटीपी नहीं बदल सकेगा रिकॉर्ड
एलडीए अधिकारियों का कहना है कि बिना ओटीपी कोई भी रिकॉर्ड नहीं बदला जा सकेगा। इसके अलावा पहले ही विशेष तौर पर आरक्षित कंप्यूटर से ही अब डाटा में बदलाव करने की अनुमति होगी। यहां तैनात कर्मचारी ही डाटा को बदल सकेंगे। वहीं, खुद से सिस्टम के पासवर्ड सेव कर लिए जाने जैसे विकल्प भी सुरक्षा को देखते हुए बंद करा दिए गए हैं। बाहरी लोकेशन से सेंध लगाने को भी अब सुरक्षा बढ़ाकर रोकने का काम किया गया है।
विज्ञापन
इनमें से अधिकांश की रजिस्ट्री तीन महीने से अधिक पुरानी हैं। फिर भी इन फाइलों को संपत्ति विभाग या रिकॉर्ड रूम नहीं भेजा गया था।
नायब तहसीलदार स्निग्धा चतुर्वेदी ने नई बिल्डिंग में दूसरे तल पर बनी रजिस्ट्री सेल में रखी अलमारी और मेज की दराज का लॉक तोड़वाया।
इसमें से निकली फाइलों की सूची बनवाई गई है। नायब तहसीलदार ने बताया कि जांच के बाद रिकॉर्ड रूम को फाइलें हैंडओवर कर दी जाएंगी।
मेज की दराज से मिले रजिस्टर में उन संपत्तियों का विवरण है, जिनकी रजिस्ट्री बाबू ने कराई। इस रजिस्टर में जाली दस्तावेज का उपयोग कर रजिस्ट्री की गईं 13 भवन, भूखंड के बारे में कोई सूचना दर्ज नहीं की गई है।
माहभर तक सूचना छिपाए रहा स्टाफ
रजिस्ट्री सेल का स्टाफ एक महीने तक अलमारी और मेज की दराज की सूचना छिपाए रहा, जबकि इस अलमारी और मेज के पास पूर्व से तैनात व नए कर्मचारी बैठ रहे थे। किसी तरह अधिकारियों तक इसकी सूचना पहुंचने के बाद अलमारियों को खुलवाया जा सका।
विज्ञापन
तीन महीने की ऑडिट के बाद सुरक्षित हुई एलडीए की वेबसाइट
तीन महीने तक चले सिक्योरिटी ऑडिट के बाद एलडीए के वेब पोर्टल और सर्वर को सुरक्षित बना लिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि अब डाटा के साथ पोर्टल पर कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। इसके लिए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की अधिकृत विशेषज्ञ संस्था कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम-इंडिया (सर्ट-इन) से प्रमाण पत्र भी एलडीए को जारी हो गया है। एलडीए के ओएसडी देवांश त्रिवेदी ने बताया कि बृहस्पतिवार को सर्ट-इन से वेब सिक्योरिटी ऑडिट सर्टिफिकेट जारी हो गया। यह ऑडिट एलडीए ने लगातार पोर्टल पर डाटा से छेड़छाड़ और संपत्तियों के रिकॉर्ड बदले जाने की सामने आने के बाद कराया गया। ऑडिट में ओटीपी बाईपास और टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन बाईपास व अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा इंतजाम को परखा गया। कुछ दिक्कतें सामने आईं, जिनको ठीक करा दिया गया है। प्रोग्रामर एनालिस्ट राघवेंद्र मिश्र का कहना है कि संस्था द्वारा समय-समय पर बताए गए उन सभी तकनीकी बिंदुओं जिनसे सॉफ्टवेयर की सुरक्षा को खतरा हो सकता था। उनका समाधान किया गया है। तीन महीने के बाद अब वेबसाइट को पूरी तरह सुरक्षित बना लिया गया है।
विज्ञापन
अब बिना ओटीपी नहीं बदल सकेगा रिकॉर्ड
एलडीए अधिकारियों का कहना है कि बिना ओटीपी कोई भी रिकॉर्ड नहीं बदला जा सकेगा। इसके अलावा पहले ही विशेष तौर पर आरक्षित कंप्यूटर से ही अब डाटा में बदलाव करने की अनुमति होगी। यहां तैनात कर्मचारी ही डाटा को बदल सकेंगे। वहीं, खुद से सिस्टम के पासवर्ड सेव कर लिए जाने जैसे विकल्प भी सुरक्षा को देखते हुए बंद करा दिए गए हैं। बाहरी लोकेशन से सेंध लगाने को भी अब सुरक्षा बढ़ाकर रोकने का काम किया गया है।